मोदी की नीयत व नीति

इस वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि व साख को कमजोर करना ही विपक्षी दलों का एकमात्र लक्ष्य रह गया है। विपक्षी दलों ने महागठबंधन बनाया है। इससे एक बात तो स्पष्ट है कि सभी विपक्षी दल जो महागठबंधन में शामिल हुए हैं यह मानकर चल रहे हैं कि उनमें से कोई भी अकेले तौर पर भाजपा को मात नहीं दे सकता। भाजपा को मात देने के लिए एकजुट हुए दल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि को कमजोर करने में लगे हैं, क्योंकि यह सभी समझ रहे हैं कि भाजपा की जीत में प्रधानमंत्री मोदी की नीयत व नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है।

नरेन्द्र मोदी सरकार को राफेल के मुद्दे पर घेरने के लिए दिन-रात एक कर रहे विपक्षी दल अपनी भावी नीति को लेकर चुप हैं। जनता के उज्ज्वल भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर कुछ बोल नहीं रहे, बस मोदी विरोध के सहारे ही वह अपनी नाव को चुनावी भंवर से पार लगाने के प्रयास में हैं, जबकि प्रधानमंत्री स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि ईमानदारों को मुझ पर विश्वास है और भ्रष्टाचारियों को मुझ से दिक्कत है।

गत दिनों भारतीय सूचना विज्ञान संस्थान के समारोह में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ईमानदार लोग मुझ पर विश्वास करते हैं और भ्रष्टाचारियों को उनसे समस्या है क्योंकि उन्होंने सुनिश्चित किया है कि गरीबों को मिलने वाला लाभ उन तक सीधा पहुंचे। मोदी ने कहा कि जिन लोगों ने दलाली का काम किया वे अब भुगत रहे हैं। यह चौकीदार सुनिश्चित करता है कि गरीबों के लाभ सीधे उनके खातों में भेजे जाएं, साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने 2350 मकानों में लाभुकों के ई-गृह प्रवेश का गवाह बने। रॉबर्ट वाड्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा पहले शायद ही कभी हुआ होगा। दोनों ईडी जैसी जांच एजेंसियों के समक्ष पेश हो रहे हैं। आप देख रहे हैं कि दिल्ली में क्या हो रहा है। जिसकी आय के बारे में पहले लोग बात करने से डरते थे, वे अब अदालतों और एजेंसियों के समक्ष पेश होकर अपनी काली कमाई का ब्योरा दे रहे हैं। एच.डी. कुमारस्वामी को मजबूर मुख्यमंत्री बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, कर्नाटक में सब सत्ता की मलाई खाने में जुटे हैं। नेता अपने प्रभुत्व की लड़ाई में जुटे हैं। आए दिन मुख्यमंत्री को धमकियां मिलती रहती हैं। कुमारस्वामी का इस्तेमाल राज्य में गठबंधन की खींचातानी में पंचिंग बैग की तरह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनडीए की सरकार ने विकास की पंचधारा बहाई है। बच्चों को पढ़ाई, युवाओं को कमाई, बुजुर्गों को दवाई, किसानों को सिंचाई और जन-जन की सुनवाई, इसी विजन पर सरकार आगे बढ़ रही है। लेकिन कांग्रेस चाहती है कि सरकार का मुखिया कोने में रोता रहे और फैसले नामदार के महलों में होते रहें।

भाजपा वर्तमान राजनीतिक माहौल में चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीन गुणों को आधार बनाकर अपनी रणनीति बनाने की तैयारी में है। यह तीन गुण हैं प्रधानमंत्री की नीयत, मेहनत व निर्णय लेने का दम। भाजपा अपने प्रचार में कहेगी कि मोदी की नीयत पर कोई सवालिया निशान नहीं खड़ा कर सकता। राफेल जैसे मुद्दे पर विपक्ष ने घेरने की कोशिश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। पार्टी का कहना है कि मोदी के बारे में विरोधी भी यह नहीं कह सकते हैं कि वे अपने परिवार-रिश्तेदारों के लिए काम करते हैं या छुट्टी पर चले जाते हैं। वैसे रामलीला मैदान में भाजपा की समापन बैठक के भाषण में खुद मोदी ने इस चुनाव अभियान की रूपरेखा सामने रख दी थी। उन्होंने कहा था कि देश को तय करना होगा कि उसे कैसा प्रधान सेवक चाहिए, क्या कोई ऐसा सेवक चाहेगा जो महीनों छुट्टी मनाने चला जाए, जिसके बारे में किसी को पता न हो? मोदी ने यह भी कहा कि देश को ऐसा सेवक चाहिए जो रात-दिन कठोर परिश्रम करे। जनता 12 घंटे काम करे तो वह 18 घंटे काम करने वाला हो। भाजपा का मानना है कि मोदी के नेतृत्व में निर्णायकता बेहद अहम हिस्सा है। नोटबंदी, जीएसटी, सवर्ण आरक्षण जैसे बड़े फैसले इसके उदाहरण बन गए हैं। नेतृत्व के अलावा प्रचार-प्रसार के लिए भाजपा ने परफॉर्मेंस को दूसरा अहम मुद्दा बनाया है। इसमें पार्टी मोदी सरकार की उन तमाम उपलब्धियों का जिक्र करेगी, जो सीधे जनता से सरोकार रखती है। लेकिन आंकड़ों के जरिए यह कहने से परहेज करेगी कि 5 साल में ही लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। इसके उलट आंकड़ों के जरिए कांग्रेस सरकार के समय काम की गति और मोदी राज में गति और क्रियान्वयन को तुलनात्मक रूप से पेश करेगी। चुनाव अभियान के लिए तीसरा अहम मुद्दा मजबूत बनाम मजबूर सरकार होगा। राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन मोदी ने मंच से आरोप लगाया था कि विपक्षी गठजोड़ वाले दल मजबूर सरकार चाहते हैं, ताकि भ्रष्टाचार कर सके। जबकि देश एक मजबूत सरकार चाहता है, जो सबका साथ, सबका विकास के संकल्प को और तीव्र गति के साथ साकार कर सके। भाजपा की रणनीति इस मुद्दे पर बहस खड़ी करने की भी है कि कभी एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे दल और नेता कैसे मोदी के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि जहां भाजपा प्रधानमंत्री मोदी की नीयत व नीति को ले जनता के पास जाएगी वहीं विपक्षी दल मोदी की नीयत व नीति पर प्रश्नचिन्ह लगाकर जनता के दरबार में जाएंगे, फैसला तो जनता ने ही करना है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।