एसजीएल अस्पताल में नई टेक्नोलॉजी से किया गया दिल की बीमारी का इलाज

शॉकवेव इंट्रावस्कुलर लीथोट्रिप्सी एक सफल और सुरक्षित इलाज हैः डॉ. पवन कुमार सूरी

जालंधर (सौरभ खन्ना)- बाबा कश्मीरा सिंह जन सेवा ट्रस्ट की तरफ से चलाए जा रहे एसजीएल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, गढ़ा रोड जालंधर में 75 साल की बुजुर्ग महिला की दिल की बीमारी का इलाज नई टेक्नोलॉजी के साथ किया गया। बुजुर्ग महिला को सांस चढ़ने और छाती में दर्द की समस्या के साथ उसका परिवार अस्पताल लेकर आया था। उनकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉ. पवन कुमार सूरी ने बुजुर्ग महिला को तुरंत अस्पताल में दाखिल किया। डॉ. पवन कुमार ने बताया कि मरीज की नाड़ियों में ज्यादा कैल्शियम जमा होने के कारण मरीज बहुत तकलीफ में था और उसे स्टंट डालना भी काफी मुश्किल था। इसलिए डॉ. पवन कुमार ने मरीज के परिवारिक सदस्यों की सहमति के साथ नई तकनीक शॉकवेव इंट्रावस्कुलर लीथोट्रिप्सी (आई.वी.एल) के साथ इलाज किया।

इस टेक्नोलॉजी से पहले मरीज की नाड़ी में हलकी शॉकवेव देकर कैल्शियम को तोड़ा गया, ताकि स्टंट अच्छे तरीके से डाला जा सके और बेहतर तरीके से काम कर सके। कड़ी मेहनत के बाद डॉ. पवन कुमार सूरी और उनकी टीम द्वारा यह सफल आप्रेशन किया गया। इलाज के बाद बुजुर्ग महिला अब स्वास्थ्य है और उनको कोई तकलीफ नहीं है। बता दें आई.वी.एल. एक नई टेक्नोलॉजी है, जिसे भारत में पिछले साल ही लॉन्च किया गया था। डॉ. पवन कुमार ने बताया कि शॉकवेव इंट्रावस्कुलर लीथोट्रिप्सी एक अनोखी तकनीक है, जो कैल्शियम की कड़ी परत को हटाने के लिए दिल की धमनियों में तेज रफ्तार वाली सोनिक प्रेशर वेव्स बनाती है। यह एक सफल और सुरक्षित इलाज है, जिसके परिणाम मरीज के जीवन को बेहतर बनाते हैं। एसजीएल अस्पताल के वाइस चेयरमैन एवं सीईओ मनिंदरपाल सिंह रियाड़ ने डॉक्टर और उनकी टीम की प्रशंसा करते हुए बताया कि इस नई तकनीक से इलाज पूरे जालंधर में पहली बार किया गया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल को हर नई टेक्नोलॉजी के साथ लैस रखा गया है, ताकि जरुरतमंदों और गरीब परिवारों का इलाज बढ़िया तकनीक और सस्ते रेट पर हो सके।