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बीमार नहीं अब प्रगतिशील राज्य है यूपी  

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बीमार नहीं अब प्रगतिशील राज्य है यूपी  

उत्तर प्रदेश अर्थात यूपी अब बीमार राज्यों से बाहर निकलकर एक प्रगतिशील राज्य हो गया है। अब वह देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ''पिछले साढ़े 4 वर्षों में राष्ट्रीय पटल पर एक नया सक्षम और समर्थ उत्तर प्रदेश उभर कर सामने आया है। कभी देश में पांचवें नंबर की अर्थव्यवस्था होने का दंश झेलने वाला उत्तर प्रदेश आज लगातार प्रयासों से दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बन चुका है।ÓÓ योगी आदित्यनाथ ने 2017 में जब उत्तर प्रदेश के सत्ता की कमान संभाली थी तो यहां बेरोजगारी दर ं 17.5 फीसदी थी जो अब घटकर 4.1 फीसदी रह गई है। खेती किसानी, बिजली व्यवस्था, आवास और आधारभूत संरचना के विकास का कीर्तिमान स्थापित किया गया है। बिजनेस रैंकिंग में उसका देश में दूसरा स्थान है। अपनी उपलब्धियों को बताने के लिए राज्य सरकार का 17 सितंबर से शुरू विकास उत्सव 7 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
वैसे तो धर्म-दर्शन, कला, उद्योग, वाणिज्य-व्यापार के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश शताब्दियों तक विश्व के मानचित्र पर चमकता रहा है। लेकिन अंग्रेजों के शासनकाल में इसका विकास अवरुद्ध हो गया था। इसके बावजूद आजादी के बाद लगभग दो दशकों तक उत्तर प्रदेश कृषि और औद्योगिक क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में शुमार होता था। कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर आदि नगर मिलों और कारखानों के लिए जाने जाते थे। हस्तशिल्प उद्योग भी फल-फूल रहे थे। इससे लाखों परिवारों को रोजगार मिलता था। प्राचीन उच्च नैतिक मूल्यों में रचे-बसे इस प्रदेश को जैसे किसी की नजर लग गई। उत्तर प्रदेश विकास की पटरी से उतरने लगा। इसका दुष्प्रभाव यह रहा कि बड़े व्यापारी, उद्योगपति एवं प्रतिभा संपन्न लोग प्रदेश के बाहर पलायन करने लगे क्योंकि 'बीमारूÓ प्रदेश में उन्हें भविष्य नहीं दिख रहा था। अपहरण उद्योग, माफियाराज, महिलाओं-बालिकाओं के प्रति बढ़ते अपराध, साम्प्रदायिक दंगों तथा बेरोजगारी की वजह से प्रदेश से पलायन औद्योगिक शहरों का उजडऩा मानो उत्तर प्रदेश की नियति बन गयी थी। लेकिन योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उत्तर प्रदेश ने पिछले साढ़े चार सालों में नया रिकार्ड कायम किया है। आज वह विकास की 44 योजनाओं के क्रियान्वयन में पहले स्थान पर है। एक बार फिर उत्तर प्रदेश की तस्वीर वैश्विक पटल पर उभरी है। यह सब यों ही नहीं हो गया क्योंकि पिछली सरकारों के कार्यकाल में बिगड़ी कानून व्यवस्था को पटरी पर लाना, समाज को अपराधीकरण और माफियाराज से मुक्त कराना और खस्ताहाल प्रदेश की अर्थव्यवस्था फिर से मजबूत बनाना कोई आसान काम नहीं था। माफिया राजनीतिक दलों के संरक्षण में पल रहे थे। एक दल ने उन्हें निकाला तो दूसरे दल उनका स्वागत करते थे। लेकिन योगी आदित्यनाथ ने इस चुनौती को स्वीकार किया और प्रदेश के सत्ता की बागडोर संभालने के बाद से तेजी से काम करना शुरू कर दिया। माताओं-बहनों के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने वालों के गिरेबान पर पुलिस के कठोर हाथ कसने लगे, अवैध बूचडख़ानों के किवाड़ों पर ताले लगने लगे। अपराधी थानों में समर्पण की तख्ती लेकर खुद हाजिर होने लगे। योगी सरकार के कानून एवं व्यवस्था का डंका बजा तो पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दशकों से फला-फूला माफिया तंत्र और गुंडा तंत्र भूमिसात हो गया। ऐसे माफिया डान जो पिछली सरकारों में फल फूल रहे थे, अब सलाखों के पीछे हैं अथवा प्रदेश के बाहर छिपे बैठे हैं। सी.ए.ए. कानून के विरोध में राज्य-व्यवस्था छिन्न-भिन्न करने का दुस्साहस करने वाले असामाजिक तत्वों के हिंसक हथकंडों से जिस मुखरता से योगी सरकार ने मुकाबला किया, निजी सम्पत्ति और राजकीय सम्पत्ति को नष्ट करने वाले अवांछित तत्वों को चिन्हित कर नुकसान की भरपाई करायी, उससे कानून के राज्य की अवधारणा पुष्ट हुई।   सवाल यह भी उठता है कि किसी राज्य के विकास का पैमाना क्या होगा। इसके बारे में योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि ''अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय का विचार था कि सबसे पहले और सबसे अधिक सहायता उस व्यक्ति को उपलब्ध करानी चाहिए, जिसकी जरूरत सबसे अधिक है। वे मानते थे कि हर उस घर को रोशन किया जाए, जो अंधकार में डूबा है। अंधेरे में जलाया गया एक छोटा सा दीया भी उम्मीदों के उजाले का प्रतीक बन सकता है। इसी विचार को आत्मसात कर लोक कल्याण के लिए कार्य कर रही उत्तर प्रदेश सरकार 17 मार्च को साढ़े चार वर्ष पूर्ण कर लिये। ये साढ़े चार वर्ष सही अर्थो में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उदय के थे।ÓÓ उनकी बात सही है। पर कानून व्यवस्था, पानी-बिजली, स्वास्थ्य सुविधा, परिवहन व्यवस्था, सड़क की सुविधा के पैमाने पर भी देखा जाए तो उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली हुई है। आंकड़े और जमीनी हकीकत दोनों इस बात की पुष्टि करते हैं। जिस बिजली के लिए पहले की सरकारों के कार्यकाल में आंदोलन और मारामारी होती थी आज वह अतीत की बात बन गई है। बड़े-बड़े माफिया आज सलाखों के पीछे हैं। पूर्वांचल में जापानी बुखार की समस्या कई दशकों से चली आ रही थी। हजारों बच्चे बेमौत मर जाते हैं आज उस पर योगी सरकार ने बड़े पैमाने पर सफल टीकाकरण का अभियान चलाकर काबू लगाम लगा दिया है। यह साधारण बात नहीं है। कोरोना काल में भी योगी सरकार ने देश में टीकाकरण का रिकार्ड कायम किया है।   
इन सब कार्यो के लिए योगी सरकार ने योजनाओं का क्रियान्वयन सफलतापूर्वक किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश को कुचक्रों के जाल से निकालकर विकास की ओर बढ़ाया। फलत: 54 माह में राज्य के माथे से बीमारू का धब्बा हट गया और समृद्धिशीलता का टीका लग गया। खेती, किसानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, इंफ्रास्ट्रक्चर हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित हुए। प्रदेश सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में छोटे किसानों को बैंकों के कर्ज-भार से मुक्ति दिलाने का निर्णय लेकर यह जता दिया कि वह किसानों की सबसे बड़ी हितैषी है। योगी सरकार ने एमएसपी में दोगुनी तक वृद्धि करते हुए धान, गेहूं, तिलहन की रिकार्ड सरकारी खरीद के साथ ही किसानों के खातों में 79000 करोड़ रूपये की धनराशि हस्तांतरित की। गन्ना किसानों को अब तक रुपए 1.44 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। साथ ही खाद एवं बीज पर सब्सिडी देकर कृषि लागत कम करके खाद्यान्न उत्पादकता बढ़ाई। इससे गन्ना किसान हों अथवा अन्य किसान, सभी में संतुष्टि का भाव है और वे आंदोलनजीवियों से दूर रहकर रिकार्ड अन्न और गन्ना उत्पादन कर खुद खुशहाल है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। 
प्रदेश में बेरोजगारी शुरू से ही बड़ी समस्या थी। इससे निजात पाने के लिए साढ़े चार सालों में साढ़े चार लाख लोगों को पारदर्शी ढंग से सरकारी नौकरियां दी गयीं। एमएसएमई के जरिये ही 2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ा गया। हर हाथ को काम देने के लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास योजना, युवा उद्यमिता विकास योजना (युवा हब स्कीम) यूपी सीएम अपे्रन्टिसशिप प्रमोशन स्कीम (सीएमएपीएस), ओडीओपी स्कीम, स्किल आन व्हील्स प्रोग्राम, मिशन रोजगार और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल स्कीम से बेरोजगारों को रोजगार के भरपूर अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। मनरेगा और अन्य रोजगारपरक कार्यक्रमों से लाखों लोगों को रोजी का साधन उपलब्ध कराया गया। घरेलू हस्तशिल्प उद्योग के लिए लायी गयी एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना अब तक 25 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देकर सफलता के नये प्रतिमान गढ़ रही है। इन प्रयासों से रोजगार दर बढ़ी है और बेरोजगारी दर घटी है। वर्ष 2017 में प्रदेश में बेरोजगारी दर जहां 17.5 प्रतिशत थी, वहीं अब घटकर 4.1 प्रतिशत रह गई है।
पिछले 54 महीनों में जब योगी सरकार खेत से लेकर मिलों तक की व्यवस्था दुरूस्त करने में जुटी थी, तभी कोरोना का कहर रोजी-रोटी, खासकर अर्थव्यवस्था पर वज्रपात की तरह आया। लाखों कामगार अचानक प्रदेश लौटने लगे। सबको उनके घरों तक पहुंचाने हेतु मुफ्त ट्रांसपोर्ट, राशन, दवा व चिकित्सा सुविधा के साथ ही रोजगार भी उपलब्ध कराये गए। उत्तर प्रदेश सरकार के कोविड मैनेजमेंट को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सराहा। कोरोना महामारी की दूसरी लहर जब संकट बनकर आई तो भी योगी जी ने बिना विचलित हुए मोर्चा संभाला। बेहतर प्रबन्धन से कोविड टीकाकरण में भी उत्तर प्रदेश 09 करोड़ से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन करके देश में प्रथम स्थान पर है। आस्टेलियाई सांसद क्रैग केली का यह कथन गौरतलब है कि 'योगी आदित्यनाथ हमें भी अव्यवस्था से उबार सकते हैं। उन्होंने कोरोना को अपने प्रभावशाली प्रबंधन से मात दी।Ó यही नहीं आस्टेऊलिया के मंत्री श्री जेसन वुड ने भी अपने ट्वीट में योगी जी के कुशल कोविड प्रबंधन की प्रशंसा की है। वुड ने लिखा 'भविष्य में हम उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर संस्कृति और विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्सुक है।Ó
योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए जनहित की योजनाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध ढंग से क्रियान्वित किया। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि 'आज उत्तर प्रदेश पूरे देश में विकास का नेतृत्व कर रहा है। इसके पीछे साढ़े चार वर्षो के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह परिश्रम है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश को 'बीमारूÓ राज्य से बाहर लाने के लिए दिन-रात मेहनत की और वह रिफार्म के जरिए परफार्म करते हुए उत्तर प्रदेश को ट्रांसफॉर्म करने के अपने मिशन में सफल रहे।

-निरंकार सिंह

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