पंचायतों की कट्टर छवि हो रही डिजिटल

चंडीगढ़ (मोहन अरविन्द): अपने तुगलकी फरमानों की वजह से सुखिऱ्यों  में रही खाप पंचायतों का चेहरा-मोहरा अब पूरी तरह से बदल गया है। सामाजिक कार्यों में बढ़ती हिस्सेदारी तथा संवेदनशील विषयों पर लचीला रुख अपनाने की वजह से इन खापों के फरमानों को गंभीरता से लिया जाने लगा है। खापों के सकारात्मक रुख को लेकर यह स्थिति न केवल हरियाणा बल्कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब समेत समूचे देश में बन गई है। लॉकडाउन में देश भऱ की प्रमुख खाप पंचायतों ने रविवार को डिजिटल मोड में ऑनलाइन सेमीनार का आयोजन कर खुद को जमाने के साथ बदलने के पूरे संकेत दिए हैं।

राष्ट्रीय महाखाप पंचायत के प्रयासों से देश भर की प्रमुख खाप पंचायतें आनलाइन वेबिनार में एक मंच पर दिखाई ही। करीब पांच दर्जन खाप पंचायतों ने महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध, घरेलू हिंसा, बेमेल शादियां तथा महिलाओं के सामाजिक उत्थान को लेकर करीब तीन घंटे तक लंबी चर्चा की। नतीजा निकला कि महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा की शुरुआत बच्चों के प्रति अपनाई गई हिंसक प्रवृत्ति से होती है। चर्चा के दौरान कई महिला वक्ताओं और खाप चौधरियों में तीखी बहस हुई। कुछ खाप चौधरी घरेलू हिंसा को मामूली बात कहते हुए नजर आए तो कुछ ने इसका कड़ा विरोध किया। चर्चा में शराब और बेमेल शादियों को घरेलू हिंसा का बड़ा कारण बताया गया। भाजपा के राज्यसभा सदस्य जनरल डीपी वत्स ने कहा कि फौज में यदि कमांडर की बात न मानी जाए तो इसे कायरता कहते हैं। यही स्थिति परिवार में है। महिलाएं अपने पति को भगवान तो मानती हैं, लेकिन उनकी बात मानने को राजी नहीं होती, पर इसका मतलब यह भी नहीं है कि वे हर गलत बात भी स्वीकार करें। डीपी वत्स के अनुसार अपना गोत्र व मां का गोत्र छोडक़र लडक़ी कहीं भी शादी करने के लिए आजाद रहे।

गांव की गांव में शादी को भी मान्यता मिलनी चाहिए। कंडेला खाप के प्रधान टेक राम कंडेला ने हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव की मांग करते हुए एक गांव, एक गोत्र और साथ लगते गांव में शादियां किए जाने का विरोध किया। गठवाला खाप के बलजीत सिंह मलिक ने कहा कि दादी का गोत्र छोडक़र किसी भी गौत्र में शादी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा का कारण शराब है। ज्योति फौगाट ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक रूप से सहायता नहीं करना तथा अपशब्द बोलना भी घरेलू हिंसा का पार्ट है। खाप नेता देव लोहान ने कहा कि लड़कियां पीएचडी कर डाक्टर तो बन जाती हैं, लेकिन शादी कर बहू नहीं बन पाती। पालम 360 खाप के प्रधान रामकरण सोलंकी ने दिल्ली में जागरूकता अभियान चलाने की बात कही। खाप नेता धर्मपाल हुड्डा ने कहा कि पुरुष अपनी पत्नीन से सीता बनने की अपेक्षा तो करते हैं मगर खुद रामचंद्र नहीं बनना चाहते। खाप नेता इंद्र सिंह मोर ने महिलाओं की तरफदारी की। महाखाप पंचायत के संयोजक सुनील जागलान ने बताया कि वेबिनार में विभिन्न राज्यों के 57 खाप नेताओं ने भागीदारी की।