अब सरकारी दफ्तरों में BSNL और MTNL के नेटवर्क पर ही चलेगा Internet, सरकार ने जारी किए निर्देश

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने सभी मंत्रालयों, सार्वजनिक विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के लिए सरकारी दूरसंचार कंपनियों भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और महानगर संचार निगम लिमिटेड (MTNL) की सेवाओं के उपयोग को अनिवार्य कर दिया है।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा जारी एक ज्ञापन में कहा गया है कि भारत सरकार ने अपने सभी मंत्रालयों/विभागों, सीपीएसई, केंद्रीय स्वायत्त निकायों द्वारा बीएसएनएल और एमटीएनएल की सेवाओं के अनिवार्य रूप से इस्तेमाल की मंजूरी दी है।

BSNL-MTNL

DoT के मेमोरेंडम के मुताबिक सभी मंत्रालयों और विभागों से अनुरोध किया गया है कि वह CPSEs, Central Autonomous Organisations समेत सभी केंद्रीय संस्थाएं बीएसएनल और एमटीएनएल के नेटवर्क प्रयोग के लिए जरूरी निर्देश जारी करें इसमें बीएसएनल, एमटीएनएल नेटवर्क का इस्तेमाल इंटरनेट, ब्रॉडबैंड लैंडलाइन और लीज्ड लाइन रिक्वायरमेंट्स के लिए होगा।

इस ज्ञापन पर 12 अक्टूबर की तारीख अंकित है और इसे वित्त मंत्रालय से परामर्श के बाद केंद्र सरकार के सभी सचिवालयों और विभागों को जारी किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि बीएसएनएल और एमटीएनएल की दूरसंचार सेवाओं के इस्तेमाल को अनिवार्य करने का निर्णय मंत्रिमंडल ने लिया है। दूरसंचार विभाग ने सभी मंत्रालयों, विभागों, सीपीएसई और केंद्रीय स्वायत्त संगठनों से कहा है कि वे इंटरनेट, ब्रॉडबैंड, लैंडलाइन और लीज्ड लाइन जरूरतों के लिए बीएसएनएल या एमटीएनएल नेटवर्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।

सरकार का यह आदेश सरकारी दूरसंचार कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए किया गया है, जो तेजी से अपने ग्राहक आधार को खो रहे हैं। बीएसएनएल को 2019-20 में 15,500 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, जबकि इस दौरान एमटीएनएल का घाटा 3,694 करोड़ रुपये रहा।