सुरक्षाकर्मियों को मिले आधुनिक तकनीक का ज्ञान, परिवार को बेहतर सुविधाएं: नायडू

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने सुरक्षा के वर्तमान वातावरण में सुरक्षाकर्मियों के लिए आधुनिक तकनीकी ज्ञान एवं सतत प्रशिक्षण को अपरिहार्य बताया है और दुर्गम स्थानों पर तैनात जवानों, अधिकारियों और उनके परिवारों की सुविधाओं में संतोषजनक सुधार किये जाने की जरूरत पर बल दिया है।

नायडू ने गुरुग्राम के कादरपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की अकादमी में अधिकारियों के 50वें बैच के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।  नायडू ने कहा, आज कल के सुरक्षा माहौल में, सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक पर आधारित निगरानी, सुरक्षा उपकरण और शस्त्र उपलब्ध कराये जाने चाहिए तथा उसके लिए सतत प्रशिक्षण होना चाहिए। उन्होंने सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर बल देते हुए कहा कि सरकार ने केन्द्रीय बलों के आधुनिकीकरण के लिए आवंटन बढ़ाया है। इस आवंटन का कारगर उपयोग हो और बल अपने अधिकारियों जवानों को नयी तकनीक उपलब्ध करायें उसमें प्रशिक्षित करे।

देश की आंतरिक सुरक्षा में सीआरपीएफ की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने में सीआरपीएफ का योगदान सर्वविदित है। वे सीआरपीएफ के सुरक्षा कर्मी ही थे जिन्होंने आतंकवादियों को मारकर संसद भवन और सांसदों की रक्षा की। उप राष्ट्रपति ने कहा कि स्‍वतंत्रता के पश्‍चात देश के एकीकरण से लेकर उत्तर पूर्व के अलगाववाद और पंजाब के उग्रवाद को समाप्‍त करने में सीआरपीएफ ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी बल ने जम्‍मू-कश्‍मीर में आतंकवाद तथा नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्‍यवस्‍था की स्थिति बनाए रखने में तथा आम नागरिकों और युवाओं के साथ शांति और सौहार्द स्‍थापित करने में अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि इस बल का एक सराहनीय मानवीय चेहरा है। नागरिकों की सहायता के लिए चलाया रहा बल का सिविक एक्शन प्रोग्राम समाज में पुलिस बल के कार्यों की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए यह उत्तम प्रयास है। राष्‍ट्र के विभिन्‍न हिस्‍सों में सीआरपीएफ को जहां भी तैनात किया गया है, इसने सामान्‍य जनमानस का भरोसा और विश्‍वास जीता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ सीआरपीएफ ने अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर संयुक्‍त राष्‍ट्र शांति सेना के तौर पर कोसोवो और लाइबेरिया में शांति स्‍थापना में अपना योगदान दिया है।

दुर्गम स्थानों पर तैनात सुरक्षाबलों की स्थिति सुधारने की आवश्यकता पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “ मैं यह भी अपेक्षा करूंगा कि सरकार और बल का शीर्ष नेतृत्व दुरूह, दुर्गम स्थानों पर तैनात हमारे सुरक्षा कर्मियों के लिए सुविधाओं में सतत सुधार करे। आवश्यक हो तो इसके लिए डीआरडीओ जैसे रक्षा शोध संस्थानों से सहायता लें। बल 

का नेतृत्व, हमारे सुरक्षा कर्मियों के परिजनों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं के लिए विशेष प्रयास करे। हाल के वर्षों में सीआरपीएफ से अधिकारियों तथा सुरक्षा कर्मियों द्वारा स्वत: सेवा निवृत्ति या त्यागपत्र पर चिंता व्यक्त करते हुए नायडू ने कहा कि बल के शीर्षस्थ नेतृत्व को इस विषय पर गंभीर चिंतन करना चाहिए। आशा है कि सरकार बल में पदोन्नति के अवसर बढ़ाने और रिक्त स्थानों को शीघ्र भरने का प्रयास करेगी।

उप राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को 1971 के भारत-पाक युद्ध का स्मरण कराते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा,“ देश के इतिहास में 16 दिसंबर एक महत्वपूर्ण तिथि है। आज ही के दिन 1971 में पाकिस्तानी सेनाओं ने भारतीय सेना की वीरता के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। आज आप भी राष्ट्र निष्ठा और कर्तव्यनिष्ठा की उसी गौरवशाली परंपरा में सम्मिलित हो रहे हैं।” उन्होंने सीआरपीएफ में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की प्रशंसा करते हुए दीक्षांत परेड में भाग लेने वाली चार महिला अधिकारियों को विशेष बधाई दी। 

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