तीन तलाक अध्‍यादेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : तीन तलाक पर नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा लाए गए अध्यादेश के विरोध में केरल के मुस्लिम संगठन ने सु्प्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। खबर के मुता​बिक केरल के सुन्नी समुदाय के मुस्लिम संगठन जमीयत उल उलमा ने सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर लाए गए अध्यादेश को मुस्लिमों के पर्सनल लॉ में दखल और उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला फैसला बताया है। 

बता दें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक बार में तीन तलाक के चलन पर प्रतिबंध लगाने वाले अध्यादेश पर 19 सितंबर की रात में हस्ताक्षर करके इसे मंजूरी दे दी थी। दरअसल, नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने इस अध्यादेश को 19 सितंबर की सुबह पास कर दिया था। इस अध्यादेश में तीन तलाक को प्रतिबंधित करने और इसे दंडनीय अपराध बनाने का प्राब्धान है। प्रस्तावित कानून में तीन तलाक को अपराध माना गया है और इसे कानूनी तौर पर गैर-जमानती अपराध की श्रेणि में रखा गया है। आरोपी मुकदमे से पहले भी मजिस्ट्रेट की अदालत में जमानत की गुहार लगा सकता है। गैर-जमानती अपराध में आरोपी को पुलिस थाने से जमानत नहीं दी जाती। इसके लिए अदालत का रुख करना होता है।

इस कानून के तहत पुलिस तीन तलाक के मामलों में प्राथमिकी तभी दर्ज करेगी जब पीडि़ता, उसके सगे-संबंधी या उसकी शादी की वजह से रिश्तेदार बन चुके लोग पुलिस का रुख करें। प्रस्तावित कानून के मुताबिक पड़ोसी एवं अन्य शिकायत दाखिल नहीं कर सकते। एक बार में तीन तलाक अब समाधेय होगा। समाधेय अपराध के तहत दोनों पक्षों के पास मामला वापस लेने की स्वतंत्रता होती है। प्रस्तावित कानून केवल एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत पर लागू होगा और यह पीडि़ता को अपने लिए एवं अपने नाबालिग बच्चे के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट के पास जाने की शक्ति देता है। कोई महिला मजिस्ट्रेट से अपने नाबालिग बच्चे के संरक्षण का अधिकार भी मांग सकती है जिस पर अंतिम फैसला वही लेंगे।

एक बार में तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाले अध्‍यादेश पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कानूनी समिति ने विचार करने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि अगले कुछ दिनों में बैठक करके इस बारे में आगे की तैयारी पर चर्चा होगी। बोर्ड के कुछ सदस्‍य अध्‍यादेश में आपराधिक धारा के खिलाफ अदालत जाने के पक्ष में हैं। बोर्ड के एक सदस्‍य कासिम रसूल इलियास ने मीडिया से कहा कि जिस तरह से इसे अपराध बनाया गया है, उससे अदालत जाने की जरूरत पैदा हो गई है। हम जल्‍द ही तय करेंगे कि यह कैसे करना है। कासिम ने कहा, अध्‍यादेश की संभावना थी क्‍योंकि हमें लगा था कि सरकार राज्‍यसभा से विधेयक पास होने का इंतजार नहीं करना चाहती। यह सिर्फ  मुद्दे से ध्‍यान भटकाने के लिए किया गया है।
 

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