महंत रामभज हत्या मामले में बड़ा खुलासा, 5 गिरफ्तार 

12:35 PM Jul 07, 2020 |

कैथल (बबल कुमार): यहां के नजदीकी सांघन गांव के महंत रामभज दास की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। महंत रामभज दास ने एक अन्य मंदिर के महंत राघव दास शास्त्री की हत्या की पांच लाख रुपये में सोनीपत के हिस्ट्रीशीटर गैंग को सुपारी दी थी। एडवांस पैसों पर सहमति नहीं बनी, इसलिए बदमाशों ने महंत रामभज दास को ही पीट-पीट कर मार डाला। महंत रामभज दास हत्याकांड व लूटपाट मामले की गुत्थी को सुलझाते हुए सीआईए-1 व कलायत पुलिस द्वारा 5 आरोपी गिरफ्तार कर लिए गये। सभी आरोपी सोमवार को अदालत में पेश किया, जहां 3 आरोपियों को न्यायालय के आदेशानुसार न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि शेष 2 आरोपियों का व्यापक पूछताछ के लिए अदालत से 9 जुलाई तक 3 दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया।  

एसपी शशांक कुमार ने बताया कि महंत रामभज दास एक अन्य मंदिर के महंत राघव दास शास्त्री को मारना चाहता था। उसने इसके लिए पांच लाख रुपये में सोनीपत के हिस्ट्रीशीटर गैंग को सुपारी दी थी, लेकिन सुपारी के एडवांस पैसों को लेकर गैंग व रामभज दास में सहमति नहीं बन पाई। इस पर बदमाशोंं रामभज दास को पीट-पीट कर मार डाला। एसपी ने बताया कि मृतक महंत रामभज दास शहर के प्राचीन हनुमान मंदिर पर कब्जा करने की साजिश रच रहा था। रामभज दास बेलरखा (नरवाना) के अपने साथी कुलबीर की माध्यम से बदमाश अजय मेहरा और सोनीपत के गैंगस्टरों के संपर्क में था। प्राचीन हनुमान मंदिर के महंत राघव दास 92 वर्ष के हैं। रामभज दास ने उनकी हत्या की सुपारी पांच लाख रुपये में दी थी। रामभज दास बदमाशों के संपर्क में रहता था। प्राचीन हनुमान मंदिर की 60-70 करोड़ करोड़ रुपये की संपत्ति पर रामभज दास की नजर थी।

रामभज दास ने कम आयु में ही श्रृंगी आश्रम की गद्दी संभाल ली थी। चकाचौंध ने उसका दिमाग खराब कर दिया था। गांव टटियाना के महंत छवि राम दास का नाम भी एफआइआर में शामिल था, लेकिन उनका मामले से कोई लेना-देना नहीं मिला। रामभज दास छविराम दास को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता था। राघव दास के बाद गद्दी पर कहीं वह न बैठ जाएए इसलिए रामभज दास ने मरने से पहले छवि राम दास का नाम लिया था।