पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की जरूरत : BIA

पटना (उत्तम हिन्दू न्यूज): उद्योग संगठन बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) ने पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमत का अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त करते हुये आज कहा कि एेसी स्थिति में पेट्रोलियम पदार्थ के दाम के लिए नीतिगत निर्णय लेने के साथ ही इन्हें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाये जाने की जरूरत है।

बीआईए के अध्यक्ष के. पी. एस. केशरी ने यहां सरकार से अपील करते हुये कहा कि कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि को कैसे कम किया जाय या रोका जाय इसपर एक नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता है। साथ ही पेट्रोलियम पदार्थ को जीएसटी के दायरे में भी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब तक पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया जाता है तब तक के लिए राज्य सरकार अपने स्तर से इसपर लगने वाले कर में कमी कर कुछ सहूलियत प्रदान कर सकती है।

केशरी ने कहा कि पेट्रोल एवं डीजल आज के समय में एक सामान्य आवश्यकता की वस्तु हो गयी है। इन वस्तुओं के कीमत में किसी तरह की बढ़ोतरी का आम जनजीवन के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था पर भी दूरगामी प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि सामान्य आवश्यकता की वस्तु होने के बाद भी इसे जीएसटी के दायरे में नहीं लाया गया है, जिसके कारण इस पर लगने वाले कर के लिए राज्य सरकार स्वतंत्र है। इसका परिणाम है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में पेट्रोल एवं डीजल के अलग-अलग दाम देखने को मिल रहे हैं।

बीआईए अध्यक्ष ने कहा कि बिहार के परिपेक्ष्य में जहां आम जनता एवं उद्योग जगत उत्तर एवं दक्षिण बिहार के बीच सम्पर्क सेतु की कमी एवं दयनिय स्थिति के कारण पिछले चार वर्षों से अधिक समय से परेशान है, अब पेट्रोल एवं डीजल के कीमत में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी ने इस परेशानी को और ज्यादा बढ़ा दिया है। 

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