मोदी मंत्रिमंडल का ऐतिहासिक फैसला, अंतरिक्ष के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को दी मंजूरी

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज)- मोदी सरकार ने अंतरिक्ष गतिविधियों की निगरानी, समन्वय और इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन एवं प्राधिकरण केंद्र’ (आईएन-स्पेस) के गठन का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की यहां बुधवार को हुई बैठक में इसके संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। आईएन-स्पेस का एक संचालक मंडल (बोर्ड) होगा जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय स्थापित करेगा। बोर्ड की रूपरेखा को आने वाले दिनों में अंतिम रूप दिया जाएगा। आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा करते हुए सरकार ने कहा था कि वह अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र को अवसर प्रदान करेगी।
अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बैठक के बाद संवाददाताओं को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह एक “ऐतिहासिक एवं नई राह का सृजन करने वाला” फैसला है। 70 साल से देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को बेहद गोपनीय रखा गया और निजी क्षेत्र को इससे दूर रखा गया। उन्होंने कहा कि आईएन-स्पेस देश के अंतरिक्ष क्षेत्र के बुनियादी ढांचों और परिसंपत्तियों का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित करेगा। इससे देश में अंतरिक्ष क्षेत्र के वैज्ञानिकों एवं अन्य विशेषज्ञों को रोजगार के ज्यादा अवसर मिलेंगे जिससे ‘ब्रेनड्रेन’ रोकने में भी मदद मिलेगी।

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डॉ. सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान में भारत ने दुनिया में अपनी पहचान बना ली है।  कुछ वर्षों में इसका इस्तेमाल जीवन के हर क्षेत्र में हो रहा है। इसरो ने एक साथ 104 उपग्रह छोड़ने का कीर्तिमान स्थापित किया। हमारा मंगलयान छह साल से मंगल ग्रह की कक्षा में रहकर आँकड़े जुटा रहा है और हम अंतरिक्ष में पहले मानव मिशन गगनयान की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में समय के साथ अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े मानव संसाधन और विशेषज्ञता बढ़ी है। मंत्रिमंडल के आज के फैसले से उनका इस्तेमाल देश के लिए ही होना सुनिश्चित किया जा सकेगा। उपग्रहों और उनके द्वारा जुटाए गए आँकड़ों तथा इसरो के बुनियादी ढाँचों तक निजी क्षेत्र की पहुँच बढ़ेगी। आईएन-स्पेस इसके लिए अनुकूल पारिस्थितिकी बनाने का काम करेगा।

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डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले दिनों बनाए गए गठित सार्वजनिक कंपनी ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड अब ‘आपूर्ति आधारित मॉडल’ की बजाए ‘माँग आधारित मॉडल’ पर काम करेगा। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से इसरो को अनुसंधान एवं विकास, नई प्रौद्योगिकी, अन्वेषण और मानव-अंतरिक्ष मिशनों पर ध्यान केंद्रित करने का अधिक अवसर मिलेगा। निजी क्षेत्र को ग्रहों पर मिशन भेजने में भी चयन के आधार पर मौका दिया जाएगा।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसरो के तहत अंतरिक्ष में नए तरीके शुरू किए जाएंगे। न्यू इंडिया स्पेस के तहत अब छात्रों समेत निजी कंपनियों को अनुमति दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बहुत बड़ा सुधार किया है। हमने अच्छी अंतरिक्ष संपत्ति का निर्माण किया है, ये अब एक तरह से सभी के उपयोग के लिए खोले जा रहे हैं।