खून का बदला खून

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में जिस तरह दिन-दिहाड़े आतंकवादी गुट जैश-ए-मोहम्मद ने कार बम हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को शहीद किया है उससे देश में गम की लहर के साथ-साथ आक्रोश भी है। भारत का प्रत्येक नागरिक यही चाहता है कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को भी उसी भाषा में जवाब दिया जाए जिसे वह समझते हैं। भारतीयों की भावनाओं को समझते हुए ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जहां पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापिस लिया है, वहीं सुरक्षा बलों को भी पूरी छूट देने की घोषणा की है तथा आतंकवादियों और उनके समर्थकों को बड़ी कीमत चुकाने की चेतावनी भी दी है।

आतंकवादियों द्वारा यह 2016 में हुए उड़ी हमले के बाद सबसे भीषण आतंकवादी हमला है। जैश ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उसके अफजल गुरु स्क्वायड के आदिल अहमद उर्फ वकास ने इसे अंजाम दिया है। पुलवामा के ही रहने वाले आदिल ने अफगानिस्तान के तालिबानी आतंकी ट्रेनर से प्रशिक्षण लिया था। वह पिछले साल ही जैश में शामिल हुआ था। हमले से पहले उसका रिकॉर्ड वीडियो भी सामने आया है। सीआरपीएफ के करीब 2500 कर्मी 78 वाहनों के काफिले में जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे। यह काफिला जम्मू से तड़के साढ़े 3 बजे चला था और इसे सूर्यास्त तक श्रीनगर पहुंचना था। दोपहर बाद करीब सवा 3 बजे जब यह काफिला दक्षिण कश्मीर में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतीपोरा के पास पहुंचा, तो अचानक एक कार सामने से तेजी से काफिले में घुसी। कार चला रहे आतंकी ने सीआरपीएफ जवानों की एक बस को टक्कर मार दी और इसके साथ ही जोरदार विस्फोट हुआ।

2001 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर कार बम हमला हुआ था और उसमें 41 लोग मारे गए थे। 2016 में उड़ी सैन्य अड््डे पर जैश आतंकवादियों ने हमला किया था और उसके बाद ही भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी।

गौरतलब है कि खुफिया एजेंसियों ने 8 फरवरी को सूचना दी थी कि दक्षिण कश्मीर में कार बम हमला हो सकता है। लेकिन कहीं न कहीं आंतरिक स्तर पर गलती हुई और उसका खामियाजा सारे देश को भुगतना पड़ा। जैश-ए-मोहम्मद के अफजल गुरु और अन्य आतंकवादी संगठनों व उनके मुखियों को पाक अधिकृत कश्मीर एक पनाहगाह के रूप में मिला हुआ है। जहां उन्हें पाकिस्तानी सेना के साथ-साथ अब चीन का भी समर्थन मिलने लगा है। आतंकी संगठनों विरुद्ध भारत द्वारा अतंरराष्ट्रीय मंच पर उठाए हर कदम का विरोध चीन भी लगातार करता चला आ रहा है। पाकिस्तान और चीन दोनों का लक्ष्य भारत के विकास के रास्ते बढ़ते कदमों को रोकना ही है। पाकिस्तान आर्थिक कठिनाई के दौर से गुजर रहा है, इसलिए वह भारत को आर्थिक रूप से मजबूत होते देख घबरा रहा है। चीन भारत को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है, इसलिए भारत का विरोध कर रहा है। पाकिस्तान और चीन के नापाक इरादों को भारत सरकार क्या प्रत्येक भारतीय जानता है, लेकिन इसके बावजूद जब पुलवामा जैसा दिल दहला देने वाला कांड होता है तब प्रत्येक भारतीय के मुंह से निकलता है खून का बदला खून से लेने का वक्त आ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिन भावनाओं को प्रकट किया है उससे यह तो स्पष्ट हो रहा है कि भारत आतंकियों व आतंकियों के समर्थकों के विरुद्ध एक निर्णायक कदम उठाने की तैयारी में है। पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान जिस तरह भारत के विरुद्ध आतंकियों का इस्तेमाल कर रहा है उसको देखते हुए अब भारत को भी एक ऐसा ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान तथा उसका संरक्षण व समर्थन प्राप्त आतंकी दोबारा भारत की पावन धरती पर हिंसा फैलाने की हिम्मत न कर सकें।

भारत की आत्मा और शरीर पर जितने जख्म आतंकी कर चुके हैं उनको देखते हुए अब प्रत्येक भारतीय चाहता है कि ऐसा अब और न हो और यह तभी संभव है जब भारत आक्रमक रुख अपनाकर खून के बदले खून की नीति पर अमल कर निर्णायक कदम उठाएगा। शहीद हुए जवानों को सलाम और उनके परिवारों के साथ हमदर्दी जताते हुए कहना चाहेंगे कि पूरा देश दु:ख की इस घड़ी में उनके साथ है और शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।     

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।