धरने पर ममता

वर्षों पहले हुए शारदा चिटफंड घोटाले की छानबीन हेतु देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर कोलकाता के पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करने गई सीबीआई के अधिकारियों और कर्मचारियों को प. बंगाल की पुलिस ने कार्रवाई करने से रोका भी और अधिकारियों को कुछ घंटे पुलिस थाने में बिठाने के बाद छोड़ भी दिया।

सीबीआई की कार्रवाई के विरुद्ध व कोलकाता पुलिस कमिश्नर के समर्थन में प. बंगाल की मुख्यमंत्री पुलिस कमिश्नर के घर भी पहुंचीं और अब मोदी सरकार पर प्रदेश सरकार के विरुद्ध धक्केशाही का आरोप लगाकर धरने पर बैठ गई हैं। ममता के साथ उनके मंत्री भी धरने पर हैं और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर ममता का समर्थन कर रहे हैं। ममता को विपक्षी दलों का समर्थन भी मिल रहा है।

समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट अनुसार जब सीबीआई की टीम कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के लाउडन स्ट्रीट स्थित आधिकारिक निवास पर तलाशी व पूछताछ के लिए पहुंची तो मामला नाटकीय ढंग से गरमा गया। सीबीआई टीम को डिटेन कर थाने ले जाया गया। कोलकाता पुलिस ने निजाम पैलेस और साल्टलेक के सीजीओ कांप्लेक्स स्थित सीबीआई दफ्तरों को घेर लिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तुरंत पुलिस आयुक्त के आवास पहुंचीं और वहीं पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद मोदी-शाह की जोड़ी पर राजनीतिक अत्याचार का आरोप लगाते हुए धर्मतल्ला के मेट्रो चैनल में बेमियादी अनशन करने का ऐलान करके चली गईं। तीन घंटे बाद सीबीआई अफसरों को छोड़ा गया और सीबीआई के दफ्तरों से भी पुलिस हट गई। हालांकि कुछ देर बाद ही सीआरपीएफ जवानों ने इन दफ्तरों को सुरक्षा में ले लिया। शारदा चिटफंड घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में सीबीआई को सौंपी थी। करीब 2500 करोड़ रुपए के इस घोटाले के आरोपियों के तृणमूल नेताओं से संबंध रहे हैं। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक पुलिस आयुक्त के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण हैं। नोटिस भेजने पर भी वह पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए।

गौरतलब है कि शारदा चिटफंड घोटाला 2013 में सुर्खियों में आया था। घोटाले में 10,000 करोड़ रुपए की जालसाजी का आरोप है। कोलकाता पुलिस प्रमुख राजीव कुमार ने 2013 में रोज वैली घोटाले और शारदा चिटफंड घोटाले की जांच करने वाली पश्चिम बंगाल पुलिस की एसआईटी टीम का नेतृत्व किया था। सीबीआई का कहना है कि एसआईटी जांच के दौरान कुछ लोगों को बचाने के लिए अहम सुबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई या उन्हें गायब कर दिया गया। इसी सिलसिले में सीबीआई पश्चिम बंगाल कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार से पूछताछ करना चाहती थी। शारदा चिटफंड ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरैक्टर सुदीप्त सेन ने कई स्कीमों के जरिए बंगाल और उड़ीसा के करीब 14 लाख निवेशकों से पैसा जुटाया और उन्हें ठगा। ईडी अब तक शारदा की छह संपत्तियों की कुर्की कर चुका है, जिसकी कीमत 500 करोड़ रुपए है। एक्टर से राजनीतिज्ञ बने तृणमूल कांग्रेस के सांसद मिथुन चक्रवर्ती ब्रांड एंबेसडर के तौर पर शारदा कंपनी से लिए गए 1.20 करोड़ रुपए पहले ही ईडी को सौंप चुके हैं।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि सारे मामले में वर्तमान मोदी सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। शारदा घोटाले की शिकायतें कांग्रेस सरकार के समय हुई थीं और सीबीआई को जांच के आदेश सर्वोच्च न्यायालय ने दिए थे। तब से लेकर अब तक कानूनी कार्रवाई चली आ रही है। लेकिन भावी चुनावों को देखते हुए ममता बनर्जी इस सारे मामले को राजनीतिक रंग देकर लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैं। प. बंगाल की मुख्यमंत्री भूल रही हैं कि शारदा घोटाला करने वालों ने प. बंगाल के लोगों के साथ ही हेराफेरी कर उनका धन लूटा है।

ममता के समर्थन में आए राहुल गांधी, केजरीवाल, अखिलेश व चंद्र बाबू नायडू अन्य सभी को लगता है कि सब मिलकर मोदी का विरोध कर भावी चुनावों में लाभ की स्थिति में रहेंगे। मामला एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय में सीबीआई लेकर गई है। वह सरकारी कार्रवाई करने के लिए दोषियों को सजा देने की मांग कर रही है। सीबीआई अगर अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने में सफल रही और न्यायालय दोषियों को सजा सुना देता है तब ममता व उनके सहयोगी दलों के नेताओं की क्या स्थिति होगी? मोदी सरकार का विरोध करने व विशेषतया नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को कटघरे में खड़ा करने के हो रहे प्रयासों से सभी नेताओं व दलों की छवि को एक बड़ा झटका लगेगा। कानून से ऊपर तो कोई भी नहीं है। देश एक संविधान के नीचे चल रहा है और ममता धरना देकर अपने को संविधान व कानून से ऊपर होने की कोशिश कर रही हैं जोकि गलत है। राजनीति में विरोध करने की भी एक मर्यादा होती है, उस मर्यादा में रहकर ही एक-दूसरे का विरोध करना चाहिए। मुख्यमंत्री का धरने पर बैठकर केंद्र सरकार विरुद्ध बोलना देश की व्यवस्था को चुनौती देना ही है। ममता ने जिस तरह की रणनीति को अपनाया है वह ममता व उनके समर्थकों को अंधेरी गली की ओर ले जा रही हैं।

समय रहते अगर तृणमूल कांग्रेस की सर्वेसर्वा और प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता आत्मचिंतन कर धरना समाप्त नहीं करतीं तो उनके राजनीतिक कद व भविष्य पर बुरा प्रभाव ही पड़ेगा।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।