रात बच्चों के सो जाने के बाद मेकअप करके टैरिस पर जाती है 'मम्मियां', रहता है ग्राहकों का इंतजार

चेन्नै (उत्तम हिन्दू न्यूज): लॉकडाउन के इस दौर में कई यौन कर्मी आजीविका के साधन खत्म होने के कारण भुखमरी की कगार पर आ गईं हैं। कई तो अपने गृह राज्यों को लौट गईं हैं। यौन कर्मी लक्ष्मी (बदला हुआ नाम) का कहना है कि भयावह बीमारी के डर से ग्राहक नहीं मिल रहे जिसका असर हम पर पड़ रहा है। पिछले दो महीने से वह घर से बाहर नहीं निकली हैं। पेट भरने के लिए अब वह फोन पर ऑडियो और वीडियो कॉलिंग का सहारा ले रही हैं। वह बताती है रोज बच्चों के सो जाने के बाद वह मेकअप करके टैरिस पर जाती है और अपने 'ग्राहकों' को चोरी-छिपे कॉल करती हैं। 

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लक्ष्मी बताती कि उसे उसकी दोस्त ने बताया कि वह रोजी-रोटी कमाने के लिए कमाने के लिए इन दिनों फोन का सहारा ले रही है। इससे पहले जितनी कमाई तो नहीं होती लेकिन गुजारा चल जाता है। कोरोना संक्रमण का यौन कर्मियों पर काफी बुरा असर पड़ा है। आय का जरिया ना होने से उन्हें आजीविका में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जिनके पास मोबाइल फोन और इंटरनेट की सुविधा है, वे तो ऑडियो और वीडियो कॉलिंग की मदद से कुछ कमाई कर ले रही हैं। वहीं जिनके पास ऐसी सुविधाएं नहीं हैं, वे आय का दूसरा जरिया तलाश रही हैं।

पैसों के भुगतान के लिए गूगल पे सहित अन्य डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है। कई बार यौन कर्मी के पास पर्याप्त पैसा नहीं होने पर ग्राहक उनके फोन का रिचार्ज भी करा देते हैं। ज्यादातर ग्राहक ऐसे हैं, जो इस माहामारी के वक्त में अकेले रह गए हैं। कई ग्राहक वॉट्सऐप वीडियो कॉल करते हैं। पैसों का लेनदेन डिजिटल माध्यम से किया जाता है।

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साउथ इंडियन एड्स ऐक्शन प्रोग्राम के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्यामला नटराज ने कहा, तमिलनाडु में ऐसा कोई रेड लाइट एरिया ना होने की वजह से ज्यादातर यौन कर्मी 'छिपी' होती हैं। लॉकडाउन में कई तो फोन का सहारा ले ले रही हैं लेकिन घरवालों के साथ रहने की वजह से हिचकती हैं। कई अन्य ने दूसरे काम शुरू कर दिए। कोई खाने की छोटी मोटी दुकान चला रहा है तो कोई मुर्गी पालकर अंडे बेच रहा है।