नरेश गुजराल की नसीहत

10:26 AM Feb 17, 2020 |

राज्यसभा सांसद, अकाली दल बादल के प्रवक्ता व पूर्व प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल के पुत्र नरेश गुजराल ने दिल्ली में भाजपा की हार व आम आदमी पार्टी की जीत को लेकर एक टी.वी. चैनल पर अपने विचार प्रकट करते हुये कहा कि भाजपा दिल्ली में हुई हार से सबक लेगी और आगे से अपनी रणनीति को बदलेगी। केजरीवाल की जीत के बारे में उन्होंने कहा कि जो भी राजनीतिक व्यक्ति लोगों से किए वायदे पूरे करता है, उसकी जीत होती है। केजरीवाल ने लोगों के साथ किए गए बिजली, पानी, सडक़, शिक्षा के बारे में सभी वायदे पूरे किए और लोगों ने उनको बड़ी जीत दिलाई। दूसरी बड़ी बात केजरीवाल की जीत की यह है कि लोगों को शराब पिलाये बगैर, पैसा दिए बिना भी चुनाव जीता जा सकता है। दिल्ली में ऐसा ही हुआ है।

केजरीवाल ने अपने चुनाव प्रचार में मोदी सरकार पर एक बार भी हमला नहीं किया और पॉजिटिव एजेंडा लेकर चुनाव मैदान में उतरे और इसी कारण वह बड़ी जीत हासिल कर सके। जब गुजराल से पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी भी ऐसा ही सोचती है तो उन्होंने कहा की बिल्कुल उनकी पार्टी ऐसा ही सोचती है क्योंकि शिअद गुरु साहिबान की धारणाओं पर चलती है। उन्होंने आपसी भाईचारे, प्रेम और सहनशीलता का संदेश दिया था। गुजराल ने कहा कि शिअद की अपनी विचारधारा है बेशक शिअद ने सिटीजन अमेंडमैंट एक्ट के हक में वोट डाली, लेकिन इसने अपनी बात भी रखी और कहा कि मुसलमानों को इससे बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। दूसरे मुद्दों पर भी शिअद अपनी बात रखता है। गुजराल ने कहा कि चुनाव से पहले एन.डी.ए. का एजेंडा देश की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना था और एन.डी.ए. को अपना सारा फोकस इस पर करना चाहिए। देश की अर्थव्यवस्था को ठीक करने में पूरा ध्यान लगाना चाहिए। सांसद नरेश गुजराल ने राजनीति को लेकर जो बातेें दिल्ली में भाजपा की हार के लिये कहीं वही पंजाब की राजनीति पर भी लागू होती हैं।

पंजाब में अकाली दल बादल गठबंधन लगातार दस वर्ष सत्ता में रहा और पिछले विधान सभा चुनावों से लगातार हार का सामना कर रहा है। नरेश गुजराल की अपनी छवि भी अपने पिता श्री इंद्र कुमार गुजराल की तरह साफ सुथरी है। इसलिये इन की कही बात को पार्टी के भीतर और बाहर भी गंभीरता से लिया जाता है। नरेश गुजराल की बात केवल भाजपा नेतृत्व को ही नहीं बल्कि अकाली दल बादल नेतृत्व गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। पंजाब में अकाली दल बादल को पुन: सत्ता में आना है तो उसे भी धर्म, भाषा तथा क्षेत्र की राजनीति से ऊपर उठकर पंजाब तथा पंजाबियों से सम्बंधित समसयाओं पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा। नशा, बेरोजगारी, सडक़, शिक्षा, जल व वायु प्रदूषण झेल रहे पंजाब से उद्योग का पलायन भी अपने आप में एक बड़ी समस्या है। पंजाब में अकाली दल बादल और भाजपा गठबंधन की असफलता के भी उपरोक्त कारण ही थे। अगर अकाली-भाजपा गठबंधन को पंजाब में पुन: सत्ता में आना है तो नरेश गुजराल ने जो नसीहत भाजपा को दी है उस पर अकाली दल बादल को गंभीरता से आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है।

अकाली दल बादल पर अगर पंजाब में आज सब से अधिक राजनीतिक दबाव है तो वह आम आदमी पार्टी का ही है। पंजाब में आम आदमी पार्टी अकाली दल बादल का विकल्प बनने की तैयारी में है और पंजाब का जन साधारण जो बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस कर रहा है वह भी आम आदमी पार्टी पर न•ार लगाये बैठा है। नरेश गुजराल स्वयं अकाली दल बादल के सांसद भी हैं और वरिष्ठ सदस्य भी हैं। वह अपनी पार्टी की नीति-रीति में कितना सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं यह तो आने वाला समय और पंजाब विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा। 

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।