परगट सिंह का कै. अमरेन्द्र सिंह को पत्र

10:40 AM Feb 18, 2020 |

दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की प्रचंड जीत का प्रभाव पंजाब की राजनीति पर पडऩे की बात इन्हीं कालमों में कुछ दिन पहले कही गई थी। जालंधर छावनी के कांग्रेसी विधायक स. परगट सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह को जो पत्र लिखा है उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस के भीतर पंजाब में अपने भविष्य को लेकर काफी चिंता व चिंतन दोनों चल रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़ तक को मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह से मिलने का समय लेने में परेशानी हो रही है। सरकार की कारगुजारी से कांग्रेसी विधायक अंसतुष्ट हैं। धरातल का सत्य तो यह है कि विधायकों की सरकार में कोई सुनवाई ही नहीं। कै. अमरेन्द्र सिंह विधायकों से कहीं अधिक अपने दरबारियों को महत्व देते हैं।
कांग्रेस की आंतरिक धड़ेबंदी के कारण सत्ता और संगठन की दूरियां बढ़ती जा रही हैं। कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व कै. अमरेन्द्र सिंह की अनदेखी करने की स्थिति में नहीं है।

दिल्ली में कांग्रेस को मिली हार ने कै. अमरेन्द्र सिंह के राजनीतिक कद को और बड़ा कर दिया है। लेकिन कांग्रेसियों की समस्या यह है कि पंजाब में कांग्रेस के पास कै. अमरेन्द्र सिंह के विकल्प के रूप में अभी कोई चेहरा भी नहीं है और कै. अमरेन्द्र सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वह भविष्य में चुनाव लडऩे का इरादा नहीं रखते। वैसे राजनीति में वायदें व घोषणाएं कब टूट जाती हैं पता भी नहीं चलता। कै. अमरेन्द्र सिंह के मामले में यह कहा जा सकता है कि 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में उनका गिरता स्वास्थ्य और बढ़ती आयु ही उनके लिए सबसे बड़ी बाधाएं कही जा सकती हैं।

उपरोक्त स्थिति को समझते हुए व पंजाब में कांग्रेस के भविष्य को देखते हुए ही विधायक परगट सिंह ने  उन तमाम मुद्दों को उठाया है जो विपक्षी दल उठा रहे हैं और जनता में उनको लेकर चर्चा हो रही है। परगट सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि ‘प्रदेश में नशों के चलन को नकेल डालने में हम सफल नहीं हुए। भ्रष्टाचार को नकेल डालने व रेत, ट्रांसपोर्ट व शराब माफिया पर शिकंजा कसने की बात तो शुरू नहीं हो सकी। अकाली-भाजपा सरकार द्वारा अनाज खरीद से 31 ह•ाार करोड़ रुपए की राशि को कर्• में बदलने के बड़े घोटाले की जांच के वादे पर भी अमल होना जहां बाकी है। वहीं निजी बिजली कम्पनियों के साथ हुए समझौतों बारे लगाए बड़े आरोपों बारे तो चुप्पी ही धारण की हुई है। उन्होंने लिखा है कि 77 सीटें जीताकर आपकी सरकार बनाने वाले पंजाबी, अफसोस की बात है कि, आपकी अगुवाई वाली सरकार की कारगुजारी से निराश हो रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि कांग्रेस की सरकार बनने में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदगी के मुद्दे ने सबसे अधिक योगदान डाला था। उन्होंने सवाल किया कि बेअदबी के आरोपियों को कटघरे में खड़ा करने और जुल्म करने वाले आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए हमारी सरकार के प्रयास लोगों के दिलों में संदेह के दायरे में क्यों आ रहे हैं? सख्त लहज़े में लिखे पत्र में परगट सिंह ने कहा कि मैं आपको निजी हैसियत से पत्र लिख रहा हूं क्योंकि मुझे पंजाब से प्यार है और आपके लिए सम्मान है।   

उन्होंने चुनावों के समय किए वादों की बात करते हुए कहा कि नशों के चलन को कोई नकेल नहीं पड़ रही। बादलों के शासन समय खज़ाना लूटने के लिए रखे चोर दरवाजे बंद करने की ओर ध्यान केन्द्रित नहीं किया गया। शराब व रेत के व्यापार में सरकारी कार्पोरेशन बनाने के लिए हमें पुन: सोचने की ज़रूरत है। उन्होंने लिखा है कि रेत से पैसे तो बहुत कमाए जा रहे हैं परंतु यह सरकार का खज़ाना भरने की बजाय निजी हाथों में जा रहे हैं। आखिर सोचने वाली बात है कि शराब की खपत में हम देश के अग्रणी राज्यों में माने जाते हैं, परंतु आय के मामले में आखिरी कतार में क्यों आ गए हैं। उन्होंने पंजाब सरकार के समय ट्रांसपोर्ट से बादलों का कब्जा टूटने की बजाय जालन्धर-दिल्ली हवाई अड्डा रूट पर एकाधिकार होने की बात करते हुए कहा कि जऱा कभी ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारियों को बुलाकर पूछो कि पंजाब के विभिन्न हिस्सों से चंडीगढ़ को मुनाफे वाले रूटों पर किस की बसों का राज है? उन्होंने कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई से हाथ पीछे खींचने व बड़े आरोपियों को बचाने पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि हमने भ्रष्टाचार खत्म करने का लोगों के साथ वादा किया था।

आगे सवाल उठाया कि भ्रष्टाचार का मामला अपनी मौत क्यों मर रहा है? उन्होंने मुख्यमंत्री को सम्बोधित करते हुए कहा कि पहले कार्यकाल में आपने भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे ही नहीं भिजवाया था, बल्कि बड़े राजनीतिज्ञों को जेल भेजने की हिम्मत व दलेरी भी दिखाई थी, परंतु अब सत्ता सम्भालने के बाद हज़ारों करोड़ के सिंचाई विभाग व मंडी बोर्ड के घोटाले सामने आए हैं। इन मामलों में गिरफ्तार सिंचाई विभाग के ठेकेदार गुरिंदर सिंह व मंडी बोर्ड के निगरान इंजीनियर द्वारा किए गए खुलासों पर आगे क्यों कार्रवाई नहीं हुई।  उन्होंने कहा कि लोग सवाल करते हैं कि एक ठेकेदार व इंजीनियर ही इतने बड़े घोटाले कर गए जबकि उनके पीछे बड़े राजनीतिज्ञों व अधिकारियों का कोई आशीर्वाद नहीं था। उन्होंने कहा कि उक्त दोनों दोषियों द्वारा पूछताछ दौरान बड़े लोगों बारे अहम खुलासे किए गए थे और कईयों के नाम भी लिए गए थे परंतु उनके बारे आगे जांच की कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सवाल किया कि उक्त खुलासों बारे विजीलैंस ने ठेकेदार व इंजीनियर के बयानों की कभी पुष्टि नहीं की और न ही जांच आगे बढ़ाई गई। उन्होंने ठेकेदार द्वारा जिन व्यक्तियों के नाम लिए गए, उनके खिलाफ कार्रवाई करने और सभी मामले पर पर्दा डालने वाले विजीलैंस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार व पार्टी की बड़ी बदनामी हुई है।

उन्होंने संगरूर के तत्कालीन एसएसपी को सौंपी फिरौती कांड की जांच व फरीदाबाद के एक पुलिस अधिकारी द्वारा एक गैंगस्टर की मां से 23 लाख रुपए की रिश्वत लेने के विजीलैंस के पास गए मामले के ठप्प होने का सवाल भी उठाया है। उन्होंने कहा है कि ड्रग मामले में पकड़े इंस्पैक्टर इंद्रजीत सिंह बारे जांच भी आगे नहीं बढ़ाई गई और उसे संरक्षण देने वाले लोगों का पर्दाफाश नहीं किया गया।  उन्होंने विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा मामले दर्ज कर जांच के बाद चालान पेश किए जाने के मामले में उसी एजेंसी द्वारा अदालत में सबूत न मिलने का बहाना बनाकर क्लोजऱ रिपोर्टें पेश करने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इन बातों से लोगों में यह प्रभाव बन रहा है कि विजिलेंस विभाग घोटालों को दफन करने की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी लिखा है कि मैं राजनीतिक बदलाखोरी के हक में नहीं, परंतु खज़ाना लूटने वालों के खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक बदलाखोरी नहीं कहा जा सकता और इस दलील के तहत किसी को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री को कहा कि विधायक दल आपके साथ चलने के लिए बोल रहा है परंतु उनकी उम्मीद पूरी करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाना आपकी जिम्मेवारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री को खरी सुनाते हुए कहा कि पंजाब को अफसरशाही नहीं, राजनीतिक लीडरशिप द्वारा चलाए जाने का आम लोगों तक संदेश पहुंचाया जाना भी आप पर ही निर्भर करता है। '

उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा फैडरल ढांचे की मूल भावना को न•ारअंदाज करने का भी मामला उठाते हुए पंजाब पर इन फैसलों के पड़ रहे प्रभावों का अध्ययन करने और इनमें सुधार के लिए अपना पक्ष हिम्मत से पेश करने की सलाह दी है। अंत में परगट सिंह ने लिखा है कि करतारपुर साहिब के गलियारे बारे आपको लोगों की आवाज़ सुनने व स्वीकार करने की ओर तवज्जो देना और सिख भावनाओं को समझने की ओर ध्यान देने की जरूरत है। सिख जगत में आपकी विश्वसनीयता किसी और राजनीतिक नेता से अधिक रही है और इसे अंकुश लगना हम सभी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा।’ गौरतलब है कि पिछले दिनों नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कै. अमरेन्द्र सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वह विश्वास ही नहीं करते तो मंत्रिमंडल में शामिल होने का क्या लाभ। नवजोत सिद्धू और परगट सिंह की दोस्ती तो जगजाहिर है, जो पत्र परगट सिंह ने लिखा है उससे स्पष्ट है कि कै. अमरेन्द्र सिंह की रीति-नीति से जो लोग असंतुष्ट हैं वह कैप्टन की घेराबंदी कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी के भीतर अंसुष्ट धड़ा जब तक कै. अमरेन्द्र सिंह का विकल्प नहीं ढूंढ लेता तब तक कुछ नहीं होने वाला।

कांग्रेस की बागडोर गांधी परिवार के हाथ है और गांधी परिवार के पास वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इतनी हिम्मत नहीं की वह कै. अमरेन्द्र सिंह को कुछ कह सके। पंजाब में तो वो ही होगा जो कै. अमरेन्द्र सिंह चाहेंगे। परगट सिंह द्वारा लिखा पत्र असंतुष्टों की भावनाओं का बस एक प्रगटावा मात्र ही है, इससे अधिक कुछ नहीं। कै. अमरेन्द्र सिंह के समर्थन में आज भी विधायकों की संख्या अधिक है और कै. अमरेन्द्र सिंह के प्रति जन साधारण का आकर्षण आज भी कायम है। पंजाब कांग्रेस में कै. अमरेन्द्र सिंह का आज कोई विकल्प भी दिखाई नहीं देता, इसलिए परगट सिंह का पत्र एक क्षणिक प्रतिक्रिया से अधिक कुछ नहीं, बशर्ते असंतुष्ट धड़ा मिलकर कोई मोर्चा कै. अमरेन्द्र सिंह के विरुद्ध न खोल दे।

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।