Monday, May 20, 2019 02:03 AM

मुनीष तीवारी के बोल

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के श्री आनंदपुर साहिब से लोकसभा के उम्मीदवार पंजाब की ही नहीं देश की राजनीति पर पकड़ रखते हैं और आतंकवाद पीडि़त तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बुद्धिजीवी के रूप में भी पहचाने जाते हैं। गत दिनों अपनी जालंधर फेरी के दौरान उन्होंने कुछ समाचार पत्र समूहों के साथ बातचीत के दौरान जो कहा वो चिंता का विषय है। लोकसभा चुनाव के केंद्रबिन्दू वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही हैं। भाजपा ने नारा दिया है कि 'एक बार फिर मोदी सरकार' तो विपक्षी दल विभिन्न गठबंधन कर मोदी को सत्ता से बाहर रखना चाहते हैं। इसलिए राष्ट्र व क्षेत्र स्तर पर मोदी के विरोधी कुछ न कुछ ऐसा बोलते हैं जिनसे कई प्रकार की भ्रम व भ्रांतियां फैलती हैं। 

मुनीष तिवाड़ी एक जिम्मेवार व्यक्ति हैं और उनकी कही बात का प्रभाव भी पड़ता है, क्योंकि वह तोल मोल के ही बोलते हैं। लेकिन जालंधर फेरी के दौरान मुनीष तिवारी ने मोदी सरकार के पुन: सत्ता में आने को लेकर जो कहा ऐसा तिवारी जैसे परिपक्व राजनीतिज्ञ से उम्मीद नहीं थी। मुनीष तिवारी ने कहा कि यदि नरेन्द्र मोदी पुन: प्रधानमंत्री बनते हैं तो यह देश का अंतिम चुनाव होगा। तिवारी ने यह भी कहा कि देश श्री मोदी की फिरकू व फूट डालो नीतियों को अलविदा कहने जा रहा है और पहले दो चरणों के चुनाव ने इस बात के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के समय बोलने और लिखने की आजादी को कुचलने के लिए सबसे अधिक प्रयास किए गए और भाजपा या सरकार के विरुद्ध लिखने वालों को देश विरोधी बताया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र विरोधी रुझान है और यह चुनाव लोकशाही को रखने का चुनाव है। देश के लोगों के सामने बड़ी चुनौती यह है कि उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा और इसको बर्बाद करने के लिए चलने वालों में से एक का चुनाव करना है। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाए जाने के मामले पर भाजपा को कड़े हाथों लेते हुए तिवारी ने कहा कि बम धमाके की साजिश में शामिल होने के मुकद्दमे का सामना कर रही साध्वी को टिकट देने का खामियाजा भाजपा को देर तक भुगतना पड़ेगा।

आजादी के बाद आज तक कांग्रेस पर ही यह आरोप लगा है कि अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति पर चलते हुए कांग्रेस ने देश को भाषा, क्षेत्र, सम्प्रदाय, जाति तथा धर्म के नाम पर बांटा है। पंचायती चुनावों से लेकर लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस अपने उम्मीदवारों का चुनाव जाति, क्षेत्र और धर्म के आधार पर ही करती चली आ रही है। मुनीष तिवारी साहिब को भी श्री आनंदपुर साहिब से टिकट भी कांग्रेस की अतीत की चली परम्पराओं के हिसाब से ही मिली है।

देश के बहुमत हिन्दू समाज का कांग्रेस से मोह भंग भी उसकी तुष्टिकरण की नीति के कारण ही हुआ। तुष्टिकरण की राह पर चलते हुए कांग्रेस ने लक्ष्मण रेखा लांघते हुए देश में हिन्दू आतंकवाद की बात उठाई और उसी को साबित करने के लिए कईयों को कटघरे में खड़ा कर दिया। भाजपा नेत्री और 2008 के मालेगांव विस्फोट की आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भी उनमें से एक है। प्रज्ञा को चुनाव लडऩे से रोकने के लिए न्यायालय में एक अर्जी भी दी गई है उसका अपने वकील के मार्फत उत्तर देते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कहा है कि यह अर्जी 'ओछी' है और राजनीतिक बदले की भावना से दायर की गयी है।

विस्फोट के पीडि़तों में से एक के पिता ने पिछले गुरुवार को अदालत का रुख कर प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से चुनाव लडऩे से रोकने की अपील की। ठाकुर ने अदालत से दरख्वास्त की है कि जुर्माना लगाकर इस अर्जी को खारिज कर दिया जाए। इस बीच एनआईए ने अपने जवाब में कहा है कि इस मामले पर कुछ कहने का उसका कोई क्षेत्राधिकार नहीं है। उसने कहा, चुनाव लडऩे का मामला इस अदालत से जुड़ा नहीं है और इसका निर्णय बस चुनाव आयोग द्वारा हो। ठाकुर की जमानत रद्द करने के संबंध में एनआईए ने कहा कि उसके विरुद्ध याचिका सुप्रीमकोर्ट में लंबित है।
पंजाब में आतंकवाद के लिए जहां अलगाववादी तथा आतंकवादियों के साथ पाकिस्तान व अन्य विदेशी संगठन थे। वहीं एक कारण तत्कालीन कांग्रेस सरकार की नीतियां भी थीं और उनके कारण पंजाब नफरत की अग्नि से जल उठा और उससे तिवाड़ी परिवार तथा स्वयं मुनीष तिवारी भी प्रभावित हुए।
नरेन्द्र मोदी सरकार ने कौन सा ऐसा असंवैधानिक कार्य किया है जिसकी संविधान आज्ञा न देता हो। मोदी सरकार ने तो सभी निर्णय मंत्रिमंडल और संसद की सहमति के साथ ही लिए हैं। संविधान की अवमानना तो कांग्रेस द्वारा 1975 में आपातकाल घोषित कर की गई थी। ऐसे में यह कहना कि मोदी सरकार के दोबारा आने पर यह चुनाव अंतिम होंगे केवल भ्रम और भ्रांति फैलाने वाली बात है और यह बात वो व्यक्ति कह रहा है जो एक जिम्मेवार तथा परिपक्व राजनीतिज्ञ है तथा संविधान को समझता भी है और लोकतंत्र में विश्वास भी रखता है। ऐसा व्यक्ति जब एक गैर जिम्मेदराना बयान देता है तो उससे उसकी छवि व साख तो कमर होती ही है साथ में उसके हितैषियों की परेशानियां भी बढ़ती हैं। भविष्य में मुनीष तीवारी उपरोक्त बातों का ध्यान रखे तो उनके और कांग्रेस के लिए अच्छा ही रहेगा।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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