पड़ोसी चीन और पाकिस्तान

कारगिल युद्ध के समय सेना प्रमुख रहे जनरल (सेवानिवृत्त) वीपी मलिक ने कहा है कि चीन की कथनी और करनी में हमेशा से फर्क रहा है, लेकिन एलएसी पर बातचीत करते-करते भारत की संप्रभुता पर सवाल खड़े करके उसने आपसी विश्वास की जड़ पर आघात किया है। भारत सरकार और सेना को समझना होगा कि यकीन के आधार के बिना एलएसी से हटने की बात बेमानी है। लिहाजा चीन के किसी भी दुस्साहस के लिए सतर्क रहना होगा। एशिया में भारत ही ऐसा देश है जो चीन को मुकाबला दे सकता है। चीन भ्रम और फरेब फैलाकर असली मकसद को कायम करने की रणनीति पर चलता है। उन्होंने कहा, चीन सैन्य स्तर पर निपटने वाले मुद्दों में राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक पैंतरेबाजी दिखा कर हालात और खराब होने का संकेत दे रहा है।
गौरतलब है कि भारत द्वारा अपने ही क्षेत्र में अपनी सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तथा अपने बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने हेतु जो कदम उठाए हैं उसको लेकर चीन काफी परेशान है और आये दिन कोई न कोई धमकीभरे बयान देकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले दिनों 44 पुलों का उद्घाटन करने के बाद एक ऑनलाईन कार्यक्रम में कहा था कि पाकिस्तान के बाद चीन भारत के साथ सीमा विवाद को इस तरह खड़ा कर रहा है, मानों यह किसी 'अभियान के तहत किया जा रहा है। भारत और चीन के सैनिकों के बीच पांच महीने से ज्यादा समय से पूर्वी लद्दाख में गतिरोध जारी है। सिंह ने कहा 'आप हमारी उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर बनाई गई स्थिति से परिचित हैं। पहले पाकिस्तान और अब चीन, ऐसा लगता है कि एक अभियान के तहत सीमा विवाद पैदा किए गए हैं। सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के अंतर्गत, भारत इन संकटों का न केवल मजबूती से सामना कर रहा है, बल्कि इन सभी क्षेत्रों में बड़े और ऐतिहासिक बदलाव भी ला रहा है। अधिकारियों अनुसार इन 44 पुलों में से अधिकतर रणनीतिक तौर पर अहम इलाकों में हैं और ये तेजी से सैनिकों और हथियारों की आवाजाही सुनिश्चित करने में सैन्य बलों की मदद करेंगे। इनमें से सात पुल लद्दाख में हैं। रक्षा मंत्री ने कहा, 'हमारे सशस्त्र बल के कर्मी उन इलाकों में बड़ी संख्या में तैनात हैं जहां सालभर परिवहन उपलब्ध नहीं रहता है। उन्होंने रेखांकित किया कि सीमा अवसंरचना में सुधार से सशस्त्र बलों को काफी मदद मिलेगी।
चीन की बदनियती तो उस द्वारा 44 पुलों के उद्घाटन के बाद दिए बयान से स्पष्ट हो जाती है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिन ने नए पुलों के बनाए जाने पर चिंता जताई और कहा कि किसी भी पक्ष को इलाके में ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे स्थिति जटिल हो जाए। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि सैन्य निगरानी और नियंत्रण के लिए किसी भी आधारभूत ढांचे का चीन विरोध करता है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों अनुसार चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और अक्साई चिन इलाके में कई सैन्य अड्डे बना रहा है या फिर उसे अपग्रेड कर रहा है। यही नहीं चीन ने इन ठिकानों पर घातक हथियार और मिसाइलें भी तैनात की हैं। चीन की इस चुनौती से निपटने के लिए अब भारत तेजी से सीमा से लगे इलाके में आधारभूत ढांचे को मजबूत कर रहा है।
पाकिस्तान को अब एहसास हो रहा है कि वह भारत से सैन्य दृष्टि से कमजोर है इसलिए वह अब चीन के साथ मिलकर भारत विरुद्ध षड्यंत्र रचने लगा है। इमरान सरकार ने पिछले दिनों सिंध प्रांत के दो द्वीपों को अपने अधीन ले लिया है, जिसका विरोध सिंध प्रात की सरकार कर रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इन दो द्वीपों पर चीनी कंपनियों को विकास के नाम पर जगह देगा जिसका दूसरा पक्ष यह है कि पाकिस्तान चीन को जगह देकर भारत की सीमाओं के नजदीक लाने की तैयारी में है।
चीन जैसे 370 का विरोध करता है, वहीं पाकिस्तान के राष्ट्रीय सलाहकार डा. मोइद युसूफ ने कहा है कि अगर भारत पाकिस्तान से बातचीत करना चाहता है तो उसे पांच शर्तें माननी होंगी। शर्तें इस प्रकार हैं द्यभारत को कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का फैसला वापस लेना होगा। द्यकश्मीर के सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करना होगा। द्यगैर-कश्मीरियों को बसाने वाले डेमिसाइल लॉ को रद्द करना होगा। द्यभारत को मानवाधिकार उल्लंघन रोकना होगा। द्यपाकिस्तान में सरकार प्रायोजित आतंकवाद खत्म करना होगा।
चीन द्वारा भारत के साथ लगती सीमा पर तनाव पैदा करना व लगातार सैन्य गतिविधियों को बढ़ाना तथा पाकिस्तान के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में भारत द्वारा उठाए गए कदमों का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विरोध करना दर्शाता है कि भारत को अपने पड़ोसी देशों चीन व पाकिस्तान प्रति हमेशा सतर्क रहने की आवश्यकता है। चीन जिस तरह भारतीय क्षेत्र से अपने सैनिकों को पीछे हटाने के मुद्दे को लेकर एक के बाद एक वार्ता कर रहा है और नतीजा निकलता नजर नहीं आ रहा, इससे स्पष्ट होता है कि चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान और चीन मिलकर भी भारत विरुद्ध किसी समय भी युद्ध छेड़ सकता है। ऐसी स्थिति का सामना भारत कैसे करेगा, इस बारे अभी से भारत को तैयारी करनी चाहिए। यही बात जनरल मलिक कह रहे हैं जिसे सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। भारत के साथ अमेरिका, जापान व आस्ट्रेलिया के मजबूत होते संबंधों को लेकर चीन पहले ही चेतावनी दे चुका है कि भारत आग से खेल रहा है। अब भारत को भी दो टूक शब्दों में चीन व पाकिस्तान को कह देना चाहिए कि भारत की सीमाओं से छेड़छाड़ करने का मतलब आग से खेलना होगा।    

- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।