राफेल डील में रिलायंस को पार्टनर चुनने में सरकार का कोई रोल नहीं : रक्षा मंत्रालय

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): राफेल डील को लेकर देश में गरमाई सियासी आग में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने घी का काम किया है। जब से ओलांद का बयान मीडिया में आया है तभी से कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल मोदी सरकार पर हमलावर हो गए हैं। इसी बीच आज रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर इस मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ये विवाद बेवजह का है। मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने पहले भी यह बात कही है और फिर से अपनी पूर्व की स्थिति को दोहरा रही है कि रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में सरकार का कोई हाथ नहीं है। रक्षा मंत्रालय ने कहा, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद के बयान संबंधी रपट में कहा गया है कि भारत सरकार ने राफेल में डिसॉल्ट एविएशन के ऑफसेट पार्टनर के रूप में किसी खास निजी कंपनी की तरफदारी की। इसकी जांच की जा रही है। 

राफेल विमान बनाने वाली कंपनी डसाल्ट एविएशन ने भी फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद के बयान पर सफाई देते हुये कहा है कि राफेल विमान सौदे में ऑफसेट समझौते के तहत खुद उसने ही अनिल अंबानी नीत रिलायंस समूह की कंपनी को साझेदार बनाया था। डसाल्ट की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है, यह ऑफसेट समझौता रक्षा खरीद प्रक्रिया, 2016 के नियमों के तहत किया गया है। इसके तहत और मेक इन इंडिया नीति के अनुरूप डसाल्ट एविएशन ने भारत के रिलायंस समूह के साथ साझेदारी का निर्णय लिया था। यह डसाल्ट एविएशन की पसंद है और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक ट्रेपियर ने गत अप्रैल में एक साक्षात्कार में यह स्पष्ट भी किया था। वक्तव्य में आगे कहा गया है कि इस साझेदारी के परिणामस्वरूप फरवरी 2017 में एक संयुक्त उपक्रम डसाल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड बनी। डसाल्ट एविएशन और रिलायंस ने फाल्कन और राफेल विमानों के कलपूर्जे बनाने के लिए नागपुर में एक सयंत्र बनाया है। यह वक्तव्य भारत में फ्रांस के राजदूत एलेक्जेन्डर जिग्लेर ने ट्विटर पर पोस्ट किया है। नागपुर को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां हवाई अड्डे के निकट जमीन उपलब्ध है जो सीधे एयरपोर्ट रनवे से जुड सकती है। वैमानिकी गतिविधियों के लिए यह शर्त जरूरी है। 

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि उन्होंने अनिल अंबानी के साथ मिलकर भारतीय सैन्य बलों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की। गांधी ने ट्वीट कर कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अनिल अंबानी ने भारतीय सैन्य बलों पर 130 हजार करोड़ रुपए की सर्जिकल स्ट्राइक की। मोदीजी से आपने हमारे शहीद सैनिकों के रक्त का अपमान किया है। आपको शर्म आनी चाहिए। आपने भारत के भरोसे के साथ धोखा किया है। 

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