प्रदेश में अब नवजात व माताएं को किया जाएगा ट्रैक

पांच जिलों में आंगनवाड़ी वर्कर को दिए जाएंगे 8000 मोबाईल फोन

शिमला (ऊषा शर्मा) : हिमाचल प्रदेश में अब नवजात व माताएं ऑनलाईन ट्रैक हो सकेंगे। साथ ही अब विभागीय स्तर पर काम भी पेपर लैस होगा। इसके लिए कॉमन एप्लिकेशन सॉफटवेयर डिवल्प किया गया है। इसे जमीनी स्तर पर उतारने के लिए प्रथम चरण में प्रदेश के पांच जिलों शिमला, सोलन, हमीरपुर, ऊना व चम्बा के आंगनवाड़ी वर्करों व सुपरवाईजरों को 8 हजार एंड्रॉयड मोबाईल फोन दिए जाएंगे।

मोबाईल से कॉमन एप्लिकेशन सॉफटवेयर के जरिए आंगनवाड़ी वर्कर जहां नवजात व माताओं का आसानी से ट्रैक कर सकेंगे, वहीं सभी लेखा जोखा भी इसी सॉफटवेयर के जरिए रखा जाएगा। इससे विभागीय स्तर पर प्रयोग होने वाले 11 रजिस्ट्रों में से 10 को हटा दिया जाएगा तथा अब केवल मात्र एक ही कॉमन रजिस्ट्रर ही रहेगा। इसे ऑडिट के लिए रखा जाएगा। साथ ही इस सॉफटवेयर के जरिए पूरी डेटा एंटर किया जाएगा, जैसे बच्चे का वजन, उसे दूध कब पिलाना है आदि-आदि। 

नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद पॉल ने आज शिमला में पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्रथम चरण में पोषण अभियान को पांच जिलों शिमला, सोलन, हमीरपुर, ऊना व चंबा में शुरू किया गया है। शेष 7 जिलों में आगामी पहली अप्रैल से इसे शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सित बर माह को राष्ट्रीय पोषण माह के तौर पर मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य इस को एक अभियान के तौर पर घर-घर तक पहुंचाना है। 

प्रदेश में इसे जनमंच से लिंग किया गया है। इसके अलावा आंगनवाड़ी केंद्रों में भी सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है। इसके तहत केंद्रों में शुद्ध पेयजल के लिए फिल्टर, सफाई आदि की व्यवस्था की जाएगी, ताकि इन केंद्रों में बच्चों की सं या बड़े। इस मौके पर पोषण अभियान के मिशन डायरैक्टर राजेश कुमार तथा निदेशक एचआर शर्मा भी मौजूद थे।

इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारित विभाग निशा सिंह ने कहा कि राज्य में बच्चों में कुपोषण व अनिमिया को समाप्त करने के लिए अब स्कूलों में किचन गार्डन विकसित करने की योजना है। कहा कि स्कूलों में किचन गार्डन विकसित करवाएंगे। इसके लिए आयुर्वेदिक विभाग को साथ जोड़ा जाएगा।
 

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