बढ़ती जनसंख्या नियंत्रण हेतु जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता

09:20 PM Jan 16, 2021 |

दुनिया को 100 करोड़ की जनसंख्या तक पहुंचने के लिए 20 लाख वर्षों का इंतजार करना पड़ा लेकिन यह आश्चर्य का विषय है कि मात्र 220 वर्ष (1804 से 2024 ) के मध्य दुनिया की आबादी 100 करोड़ से बढ़कर 800 करोड़ पहुंच जाएगी। भारत में औसतन 70000 शिशुओं का जन्म प्रतिदिन हो रहा है। इस लिहाज से प्रतिवर्ष भारत में 2.5 करोड़ बच्चों का जन्म हो जाता है। भारत का क्षेत्रफल दुनिया का 2.45 प्रतिशत है और यहां पर दुनिया के 18 फीसद लोग निवास करते हैं। दुनिया के जल संसाधन का महज 4 फीसद भाग ही भारत के पास उपलब्ध है। जनसंख्या वृद्धि अनेकों समस्याओं की जड़ है। भारत में बढ़ती हुई जनसंख्या नियंत्रण हेतु कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून की नितांत आवश्यकता है। आज विश्व की कुल जनसंख्या लगभग 7.7 अरब है। 1804 में विश्व की जनसंख्या 1 अरब पहुंच गई। 1 अरब से 2 अरब जनसंख्या पहुंचने में दुनिया को 123 वर्ष लग गए। 1927 में विश्व की जनसंख्या 2 अरब हो गई। 33 साल बाद 1959 में दुनिया की जनसंख्या बढ़कर 3 अरब हो गई। इसके बाद तो जनसंख्या सुरसा के मुंह की बात बढऩे लगी।12 से 15 सालों के भीतर विश्व की जनसंख्या 1 अरब बढ़ती गई। सन 1999 में विश्व की जनसंख्या 6 अरब को पार कर गई। 21 साल के भीतर आज 2020 के अंत के बाद विश्व की जनसंख्या 1.7 अरब बढ़कर 7.7 अरब पहुंच चुकी है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वर्ष 2050 तक दुनिया के कुल जनसंख्या 10 अरब के पार पहुंच जाएगी। इस वैश्विक जनसंख्या वृद्धि में 2 देशों का अतुलनीय योगदान रहा है, वे हैं चीन और भारत। वर्ष 1000 में भारत की जनसंख्या 7.5 करोड़ थी। 500 सालों में केवल 3 करोड़ जनसंख्या बढ़ी। वर्ष 1501 में देश की जनसंख्या 11 करोड़ पहुंच गई। 1801 में भारत की कुल जनसंख्या 19 करोड़ थी। 100 साल में देश की जनसंख्या में 4 करोड़ की वृद्धि हुई। 1901 में भारत की जनसंख्या 23 करोड़ थी। 1951 में देश की जनसंख्या 36 करोड़, 2001 में 102 करोड़, 2011 में 121 करोड़ हो गई। आज 2020 के अंत के बाद देश की जनसंख्या 140 करोड़ है। संयुक्त राष्ट्र की मानें तो वर्ष 2027 में भारत की जनसंख्या चीन से अधिक हो जाएगी। वर्ष 2019 में चीन की जनसंख्या 143 करोड़ थी जबकि भारत के 137 करोड़ के आसपास थी। आज चीन और भारत के जनसंख्या में महज 6 करोड़ का अंतर है। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि चीन का क्षेत्रफल भारत के क्षेत्रफल से 3 गुना अधिक है। भारत का कुल क्षेत्रफल 3287263 वर्ग किलोमीटर हैजबकि चीन का क्षेत्रफल 9596961 वर्ग किलोमीटर है। चीन में दुनिया का 7 फीसद पानी उपलब्ध है जबकि भारत के पास दुनिया का मात्र 4 फीसद पानी ही उपलब्ध है। जनसंख्या घनत्व की बात की जाए तो चीन की स्थिति हमसे 3 बहुत बेहतर है। भारत में जनसंख्या घनत्व 440 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है जबकि चीन में जनसंख्या घनत्व 148 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। चीन ने अपनी बढ़ती हुई जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए कड़े कानून बनाए। जनसंख्या नियंत्रण नीति को कठोरता से क्रियान्वित कराया गया। वर्ष 1970 में चीन ने 'टू चाइल्ड पॉलिसीÓ अपनाई। फायदा कम होता देख चीन ने वर्ष 1979 में 'टू चाइल्ड पॉलिसीÓ को बदलकर 'वन चाइल्ड पॉलिसीÓ अपना लिया।

चीन में 'वन चाइल्ड पॉलिसीÓ को कड़ाई से लागू किया गया। लगभग 40 करोड़ बच्चों को जन्म लेने से रोक दिया गया, वरना आज चीन की जनसंख्या 180 करोड़ से अधिक होती। चीन में शिशु जन्म दर इतनी कम हो गई कि चीन को वर्ष 2015 में 'वन चाइल्ड पॉलिसीÓ को खत्म करना पड़ा। अब चीन के दंपत्ति एक बच्चे से अधिक शिशुओं को जन्म दे सकते हैं। इसके उलट भारत में जनसंख्या वृद्धि की समस्या को कभी सरकारों ने गंभीरता से लिया ही नहीं। भारत में जनसंख्या वृद्धि को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। समस्या को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। देश में आज शिशु के जन्म होने पर 6000 रुपए की आर्थिक मदद दी जा रही है। ऐसी योजनाओं से जनसंख्या और बढ़ेगी। ऐसी योजना जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देती हैं। तत्काल ऐसी योजनाओं पर रोक लगनी चाहिए। यही आर्थिक सहायता अन्य रूपों में भी दी जा सकती है। अशिक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बाल मजदूरी, तस्करी, गरीबी, बीमारी और भुखमरी की समस्या सीधे जनसंख्या वृद्धि से जुड़ी हुई है। आज भारत की स्थिति ऐसी है कि हम ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 102 वें स्थान पर हैं। एजुकेशन इंडेक्स में 145 वें स्थान पर, वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में 140 वें और ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स में 129 स्थान पर हैं। भारत में जरूरत है चीन के तर्ज पर वन चाइल्ड पॉलिसी को अपनाने की। हम दो हमारे दो की नीति अपनाने से काम नहीं चलेगा। एक से अधिक बच्चे पैदा करने वालों को हतोत्साहित करने की आवश्यकता है। एक से अधिक बच्चे पैदा करने वालों को सरकारी नौकरी या सरकारी लाभों से वंचित कर देना चाहिए। ऐसे लोगों को लोकसभा, राज्यसभा, विधान परिषद, विधानसभा के चुनाव लडऩे पर तत्काल रोक लगा देनी चाहिए।  दो से अधिक बच्चे पैदा करने वाले लोगों पर सजा एवं जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए। वोटर कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड, पैन कार्ड इत्यादि रद्द कर दिए जाने चाहिए। गत वर्ष भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने संसद में एक विधेयक पेश कर मांग की थी कि 2 से अधिक बच्चे पैदा करने वालों को हतोत्साहित किया जाना चाहिए। एक वर्ष बीत चुका है लेकिन जनसंख्या नियंत्रण को लेकर अभी तक कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है। 1976 में संसद के दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा के बाद संविधान में 42 वें संशोधन विधेयक को पारित किया गया। जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन शब्द को जोड़ा गया। 44 साल बीत गए लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। 2002 की वेंकट चल्लैया आयोग की सिफारिशों पर ध्यान नहीं दिया गया। देश अब तक जनसंख्या नियंत्रण के लिए कठोर कानून नहीं बना पाया है। जनसंख्या नियंत्रण कानून के अभाव में जनसंख्या इसी प्रकार बढ़ती रहेगी और हमारे संसाधन कम पड़ते रहेंगे। देश में जनसंख्या नियंत्रण हेतु कठोर और प्रभावी कानून बनाए जाने की सख्त जरूरत है।

-प्रोफेसर विवेक सिंह
लेखक प्रसिद्ध स्तंभकार एवं विचारक, आर्थिक, राजनैतिक एवं सामाजिक विश्लेषक हैं। 
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