माल्या को ले महाभारत

बैंकों से हेराफेरी करने व लाखों-करोड़ों रुपए का गबन करने के आरोप में देश से भागे शराब कारोबारी विजय माल्या ने गत दिनों लंदन में ब्यान दिया था कि वह देश छोडऩे से पहले वित्तमंत्री अरुण जेटली से मिलकर आया था। विजय माल्या के उपरोक्त ब्यान को आधार बनाकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया है कि संसद में जेटली और माल्या की मुलाकात को कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने देखा था। राहुल ने आरोप लगाया कि जेटली से सलाह के बाद ही माल्या भागे हैं। उन्होंने वित्त मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। राहुल ने कहा कि जेटली को बताना चाहिए कि उन्होंने माल्या से मुलाकात को अब तक क्यों छिपाया। पुनिया ने जेटली को चुनौती दी कि सेंट्रल हॉल की फुटेज देखी जाएं। यदि वह गलत साबित होते हैं तो राजनीति छोड़ देंगे, अन्यथा जेटली को छोडऩी होगी। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने किंगफिशर एयरलाइन को दिए बैंक लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाते हुए आरोप लगाया था कि पूरा गांधी परिवार वास्तव में माल्या और किंगफिशर की मदद कर रहा था। भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि अब साफ हो गया है कि माल्या देश के 9000 करोड़ रुपए लूटकर वित्तमंत्री से मिलता है और फरार हो जाता है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि विजय माल्या उन्हें बतौर सांसद संसद में ही मिला था और उसने बैंकों से लेन-देन के मामले में तथ्य रखने की कोशिश की तो मैंने कहा था कि वह यह तथ्य बैंकों के सम्मुख रखे यहां नहीं। इसके अलावा न तो कुछ कहा और न ही मिला हूं। वित्त मंत्री अरुण जेटली के समर्थन में मोदी सरकार भी आ गई है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि माल्या और राहुल की जुगलबंदी से झूठ बोला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार के दबाव में तत्कालीन पीएम डा. मनमोहन सिंह ने नियमों को ताक पर रख माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस की मदद की। भाजपा ने पुरानी वीडियो क्लीपिंग दिखाई। इसमें तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह आर्थिक संकट में फंसी किंगफिशर की मदद करने का बयान देते दिख रहे हैं।

वित्तमंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके सहयोगी मोदी सरकार पर दबाव बनाने की ही कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी और उनके कांग्रेसी सहयोगियों का यह कोई पहला प्रयास नहीं है इससे पहले सेना के लिए खरीदे जाने वाले राफेल हवाई जहाजों को लेकर मोदी सरकार पर आरोप लगाकर कांग्रेस जनों ने मोदी सरकार को घेरने का प्रयास किया था। राहुल और उनके सहयोगियों की मुश्किल यह है कि 2019 के लोकसभा चुनावों का दबाव उन पर हावी हो रहा है और इसी कारण गहराई में जाने बिना वह मोदी सरकार को घेरने का प्रयास करते हैं, जिसका दबाव कुछ दिनों बाद अपने आप टूट जाता है। तथ्यों के सामने आने के बाद राहुल गांधी और उनके सहयोगी चुप्पी धारण कर लेते हैं।

अरुण जेटली से विचारिक मतभेद होना अलग बात है लेकिन उन पर यह आरोप लगाना कि माल्या को भगाने में सहायक रहे हैं ऐसा कोई मानने वाला नहीं है। जेटली स्वयं प्रसिद्ध कानूनविद हैं और कानून का सम्मान करने वाले हैं। वह कोई ऐसा काम करेंगे जिससे उनकी और देश की छवि खराब हो इस बारे सोचना भी मुश्किल है।

जेटली ने माल्या को ले अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और राहुल माल्या के दिए ब्यान को आधार बना अपनी राजनीति कर रहे हैं। राहुल व उनके सहयोगियों का विजय माल्या पर भरोसा करना ही उनकी राजनीतिक परिपक्वता पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। विजय माल्या लाखों-अरबों रुपए के घोटाले करने का आरोपी है। एक आरोपी अपनी जान बचाने के लिए कुछ भी कह सकता है, लेकिन उसके कहे पर कितना विश्वास किया जाए इस पर तो हर सतर्क व सूझवान व्यक्ति सोचता है। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष और उनके सहयोगी आंख बंद कर माल्या के कहे को स्वीकार कर रहे हैं, जबकि भाजपा द्वारा प्रस्तुत दिए तथ्य यही दर्शाते हैं कि राहुल गांधी व उनके सहयोगियों की स्थिति शीशे के महलों में रहने वालों के समान है। दूसरों पर पत्थर फैंकने से पहले उन्हें अपने अन्दर झांकने की आवश्यकता है।

भाजपा व कांग्रेस दोनों देश के बड़े राजनीतिक दल है, इन दोनों को माल्या को लेकर महाभारत छेडऩा गलत ही है। माल्या पर जो भी भरोसा करेगा उसे समझ लेना चाहिए कि वह कमजोर आधार पर खड़ा है और किसी समय भी उसका आधार धराशाही हो सकता है। 

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।