पाकिस्तान टिड्डों के हमले से बेहाल, भारत से मंगा सकता है कीटनाशक

04:16 PM Feb 17, 2020 |

इस्लामाबाद (उत्तम हिन्दू न्यूज): पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 और 35ए निरस्त होने के बाद भारत से सभी कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध खत्म करने वाला पाकिस्तान इस समय टिड्डों के हमले से बेहाल है और इस मुश्किल से निपटने के लिए पड़ोसी देश से कीटनाशक मंगाने पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की मंगलवार बैठक होगी जिसमें में टिड्डों से निपटने के लिए भारत से कीटनाशक के आयात को मंजूरी दी जा सकती है। टिड्डों से निपटने की रणनीति तय करने के लिए दोनों देशों के बीच पांच दौर की बातचीत भी हो चुकी है।

वर्तमान में पाकिस्तान में मंहगाई चरम पर है और खाद्य पदार्थों विशेषकर आटा और चीनी के दाम आसमान पर हैं और पिछड़े और गरीब तबकों के सामने भुखमरी के हालात हैं । गौरतलब है कि 2019 में टिड्डों के दलों ने रबी फसलों पर 20 साल बाद सबसे भीषण हमला किया है और फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। पाकिस्तान में गेहूं के दाम पहले ही आसमान पर हैं और ऐसे में टिड्डोंं के हमले से स्थिति और खराब होने की आशंका है। पाकिस्तान में हजारों एकड़ की फसल बर्बाद हो गई।

पाकिस्तान में खासा नुकसान पहुंचाने के बाद टिड्डों के दल ने पड़ोसी देश की लगी भारतीय सीमा पार में भी प्रवेश किया लेकिन अत्याधुनिक तकनीकी और जमीनी स्तर पर विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के बल पर भारत इन्हें सीमावर्ती जिलों में ही रोकने में सफल रहा और टिड्डों के भारत के अंदरूनी इलाके में प्रवेश नहीं कर पाये। समय रहते भारत में इन्हें नहीं रोका जाता, तो वे बंगलादेश तक सारी फसलों को चट कर सकती थे। पाकिस्तान के लिए समस्या यह है कि वह खाद्यान्न की कमी की पहले जूझ रहा है। टिड्डों के आक्रमण के बाद रबी की फसलें बर्बाद होने से वहां हालात बेकाबू होने की प्रबल संभावना बन गई है।

यही कारण है कि टिड्डों की समस्या को लेकर पाकिस्तान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करनी पड़ी। गेंहू की कमी और उसकी बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए पाकिस्तान तीन लाख टन गेंहू का आयात कर रहा है। उधर, वैज्ञानिकों ने इस साल जून में पिछले साल से भी कहीं अधिक संख्या में टिड्डों के आक्रमण की आशंका जताई है, जिससे निपटने में पाकिस्तान खुद को बेबस पा रहा है और अब इस समस्या से निपटने के लिए उसकी नजर भारत पर है। इससे पहले भी पाकिस्तान ने भारत से मदद की गुहार लगाते हुए जीवनरक्षक दवाओं का आयात किया था।