मोदी की प्राथमिकता है देशहित

01:00 PM Jun 28, 2019 |

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार उग्र राष्ट्रवाद फैलाकर देश को बांटने तथा संविधान को खतरे में डाल रही है। पिछले पांच वर्षों में घृणा से प्रेरित अपराधों की संख्या में बढ़ौतरी हुई है। इसी तरह राज्यसभा में भी विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि देश में साम्प्रदायिकता बढ़ रही है, उसका प्रभाव यह है कि संसद में भी धार्मिक नारे लग रहे हैं और देश में भीड़ की हिंसा की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। उपरोक्त आरोपों के साथ-साथ जल संकट व बेरोजगारी व अन्य कई मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरता रहा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्ष द्वारा लगाए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस ने परिवार को छोड़ कर पार्टी के अंदर भी कभी किसी को श्रेय नहीं दिया। जबकि राजग सरकार न सिर्फ अब तक की सभी सरकारों को श्रेय देती रही है बल्कि महात्मा गांधी, बाबा साहेब आंबेडकर, राम मनोहर लोहिया से लेकर जवाहर लाल नेहरू तक के सपनों को पूरा कर रही है। लगभग सवा घंटे के भाषण में कभी राजनीतिक तंज तो कभी सामाजिक सरोकारों का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस को ऊंचा और ऊंचा उठने की चाहत रही है और इसीलिए यह नहीं देख पाती है कि जमीन कहां है, जबकि भाजपा जड़ों से जुड़ी है। विपक्ष की ओर से बार-बार प्रधानमंत्री पर यह आरोप लगाया गया कि वह केवल खुद की बात करते हैं। इस क्रम में उनके खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का भी प्रयोग किया गया। जब प्रधानमंत्री जवाब देने खड़े हुए तो सख्त शब्दों में कहा, अब के बाद फिर कभी ऐसे आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि लाल किले की प्राचीर से भी उन्होंने दो बार कहा है कि जितनी भी सरकारें आई हैं सबने देश के लिए काम किया। यह कांग्रेस की मनोवृत्ति है कि वह खुद के सिवा किसी को श्रेय नहीं देती। कभी अटल सरकार को श्रेय नहीं दिया, कभी नरसिंह राव सरकार को याद नहीं किया। यहां तक कि दो दिनों से चल रही चर्चा में एक बार भी मनमोहन सिंह का भी जिक्र नहीं किया, जबकि उनकी सरकार ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न प्रदान किया था। विपक्ष की ओर से विरोधी दलों के नेताओं पर कार्रवाई का आरोप लगाया जाता रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, यह सरकार का काम नहीं कि किसे जेल भेजा जाए, यह अदालत का काम है। इसी बहाने उन्होंने याद दिलाया कि अब आपात्काल नहीं है जो किसी को भी जेल भेज दिया जाए। वह वक्त था जब सत्ता में बने रहने के लिए देश और लोकतंत्र की आत्मा को कुचला गया था। अब वही लोग हम पर आरोप लगा रहे हैं। तंज कसते हुए मोदी ने कहा, इस पार्टी के नेताओं को जेल में नहीं डालने के लिए उनकी आलोचना की जाती है, पर साथ ही उन्होंने कहा कि कम से कम वे जमानत पर हैं और उसका मजा ले रहे हैं। उनका इशारा राहुल और सोनिया गांधी की ओर था जो नेशनल हेराल्ड केस में जमानत पर हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, हम किसी को नीचा करना नहीं चाहते। हम लंबी लकीर खींचने में लगे हैं। कुछ लोग हैं जो इतने ऊंचे हो गए हैं कि नीचे के लोग उन्हें छोटे लगते हैं। हमारी शुभकामना है कि ऐसे लोग और ऊंचे होते जाएं। प्रधानमंत्री का इशारा कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के उस बयान की ओर था जिसमें उन्होंने कहा था कि मोदी उनकी पार्टी के ऊंचे कद को धूमिल नहीं कर सकते।

विपक्ष द्वारा सरकार की नीतियों और कार्यशैली को लेकर प्रकट चिंताओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक परिपक्व नेता की तरह तथ्यों पर आधारित व देश हित को प्राथमिकता देते हुए कहा कि सबसे पहले देश में एक 'मतदाता सूची' पर विचार होना चाहिए। अभी अलग-अलग चुनाव के लिए अलग-अलग मतदाता सूचियां हैं। कांंग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए मोदी ने कहा कि लंबे समय तक देश पर राज करने वाले दल का इस मुद्दे पर चर्चा से भागना उचित नहीं है। ईवीएम और वीवीपैट पर चुनाव के दौरान सवाल उठाने वाली कांग्रेस समेत विपक्षी दलों को निशाने पर लेते हुए मोदी ने कहा कि यह नयी बीमारी पैदा हुई है। हार जाओ तो ठीकरा ईवीएम पर फोड़ दो। मोदी ने कहा कि ईवीएम का ही नतीजा है कि आज चुनाव में हिंसा, बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाएं बंद हो गई हैं। उन्होंने 'एक देश एक चुनाव'  के मुद्दे पर कहा कि 1952 से लेकर अब तक चुनाव में सुधार होते रहे हैं, लेकिन अब इसे नकार देना गलत है। इस पर चर्चा तो होनी चाहिए। अभिभाषण पर हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस की टिप्पणियों पर मोदी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि 'आप तो जीत गए, लेकिन देश हार गया' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना देश की जनता का अपमान है। उन्होंने कहा कि क्या वायनाड में हिंदुस्तान हार गया, क्या रायबरेली, अमेठी में हिंदुस्तान हार गया। मोदी ने कहा, ऐसा मानना कि कांग्रेस हारी तो देश हार गया, यह बिल्कुल गलत सोच है। क्या कांग्रेस का मतलब देश हो चला है। कांग्रेस की समस्या यह है कि वह जीत मिलने पर न तो विजय पचा पा रही है और न हार स्वीकार कर पा रही है। मोदी ने कहा कि देश अब नये भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। देश पीछे जाने को तैयार नहीं है। मोदी ने कहा कि विरोधी दल का मतलब आज हर बात का विरोध करना हो गया है। ईवीएम, डिजिटल लेनदेन, आधार और जीएसटी का विरोध किया गया। यह नकारात्मकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक से दूर भागना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस समेत विपक्ष से नकारात्मक सोच से बाहर निकलकर रचनात्मक सहयोग का आग्रह किया। मोदी ने झारखंड में मॉब लिंचिंग में एक मुस्लिम युवक की हत्या पर कहा कि दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इसके लिए पूरे झारखंड को दोषी ठहराना गलत है। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें भी पीड़ा पहुंची है। इसके अलावा बिहार में इंसेफेलाइटिस से अब तक 130 से अधिक बच्चों की मौत को 'दुख और शर्म' का विषय बताया। उन्होंने सांसदों से कहा कि आयुष्मान भारत योजना को कामयाब बनाकर ही इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकेगा। मोदी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी का अहंकार है कि न वह जीत पचा पाती है न हार स्वीकार कर पा रही है। यह कहना ठीक नहीं कि कांग्रेस जीती तो देश जीता और कांग्रेस हारी तो देश हार गया। मोदी ने एक शेयर पढ़ा- 
ताउम्र गालिब यह भूल करता रहा,
धूल चेहरे पर थी, आईना साफ करता रहा।

संसद के दोनों सदनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों को आईना दिखाते हुए स्पष्ट रूप से 2019 के लोकसभा चुनावों में जनता द्वारा दिए निर्णय को स्वीकार कर देश हित में मिलकर कार्य करने की बात कही है। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता व सफलता के पीछे उनकी यही सोच है जो उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। मोदी को उनका देश प्रेम, पुरुषार्थ और साधारण जन के प्रति संवेदनशीलता दूसरे नेताओं से ऊंचा उठा देती है। उनकी भाषा और भाव देश के जन को आकर्षित करते हैं। संसद में जिस आत्मविश्वास के साथ मोदी ने अपनी बातें कही उसी से स्पष्ट है कि वे केवल और केवल देशहित को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। मोदी आज सकारात्मक राजनीति के प्रतीक बनकर उभरे हैं तो कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के अधिकतर नेता नकारात्मक राजनीति के प्रतीक के रूप में पहचाने जाने लगे हैं। देशहित में यही है कि पक्ष और विपक्ष मिलकर देशहित को ही प्राथमिकता दे। केवल विरोध के लिए विरोध न किया जाए।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।