दिल्ली अग्निकांड में दर्दनाक खुलासा-गेट पर लगा था ताला, अंदर तड़प-तड़प कर मर गए 43 बेकसूर

02:35 PM Dec 08, 2019 |

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): दिल्ली के रानी झांसी रोड पर हुए अग्निकांड में दिल दहला देने वाला खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, जिस बिल्डिंग में आग लगी उसमें बाहर से ताला बंद था, जबकि अंदर से लोग बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे। स्थानीय लोगों ने कई फंसे लोगों को बाहर निकाला और एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने में मदद की। इस भयावह अग्निकांड में अब तक 43 लोगों की जान जा चुकी है। ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने से हुई है।

इस अग्निकांड में दमकल विभाग ने 54 लोगों को बचाया था, जिनमें कई लोग बाद में मृत पाए गए।  कुल 43 मृतकों में 34 की मौत लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) और 9 की मौत लेडी हार्डिंग्स अस्पताल में हुई है। कुछ घायलों को इन दोनों अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टरों की एक बड़ी टीम इलाज में जुटी है। 

पीड़ितों के परिजनों के मुताबिक, फैक्ट्री में काम करने वाले ज्यादातर नौजवान थे जिनकी उम्र 20-30 साल रही होगी। फैक्ट्री का सिस्टम कुछ ऐसा बनाया गया था कि मजदूर वहीं काम करते थे और रहने-खाने-सोने की व्यवस्था भी वहीं थी। इसीलिए घटना के वक्त ज्यादातर मजदूर सोते रहे थे और उन्हें आग की जानकारी नहीं मिली।

फैक्ट्री में बैग बनाने का काम होता था। परिजन अपने लोगों की तलाश में घटनास्थल पर पहुंचे हैं लेकिन उनकी शिकायत है कि उन्हें न तो कोई जानकारी दी जा रही है और न ही किसी से मिलने दिया जा रहा है।

फायर सेफ्टी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि जिन लोगों को बचाया गया, उनमें ज्यादातर बेहोशी की हालत में थे, कुछ जख्मी भी थे। 500-600 गज के फ्लोर एरिया में यह फैक्ट्री चल रही थी जिसमें ग्राउंड से ऊपर चार मंजिल बनी थी। इसमें कई तरह की फैक्ट्रियां चलती थीं। बिल्डिंग में स्कूल बैग बनाने और पैकिंग का काम होता था।

फायर सेफ्टी अधिकारी ने कहा, 'जब हम पहुंचे तो देखा बिल्डिंग बाहर से लॉक थी। लोहे का दरवाजा था। अंदर से लोग चिल्ला रहे थे बचाओ-बचाओ। हम लोगों ने गेट तोड़ा और अंदर दाखिल हुए। वहां से लोगों को निकाला और अस्पताल पहुंचाया।' इस बड़ी बिल्डिंग में सीढ़ी एक ही थी। अधिकारी ने कहा, 'हम दरवाजा तोड़कर अंदर गए। वहां जहरीला धुआं काफी भरा हुआ था। इस वजह से ज्यादातर लोग बेहोशी की हालत में बाहर निकाले गए।'

रिहायशी में चल रही थी फैक्ट्री, नहीं मिली थी एनओसी
फायर सेफ्टी अधिकारी ने कहा कि छत के ऊपर का दरवाजा भी बंद था, जिसे दमकल कर्मियों ने खोला और लोगों को बाहर निकाला। 55-60 लोगों को बाहर निकाला गया। जिस इलाके में फैक्ट्री चल रही थी वह रिहायशी इलाका है और फैक्ट्री को एनओसी भी नहीं मिली थी। यहां जितने मजदूर हैं वे वहीं रहते हैं, वहीं काम करते हैं और वहीं सोते हैं। उधर, पुलिस ने हादसे वाली बिल्डिंग के मालिक के भाई को गिरफ्तार कर लिया है जबकि बिल्डिंग का मालिक अभी भी फरार है। रिहायशी इलाके में चल रही इस जानलेवा फैक्ट्री को लेकर एक बार फिर भ्रष्ट सिस्टम और सरकारी तंत्र की लापरवाही उजागर हुई है, जो लोगों के लिए जानलेवा साबित हुई है।