संकट में पाकिस्तान

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से राहत मिलने से पहले पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर का मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे देना दर्शाता है कि पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार अभी संकट में ही है। पाकिस्तान नकदी का संकट भी झेल रहा है। इस कारण इमरान खान की सरकार और विशेषतया वित्त मंत्री लगातार विपक्षी दलों के निशाने पर ही थे। वित्तीय और राजनीतिक संकट के दौर में पाकिस्तान के अशांत बलोचिस्तान प्रदेश में अद्र्ध सैन्य बलों की वर्दी पहने अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा एक राजमार्ग पर 14 यात्रियों को बस से उतारकर गोली मार कर हत्या करने के समाचार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आतंकवादियों का पनाहगाह बना पाकिस्तान अब स्वयं भी आतंकवाद का शिकार होने लगा है।

पाकिस्तान पिछले करीब चार दशक से आतंकियों का इस्तेमाल भारत के विरुद्ध करता चला आ रहा है। जम्मू-कश्मीर में विशेषतया घाटी में जो हिंसक घटनाएं हो रही हैं उनके पीछे सीधे-सीधे पाकिस्तान का ही हाथ है। पाकिस्तान के इस खेल में चीन भी उसका साथ देने लगा है। बम और बारूद पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को चीन ही दे रहा है।

पाकिस्तान की नीयत व नीति को समझते हुए अब भारत ने जम्मू-कश्मीर की सीमा से होने वाले व्यापार को बंद कर दिया है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि 19 अप्रैल से जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एल.ओ.सी.) के जरिए होने वाले व्यापार को बंद कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि एन.आई.ए. द्वारा कुछ मामलों की जांच के दौरान यह सामने आया है कि एल.ओ.सी. से होने वाले व्यापार में कई गड़बडिय़ां सामने आई हैं। ऐसी जानकारी मिली है कि यह व्यापार आतंकवाद व अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। गृह मंत्रालय ने कहा कि इसलिए जम्मू और कश्मीर में सलामाबाद और चक्कन-दा-बाग में एल.ओ.सी. व्यापार को निलंबित करने का फैसला लिया गया है। इस बीच विभिन्न एजेंसियों के परामर्श से सख्त विनियामक और प्रवर्तन तंत्र पर काम किया जा रहा है। एल.ओ.सी. व्यापार को फिर से खोलने के मुद्दे पर बाद में विचार किया जाएगा। रिपोटर््स में बताया गया कि सीमा पर होने वाले व्यापार का रूप अब बदल चुका है। आतंकी इस रास्ता के उपयोग हवाला के पैसे और हथियार सरहद पार भेजने में कर रहे हैं। वहीं सरकार को लगातार ऐसी सूचनाएं मिल रही थीं कि पाक द्वारा इस रास्ते का इस्तेमाल भारत में अवैध हथियार, नकली मुद्रा और नशीली दवाओं को भेजने के लिए किया जाता है।

2008 से नियंत्रण रेखा से होने वाला व्यापार 5000 करोड़ रुपए का हो चुका था। पुलवामा हमले के बाद जब भारत सरकार ने होने वाले व्यापार की छानबीन की तो यह पता चला कि बिल अधिक मूल्य के थे और मूल्य से अधिक जो रकम आती थी वह घाटी में हिंसा फैलाने तथा पत्थरबाजों को दी जाती थी। भारत सरकार के सम्मुख जब यह तथ्य आया तो भारत ने नियंत्रण रेखा से होने वाले व्यापार को बंद करने का निर्णय लिया। पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ मैत्री देश का रिश्ता तोड़ते हुए पाकिस्तान से आने वाली चीजों की ड्यूटी बढ़ा दी थी, उस कारण भी पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ था। अब सरकार ने नियंत्रण रेखा से व्यापार पर पाबंदी लगा दी है।

भारत सरकार द्वारा उठाए कदमों से पाकिस्तान का संकट गहराता चला जा रहा है। पाकिस्तान अगर नकारात्मक व भारत विरोधी नीति लेकर चलता रहा तो उसका संकट और बढ़ जाएगा। पाकिस्तान का वर्तमान और भविष्य तभी सुरक्षित है अगर वह भारत प्रति सकारात्मक सोच लेकर चलेगा। आतंकियों को समर्थन देना और भारत विरोध के नाम पर हथियारों पर अरबों खर्चने से पाकिस्तान का आर्थिक संकट बढ़ेगा ही। पाकिस्तान का भविष्य तभी सुरक्षित व उज्जवल रह सकेगा अगर वह आतंकियों को भारत विरुद्ध इस्तेमाल करना व पनाह देना बंद करेगा। अगर पाकिस्तान अपनी पुरानी नीतियों पर ही चलता रहा और भारत विरुद्ध विरोध के लिए विरोध वाली नीति ही अपनाये रखता है तो फिर उसका रब ही राखा है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।