Monday, May 20, 2019 02:43 AM

धर्म के नाम पर

श्रीलंका में चर्च पर हुए बम धमाकों के बाद अब अमेरिका में यहूदी प्रार्थना स्थल पर एक युवक द्वारा चलाई गई गोलियों से एक महिला की मौत हो गई और कई घायल हो गए। श्रीलंका में हुए सिलसिले वार बम धमाकों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई और सैकड़ों ही घायल हो गए। श्रीलंका में हुए धमाकों की जिम्मेवारी इस्लामिक स्टेट संगठन ने ली है।

भारत की राष्ट्रीय एजेंसी ने केरल में आईएस विरुद्ध छेड़े अभियान में कासरगोड जिले में दो और पलक्कड़ जिले में एक जगह छापेमारी की। केरल पुलिस के अनुसार एनआईए ने पलक्कड़ से एक संदिग्ध को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पलक्कड़ तमिलनाडु की सीमा से लगा है। छापेमारी में एनआईए ने मोबाइल, सिम कार्ड, पेन ड्राइव, डायरियां, सीडी, डीवीडी और जाकिर नाइक से जुड़े साहित्य बरामद किए हैं। एनआईए ने कहा, डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच होगी। पलक्कड़ जिले के कोलेगोड थाने के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एनआईए टीम ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है और उसे लेकर कोच्चि लौट गई। वहीं एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि कासरगोड जिले के दो लोगों अबूबकर और अहमद को नोटिस दिया है। इन्हें पूछताछ के लिए कोच्चि बुलाया है। श्रीलंका में हुए धमाकों के ठीक एक सप्ताह बाद एनआईए ने यह कार्रवाई आपराधिक साजिश को लेकर की है। एनआईए के अनुसार केरल के कुछ युवा 2016 में मई और जुलाई के बीच आईएस में शामिल होने के लिए देश से बाहर गए थे। इनमें पलक्कड़ के 14 युवा सीरिया जाकर आईएस में शामिल हुए थे। शक है कि केरल के ये लोग आईएस में शामिल हो चुके संदिग्धों के संपर्क में है। एनआईए ने पिछले साल से लेकर अब तक आईएस मॉड्यूल के 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ईस्टर पर सीरियल ब्लास्ट में 253 लोगों की जान लेने के बाद श्रीलंका में दूसरा विस्फोट भी इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकियों ने ही किया था। आईएस ने दावा किया है कि दूसरी बार हुए विस्फोट में उसके तीन आतंकियों ने खुद को उड़ा लिया। उधर, ब्रिटेन से खतरे की घंटी बजाने वाली खबर आई है। दावा किया जा रहा है कि यूरोपीय देशों में आईएस का स्लीपर सेल सक्रिय हो रहा है। सुरक्षाबल आईएस के इस 'क्रोकोडाइल सेल्स या स्लीपर सेल्स' को ढूंढऩे में लगे हैं। असल में स्लीपर सेल उन लोगों का गठजोड़ होता है जो अपने आतंकी आकाओं के इशारों पर अचानक सक्रिय होते हैं। जानकारों का कहना है कि बौखलाये आईएस के आतंकियों द्वारा श्रीलंका में किए गए विस्फोट तो बानगी भर है। इन लोगों के मंसूबे बहुत खतरनाक हैं। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियां श्रीलंका के बम धमाकों से जुड़े आत्मघाती हमलावरों में एक अब्दुल लतीफ जामील मोहम्मद और ब्रिटेन के चरमपंथियों के बीच संबंधों की जांच में जुटी हैं क्योंकि यह बात सामने आई है कि उसने ब्रिटेन में पढ़ाई की थी। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, 'ऐसा जान पड़ता है कि मोहम्मद को हमले के लिए क्रोकोडाइल या स्लीपर्स सेल का इस्तेमाल करने की आईएस की रणनीति के तहत आतंकवादी प्रशिक्षण देने के बाद श्रीलंका भेज दिया गया। सूत्रों के मुताबिक ब्रिटिश जिहादी उसे ऑनलाइन निर्देश दे रहे थे। दूसरी थ्योरी यह है कि मोहम्मद 2000 के दशक के मध्य में जब लंदन में रह रहा था तब शायद वह आतंकवादी संगठन हिज्ब उतर तहरीर के प्रभाव में आ गया। हालांकि इस संगठन के प्रवक्ता ने कहा कि संगठन के पास मोहम्मद के उसका सदस्य होने का रिकार्ड नहीं है।

विश्व स्तर पर जब भी आतंकवाद को लेकर कोई चर्चा होती है तो अधिकतर लोगों का मत होता है कि गरीबी के कारण ही युवा आतंक की राह पर चल पड़ता है जबकि श्रीलंका में हुए बम धमाकों में वहां के एक धनाढ्य परिवार के बच्चे शामिल थे और यह कार्य दोनों बच्चों ने धन के लिए नहीं बल्कि धर्म के नाम पर किया।

विश्व भर में इस्लाम के नाम पर ही आतंकी हिंसक कारवाई करते चले आ रहे हैं। देश और दुनिया में धर्म के नाम पर अधर्म का कार्य करने वालों पर हमेशा उंगली उठती रहेगी और वह हमेशा कटघरे में खड़े दिखाई देंगे। धर्म के नाम पर अधर्म का जो खेल शुरू हुआ है उसको बंद करने के लिए इस्लाम में विश्वास करने वालों विशेषतया बुद्धिजीवी वर्ग को आगे आकर धर्म के नाम पर जो अमानवीय खेल खेला जा रहा है उसके विरुद्ध आवाज बुलंद करनी होगी। इस्लाम के नाम पर एक छोटा वर्ग ही हिंसक हो रहा हैं। सारे विश्व को इस्लाम के झंडे तले लाना एक ऐसा सपना है जो कभी पूरा होने वाला नहीं है।

हर फूल की अपनी महक व बनावट तथा सुंदरता होती है। उसी तरह प्रत्येक धर्म की अपनी अलग पहचान व रास्ता है। किस रास्ते पर आप चलते हैं यह फैसला तो आपको ही लेना होगा। धर्म के नाम पर हिंसा फैलाना अधर्म ही माना जाएगा। अधर्म का विरोध तो संसार और समाज के प्रत्येक वर्ग को करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो धर्म से ही लोगों की दूरियां बढ़ती चली जाएंगी।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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