धौलासिद्ध प्रोजेक्ट के लिए भूमि का सरकारी नियमों के अनुसार हो अधिग्रहण : राणा

हमीरपुर (उत्तम हिन्दू न्यूज): हमीरपुर और कांगड़ा के किसानों की हजारों कनाल बेशकीमती भूमि जो कि धौलासिद्ध विद्युत प्रोजेक्ट की जद में आ रही है। उसके अधिग्रहण की सही प्रक्रिया न अपनाकर धौलासिद्ध प्रोजेक्ट प्रबंधन किसानों के शोषण पर अमादा हो गया है। इस प्रक्रिया में आम गरीब किसान को डरा, धमका कर उनकी भूमि को हड़पने का जबरन प्रयास किया जा रहा है। इस अहम मसले को लेकर किसानों की संघर्ष कमेटी राजेंद्र राणा को मिली है। राजेंद्र राणा ने इस मामले पर उन्हें उनका हक दिलाने का आश्वासन भी दिया है। संघर्ष समिति ने राणा से गुहार लगाते हुए कहा है कि अब वह ही उनका एक मात्र सहारा हैं। क्योंकि इस मामले में सरकार उनकी एक नहीं सुन रही है। राणा ने किसानों को आश्वासन देते हुए कहा है कि वह आम किसानों से जुड़े इस मुद्दे को विधानसभा सत्र में उठाएंगे। क्योंकि वह किसानों के शोषण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

इस मामले पर राणा ने जारी प्रैस नोट में कहा है कि संघर्ष समिति की बात सुनने व तमाम दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि किसान सही हैं और उनकी भूमि का अधिग्रहण सरकारी नियम के अनुसार होना जरुरी है। राणा बोले कि संघर्ष कमेटी द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि एसजेवीएन प्रबंधन जो इस प्रोजेक्ट को बनाएगा के अधिकारी सरकारी नियमों के अनुसार भूमि का अधिग्रहण न करके अपनी मनमर्जी के मुताबिक गरीब किसानों पर दबाव बनाकर भूमि को खरीद रहे हैं। किसानों ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि अधिकारियों के इस दबाव, प्रभाव में कुछ किसान इस जबरी प्रक्रिया के झांसे में आकर अपनी जमीन दे भी चुके हैं। 

राणा बोले कि किसानों को न्याय दिलाने के लिए वह अपनी पार्टी कांग्रेस के साथ किसी भी हद तक किसानों की मदद के लिए जाएंगे। राणा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की कुल जद में 338 हैक्टेयर भूमि आने की बात कही गई है जिसमें से 58 हैक्टेयर भूमि का मालिक वन विभाग है जबकि निजी किसानों की भूमि 252 हैक्टेयर है, राज्य सरकार की भूमि 28 हैक्टेयर है। इस प्रोजेक्ट की जद में कुल 18 पंचायतों की भूमि पर से किसानों का विस्थापन होगा जिनमें से 10 पंचायतें जिला हमीरपुर व 8 पंचायतें जिला कांगड़ा की हैं। 44 गांवों के परिवार इस विस्थापन में प्रभावित रहेंगे जिनमें से हमीरपुर के 30 गांव व कांगड़ा के 14 गांव मुख्य तौर पर प्रभावित होंगे। कुल मिलाकर 713 परिवारों की भूमि इस प्रोजेक्ट की जद में आएगी लेकिन हैरानी यह है कि एसजेवीएन सरकारी नियमों के अनुसार भूमि का अधिग्रहण न करके इन किसानों को डरा-धमका कर जमीनों की रजिस्ट्री करवा रही है।

जब स्थानीय जनता ने भूमि की इस जबरन खरीद का विरोध किया तो सरकार ने इसके लिए एक कमेटी गठित कर दी जिसके अध्यक्ष जिलाधीश कांगड़ा व जिलाधीश हमीरपुर हैं। राणा ने कहा कि हैरानी यह है कि हजारों करोड़ का राजस्व कमाने वाले एसजेवीएन की चिंता में सरकार ने सैंकडों परिवारों को बर्बाद करने की छूट दे दी है। जबकि नियमानुसार इस भूमि का अधिग्रहण होना है और इसके सर्किल रेट का 4 गुना मुआवजा किसानों को मिलना है। यह भारत सरकार का नियम भी है और किसानों का हक भी है। राणा ने कहा कि हमीरपुर और कांगड़ा की भूमि पर लगने वाले धौलासिद्ध प्रोजेक्ट का स्वागत है लेकिन किसानों से अन्याय किसी भी सूरत पर बर्दाश्त नहीं होगा।