अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व को भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग योग को अपनाने व विश्व योग दिवस मनाने का आह्वान किया था। मोदी के प्रयासों से भारत के प्रस्ताव को तीन महीनों में ही विश्व के 127 देशों का समर्थन मिल गया और संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दे दी। पिछले पांच वर्षों में योग के प्रति विश्वभर में रुचि बढ़ी है। आज के इस अति प्रतियोगिता भरे दौर में इंसान तनाव मुक्त होकर जीवन जीना चाहता है और योग आप को यही प्रदान करता है। योग केवल शारीरिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह शरीर के साथ मानसिक विकास भी करता है।

मानव ने परमात्मा से प्रार्थना करते हुए निरोगी काया मांगी है, लेकिन आज इंसान शारीरिक व मानसिक रोगों से घिरा हुआ है। चिंताग्रस्त इंसान के जीवन को भौतिक रूपी सुख-सुविधा चूहे की तरह कुतरते चले जा रहे हैं। इसका मूल कारण एक ही है कि इंसान ने जीवन में केवल और केवल भौतिक सुख-सुविधा को ही प्राथमिकता दी। हमारी शिक्षा का लक्ष्य अब केवल धन कमाकर भौतिक सुख-सुविधा प्राप्त करना ही रह गया है। आज देश में विशेषतया पंजाब में प्रतिदिन सैकड़ों-हजारों की तदाद में युवा विदेश जाने के लिए अपना सब कुछ लुटाने को तैयार हैं। मां-बाप भी अपनी जमीन-जायदाद व सब कुछ दांव पर लगाकर बच्चे को बाहर भेजना चाहते हैं। लक्ष्य केवल भौतिक सुख-सुविधा प्राप्त करना ही है।

ध्यान देने की बात यह है कि जीवन के दो पक्ष हैं, एक भौतिक व दूसरा नैतिक पक्ष। भौतिक पक्ष में दुनियावी सुख-सुविधा जैसे बंगला, गाड़ी तथा इस प्रकार की अन्य सुविधाएं आ जाती हैं। आज अधिकतर दुनिया इनकी प्राप्ति के लिए ही संघर्षरत है। एक-दूसरे को पछाडऩे के चक्कर में जीवन का नैतिक पक्ष कमजोर होता जा रहा है। इसलिए समाज में अपराध बढ़ रहे हैं और परिवार भी टूट रहे हैं। अतीत में जाएं तो पायेंगे कि हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव के नैतिक पक्ष को अधिक महत्व दिया और इंसान को अपने चरित्र पर अधिक ध्यान देने तथा धैर्य रखने के लिए प्रेरित किया। हमारे ऋषि-मुनि जानते थे कि व्यक्ति जीवन का असली आनंद तभी उठा सकता है जब वह मानसिक व आत्मिक रूप से मजबूत व स्वस्थ होगा।

व्यक्ति को मानसिक व आत्मिक रूप से मजबूत करने के लिए योग की राह दिखाई। योग का अंतिम लक्ष्य तो आत्मा को परमात्मा के साथ जोडऩा है। यह तभी संभव है जब इंसान भौतिक सुख-सुविधा से दूरी बनाते हुए अपने मन को अंदर की ओर ले जाकर अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति व एकाग्रता के साथ उस परमात्मा की ओर ध्यान लगाता है, तब वह शरीर और मन के कष्टों को समभाव से लेने में समर्थ होता है। उपरोक्त सब योग के माध्यम से ही संभव है। योग केवल मात्र शारीरिक प्रक्रिया नहीं यह आपके दिलो-दिमाग से जुड़ी प्रक्रिया है। जब इंसान योग को अपनाने लगता है, उसकी जीवनशैली में अनुशासन के साथ-साथ धैर्य, पवित्रता व दृढ़ इच्छाशक्ति भी उसका अंग बन जाती है।

योग अपनाने से आप जीवन के असली लक्ष्य को समझ सकेंगे। आप को खुशी और आनंद में क्या अंतर है उसका एहसास होने लगेगा। अपनी प्रवृति को जब आप प्रकृति के साथ जोडऩे में सफल हो जाएंगे तो आपका जीवन आनंदमय व मंगलमय हो जाएगा। हमारे ऋषि-मुनियों ने जीवन के दोनों पक्षों को समझा। इंसान की सुख-सुविधा के प्रति कमजोरी को देखते हुए एक संतुलित जीवन जीने के लिए योग की राह हमें दिखाई।

सदियों की गुलामी के कारण हम अपने गौरवमयी अतीत से टूट चुके थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से योग के माध्यम से हम फिर अपनी जड़ों से जुड़े भी रहे हैं और देश व दुनिया को संदेश भी दे रहे हैं कि आत्मिक विकास बिना तनावमुक्त जीवन संभव नहीं। योग अपनाकर हम अपना आत्मिक व शारीरिक विकास कर सकते हैं। योग अपनाइये और शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहिए।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।