मानव चेतना श्रृंखला बनाकर पंजाबी मातृभाषा का सत्कार करने का दिया संदेश 

सरकारी-प्राईवेट दफ्तरों, स्कूलों में भाषा को बनता कानूनी अधिकार देने की मांग 
मोगा (दविंदर पाल सिंह):
पंजाबी भाषा पसार भाईचारा की ओर से अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मौके सरकारी एवं प्राईवेट दफ्तरों और स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनता कानूनी अधिकार देने के लिए लंबी मानवीय भाषा चेतना श्रृंखला बनाई गई।

आज पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया गया। इस संबंधित पंजाबी भाषा पसार भाईचारा जिला मोगा की ओर से आज पंजाबी भाषा प्रति आम लोगों में सत्कार पैदा करने और राज्य सरकार का पंजाबी राज्य भाषा एक्ट 1967 को पूर्ण रूप में लागू करके सभी सरकारी और प्राईवेट दफ्तरों और स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनता कानूनी अधिकार देने की तरफ ध्यान खींचने के लिए एक लंबी मानवीय भाषा चेतना श्रृंखला बनाई गई, जिसमें सैंकड़ों की संख्या में पंजाबी भाषा प्रेमियों ने शमूलियत की और अपने हाथों में तख्तियों पकड़ कर और पहने हुए कपड़ों पर माटो लिख कर शाम 4 बजे से 5 बजे तक एक घंटे के लिए शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया।

इस मौके पंजाबी भाषा भाईचारा जिला मोगा के कनवीनर महिंद्र पाल लंूबा ने बताया कि आज पंजाबी भाषा भाईचारे के आह्वान पर आज पंजाब के सभी जिला व तहसील हेड क्वार्टरों पर भाईचारे की इकाइयों की ओर से ऐसे जागरूकता समागम किये जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार प्रति नाराजगी का प्रगटावा करते कहा कि सरकार की ओर से पंजाबी राज्य भाषा एक्ट 1967 अभी तक पूर्ण रूप में लागू नहीं किया गया, जिस कारण सरकारी दफ्तरों की चि_ियां अभी भी अंग्रेजी में जारी हो रही हैं, प्राईवेट स्कूलों में पंजाबी बोलने पर पाबंदी जारी है और दसवीं तक पंजाबी को अनिवार्य विषय के तौर पर लागू नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि 1967 के बाद अभी तक कानून की किताबों का पंजाबी अनुवाद नहीं हो सका और अदालतों के फैसले पंजाबी में नहीं लिखे जा रहे, जिस कारण इंसाफ की प्रक्रिया को समझना और इंसाफ लेना आम लोगों की पहुंच से बाहर है। उन्होंने कहा कि आम लोगों को पंजाबी भाषा को लागू करवाने के लिए जिम्मेदार होने की जरूरत है और जहां भी कहीं पंजाबी भाषा को नजरअंदाज किया जा रहा है, वहां आवाज बुलंद करने की जरूरत है। इस मौके प्रसिद्ध लेखक अमर सूफी, सुरजीत सिंह बराड, बेअंत कौर गिल, गुरमीत कडियालवी, कृष्ण प्रताप, चरनजीत गिल और अमर घोलिया ने समूचे पंजाबी भाईचारे को मातृभाषा दिवस की बधाई देते कहा कि भाईचारे की कोशिशों सदका कई सरकारी विभागों में कामकार पंजाबी में होना शुरू हो गया है, जैसे पिछले धार्मिक शिक्षा सचिव कृष्ण को कानूनी नोटिस भेजा गया तो उन्होंने तुरंत अपना काम पंजाबी में करना शुरू कर दिया। इसी तरह बिजली विभाग समेत ओर भी कई विभागों खिलाफ कानूनी लडाई लडी जा रही है पर राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही, जिस कारण भाईचारे की जिम्मेदारियों बढ़ी हुई हैं। उन्होंने राज्य सरकार से तुंरत पंजाब राज्य भाषा एक्ट 1967 को पूर्ण रूप में लागू करने की मांग की। उन्होंने बताया कि बीते कल मोगा इकाई की ओर से भाषा पसार भाईचारे की ओर से अपनी, पिछले दो साल की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों बारे तैयार की गई पुस्तक दूसरी गदर लहर का बिगुल रिलीज की गई और जल्द ही मोगा शहर में एक पब्लिक लाइबरेरी स्थापित करने का प्रोगराम बनाया गया है। इस मौके प्रसिद्ध समाज सेवीं गुरसेवक सन्यासी, हरजिंदर सिंह चुगावा, दविंदरजीत गिल, सुखदेव सिंह बराड, भवनदीप सिंह पुरबा, इकबाल सिंह खोसा, मनमोहन सिंह चीमा, तरसेम सिंह बराड, कंवलजीत महेसरी, जसविंदर सिंह बिट्टू, चमकौर सिंह बराड, रमन मान कालेके, कुलदीप सिंह, सरबजीत कौर माहला, हरप्रीत सिंह, जसवंत सिंह, राजिंदर कौर सोढी, सोनीं, चमकौर सिंह, प्रेम कुमार, भागवंती पुरबा, अमरप्रीत कौर आदि शामिल थे।