कश्मीरी आतंकी

कश्मीर घाटी आज आतंकवाद के कारण देश व दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई  है। पाकिस्तान द्वारा समर्थित व संरक्षण प्राप्त आतंकियों के सफाये के लिए पिछले समय भारत ने आप्रेशन 'ऑलआऊट' शुरू किया था जिसके अच्छे परिणाम आने शुरू हुए हैं। पाकिस्तान अब स्थानीय युवाओं को आतंकवाद की राह पर चलाने की भरपूर कोशिश में है। पिछले समय में स्थानीय युवाओं के नाम भी सामने आये थे और कुछ तो पुलिस व सेना के साथ हुई मुठभेड़ में मारे भी गये। पाकिस्तान तथाकथित कश्मीरी नेताओं के संपर्क में हमेशा से है और उनके माध्यम से देश व दुनिया में कश्मीर घाटी को लेकर अपनी बात करता है। इग्लैंड में तो आजकल कश्मीर मुद्दे को लेकर पाकिस्तान चर्चा कर रहा है। पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। अपने कमजोर पहलू से पाकिस्तान के लोगों का ध्यान हटाने के लिए वह कश्मीर को मुद्दा बना सीमा पर तनाव बनाने के साथ-साथ घाटी में भ्रम व भ्रांतिया भी फैलाता है, अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल भी करता है।

पाकिस्तान की उपरोक्त नीति से भ्रमित हुए कुछ स्थानीय युवा भी अलगाव व आतंकवाद की राह पर निकल पड़ते हैं। ऐसे युवाओं को मुख्यधारा से जोडऩे के लिए समय-समय पर भारत कदम उठाता रहा है। अब अलगाव व आतंक की राह से वापस मोडऩे के लिए भारत सरकार ने स्थानीय कश्मीरी आतंकियों के लिए एक नई आत्मसमर्पण नीति बनाई है। अगर यह नीति लागू हो जाती है तो इस नीति के तहत हथियार डालने वाले आतंकवादी को नया नाम दिया जाएगा। अब वे 'त्यागकर्ता' कहलाएंगें और बदले में उन्हें 6 लाख रूपयों का फिक्स्ड डिपॉजिट मिलेगा जिसका लॉक इन पीरियड 3 साल होगा। यही नहीं इस नीति के तहत उन्हें रोजगार मुहैया करवाने की भी तैयारी हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को कम करने के लिए राज्य के गृह विभाग ने आतंकवादियों के लिए आत्मसमर्पण नीति का मसौदा तैयार किया है। सरकार के एक निर्देश के बाद, सरकार की नीति ने राज्य में आतंकवाद को कम करने के लिए आतंकवादी रैंकों से अधिक बचाव को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी पुरानी आत्मसमर्पण नीति को बदल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में 250 आतंकवादी गिरफ्तार भी किए भी गए, लेकिन अन्य 200 से अधिक अभी सक्रिय हैं और उनमें से अधिकांश स्थानीय युवक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल आतंकवादियों द्वारा 100 से अधिक युवाओं को भर्ती भी किया गया था। नीति अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले आतंकवादी को 'त्यागकर्ताÓ कहा जाएगा। जो आत्मसमर्पण करेंगे, वे केवल मंडलायुक्तों, जिला मजिस्ट्रेटों, शीर्ष पुलिस अधिकारियों और सैन्य परिचालन इकाइयों के प्रमुखों के सामने हथियार डालेंगे। जानकारी के मुताबिक, 'त्यागकर्ताÓ को 5 से 6 लाख की एक फिक्स्ड डिपॉजिट मिलेगा जिसे 3 साल के पहले भुनाया नहीं जा सकेगा। गृह विभाग की मसौदा नीति को अगर पढ़ें तो वह कहती है- इसका उद्देश्य उन आतंकवादियों को एक अवसर प्रदान करना है जो हिंसा के मार्ग पर चल रहे हैं। यह नीति विशेष रूप से आर्थिक पुनर्वास के उद्देश्य से है, जिससे वे सामान्य जीवन जी सकें और समाज की प्रगति में योगदान कर सकें।' हालांकि 'त्यागकर्ता' के लिए नौकरियों का प्रबंध करना राज्य सरकार के जिम्मे डाला जाएगा जबकि नगदी की सहायता केंद्र सरकार करेगी। सरकार की उपरोक्त नीति स्वागत योग्य है। कश्मीर के युवाओं को विशेषतया वो जो आतंक की राह पर आगे बढ़ गए हैं उन्हें वापस मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली नीति घाटी में एक सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होगी। सरकार के साथ घाटी के लोगों को भी युवाओं को मुख्यधारा से जोडऩे के लिए प्रेरित करना चाहिए। एक लोकतांत्रिक देश में अपनी बात हिंसात्मक ढंग से कहना या विरोध करना कभी भी जायज करार नहीं दी जा सकती। जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट अंग है, इसके विकास के लिए केंद्र सरकार ने हजारों-करोड़ों रुपया खर्च किया है और कर भी रही है। अभी-अभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी घाटी के विकास के लिए हजारों-करोड़ों रुपए देने की घोषणा की है। घाटी में जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आई है केंद्र की सरकार व भारत के लोग घाटी के लोगों के साथ खड़े दिखाई दिए हैं।पाकिस्तान की शह पर आतंक व अलगाववाद की राह पर चलने वाले युवाओं को रोकने के लिए सरकार द्वारा चलाई 'त्यागकर्ता' योजना आने वाले समय में कितनी कामयाब होती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन सरकार द्वारा उठाया उपरोक्त कदम सराहनीय है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।