मॉब लिंचिंग के विरोध में

12:57 PM Jul 07, 2019 |

भारत के विभिन्न हिस्सों में कुछ मुस्लिम संगठनों ने भीड़ द्वारा पिछले समय में गौ तस्करी के आरोप में मारे गये लोगों के समर्थन और जिन लोगों ने कानून हाथ में लिया उन पर कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया और सरकार को ज्ञापन भी दिए। जालंधर में दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि 4 साल में 266 मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं जो मानवता को शर्मसार करती हैं। इसमें अकेले झारखंड राज्य में 18 घटनाएं हुईं जो कि एक तरह का राजनीतिक षड्यंत्र है। इसमें प्रमुख घटनाएं राजस्थान में मुस्लिम युवक की हत्या, 17 जून को तबरेज अंसारी को पप्पू मंडल और उसके साथियों द्वारा पीट-पीटकर मारना शामिल है, इसलिए देश भर में तमाम मुस्लिम भाईचारे के लोगों के साथ बहुजन क्रांति मोर्चा ने ज्ञापन देकर मांग की है कि मॉब लिचिंग विरोधी कानून बनाकर आरोपियों को फांसी की सजा दी जाए। तबरेज अंसारी की पत्नी को सरकारी नौकरी देकर उसके माता-पिता और भाईयों को एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए। मॉब लिंचिंग में शामिल राजनेताओं व अन्य संगठनों की मान्यता रद्द की जाए। अल्पसंख्यक समुदाय के हित में उनकी रक्षा करने के लिए कानून बनाया जाए। एससी/एसटी/ओबीसी व अल्पसंख्यकों के पक्ष में कानून बनाकर उनकी रक्षा की जाए। आरोपियों को बचाने वाले पुलिस कर्मचारियों को नौकरी से हटाया जाए।

एक बात तो स्पष्ट रूप से कहना चाहेंगे कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, इसमें कानून का राज है और नियम तोडऩे वाला चाहे किसी भी क्षेत्र, संप्रदाय या धर्म का हो उसके साथ वैसा ही व्यवहार होना चाहिए जो कानून के तहत निर्धारित है। उपरोक्त भावना के तहत भीड़ द्वारा अवैध रूप से गौ तस्करी के आरोप में मारे गए लोगों विरुद्ध क्षेत्रीय सरकारों ने कानून अनुसार कदम उठाए हैं और उनकी धरपकड़ भी हुई है। कई आरोपी फरार हंै और कुछ जेल की सलाखों की पीछे हैं। गौ के साथ हिन्दू समाज की भावनाएं जुड़ी हैं। लेकिन मुस्लिम समाज का जो कट्टरपंथी वर्ग है वह इन भावनाओं का सम्मान करने की बजाय उससे खिलवाड़ करने में खुशी महसूस करता है। भारत की आजादी के बाद सत्ताधारियों ने तुष्टिकरण की जो नीति अपनाई उस कारण देश के बहुसंख्यक समाज की भावनाओं से खिलवाड़ तो हुआ ही साथ में इसके नाम के साथ साम्प्रदायिकता भी जोड़ दी गई।

देश के सत्ताधारियों विशेषतया कांग्रेस ने हिन्दू समाज को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए विभाजित करने का खेल शुरू किया तो दूसरी तरफ धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अल्पसंख्यकों को बहुमत समाज के आमने-सामने खड़ा करने का कार्य भी किया। कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति का ही परिणाम है कि आज हिन्दू समाज कांग्रेस से दूर होता चला जा रहा है और अल्पमत समाज विशेषतया मुस्लिम और ईसाई कांग्रेस के आंगन में खड़े दिखाई दे रहे हैं। देश के विभिन्न शहरों में एक ही दिन एक योजनाबद्ध तरीके से भीड़तंत्र के विरुद्ध खड़े हुए मुस्लिम संगठनों का मुख्य लक्ष्य मोदी सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम कर कटघरे में खड़ा करना ही है।

गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी की सरकार के पिछले पांच वर्षों में देश में साम्प्रदायिक दंगों में कमी ही नहीं दर्ज की गई, बल्कि ये न के बराबर ही हुए। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विरोधियों द्वारा भाजपा के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार को मुस्लिम विरोधी सरकार जताने के लिए अब भीड़तंत्र के नाम पर एकजुट होकर भाजपा और संघ को एक बार फिर मुस्लिम विरोधी पार्टी तथा कांग्रेस को धर्मनिरपेक्ष पार्टी दिखाने की कोशिश ही की जा रही है।

मुस्लिम संगठनों द्वारा किए गए प्रदर्शन का दूसरा लक्ष्य अवैध रूप से गौ तस्करी करने वाले तत्वों को कानून के दायरे से बाहर लाना भी है क्योंकि जिन हिन्दुओं पर कानून को हाथ में लेने का आरोप है उन पर कानूनी कार्रवाई चल रही है। साथ में उन मुस्लिम लोगों पर भी मुकद्दमे चल रहे हैं जिन्होंने अवैध ढंग से बूचडख़ाने चलाये हुए थे और जो अवैध ढंग से गौ तस्करी भी कर रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व उनकी सरकार को कटघरे में खड़ा करने या आरोप लगाने के लिए विरोधियों के पास कोई ठोस कारण नहीं, तो अब भीड़तंत्र के नाम पर एकजुट हो मोदी सरकार को अल्पसंख्यक व मुस्लिम समाज विरोधी है, यह दिखाने का प्रयास ही किया जा रहा है।

कटु सत्य यह है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद ही सत्ताधारी कांग्रेस ने मुस्लिम समाज में भाजपा व संघ को मुस्लिम विरोधी बताने की तथा कांग्रेस को मुस्लिम समाज के समर्थक दल के रूप में पेश करने का जो खेल खेला उसी का परिणाम है कि देश के दोनों बड़े समुदायों में अविश्वास की भावना बढ़ती चली गई। इस भावना को मुल्ला और मौलवियों ने भाजपा व संघ विरुद्ध फतवे देकर और मजबूत कर दिया।

आजादी के सात दशक बाद देश में वैचारिक, राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन का दौर शुरू हुआ है। आज देश में राजनीतिक स्थिरता है। देश सैन्य व आर्थिक दृष्टि से विश्व के पहले पांच-छ: देशों में आता है। सामाजिक स्तर पर कुरीतियों के विरुद्ध अभियान चल रहे हैं। देश में आ रहे सकारात्मक परिवर्तन को देश विरोधी शक्तियां चाहे वह सीमा पार हैं या अंदर, वह बर्दाश्त नहीं कर पा रहीं। इसलिए वह आये दिन कुछ न कुछ ऐसा करती रहती हैं जिससे मोदी सरकार कटघरे में खड़ी दिखाई दे। घाटी सहित देश के विभिन्न भागों में कभी किसी बहाने तो कभी किसी बहाने मोदी सरकार की घेराबंदी करने के प्रयास होते रहते हैं। भीड़तंत्र के विरोध में देश भर में मुस्लिम संगठनों ने जो रोष प्रदर्शन किए हैं यह भी उपरोक्त नीति का ही हिस्सा हैं। कई जगह पर हिन्दुत्व विरोधी नारे व तोडफ़ोड़ भी हुई है, इसी से स्थिति को समझा जा सकता है। सरकार को सतर्क होने की आवश्यकता है, क्योंकि मामला संवेदनशील है। 

इरविन खन्ना,  मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।