लोगों के सहयोग से 424 गाँवों को स्व एकांतवास में रहने के लिए किया प्रेरित

04:11 PM Mar 31, 2020 |

चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज): पंजाब की रोपड़ पुलिस ने महामारी कोविड के खतरे को भांपते हुुये कोरोना को फैलने से रोकने के लिए लगभग 70 फीसदी गाँवों को स्वेच्छा से एकांतवास में रहने के लिए प्रेरित किया है। रोपड़ जिला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वप्निल शर्मा ने आज यहां बताया कि तीन अति संवेदनशील इलाकों से घिरे जिले को अब तक सुरक्षित रखने के लिए 1200 वालंटियरों ने कारगर काम किया है। इस इलाके में विदेश से लौटे 440 लोग क्वारंटाइन में हैं तथा 14 संदिग्धों के नमूनों में से 11 पहले ही नेगेटिव पाए गए हैं। तीन अन्य के टैस्ट नतीजों का इन्तज़ार है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए पंचायतों, युवा क्लबों और वलंटियरों की सहायता ली जा रही है क्योंकि जि़ले के 424 गाँवों की आबादी करीब 74 फीसदी है तथा लोगों को जागरूक करने में ये स्वयंसेवी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन वालंटियरों को सोशल मीडिया समूहों के जरिये नवीनतम दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा रही है, जो जिला मुख्यालयों में पुलिस वॉर रूम से चलाए जाते हैं। कर्फ्यू लगने के बाद पिछले आठ दिनों में खाने के तीस हजार से अधिक पैकेट और 17,600 पैकेट सूखे राशन के बाँटे जा चुके हैं।

शर्मा ने बताया कि हम सभी मिलकर काम कर रहे हैं, जिसमें सभी सरपंच, लम्बरदार, चौकीदार और पूर्व सैनिक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि गाँवों के गुरुद्वारे और मंदिरों ने स्वास्थ्य विभाग और सरकार की सभी हिदायतें और एडवाईजऱीज़ को लोगों तक पहुँचाने के लिए प्रभावशाली ढंग से सहायता की है।

पुलिस अधीक्षक (रोपड मुख्यालय)जगजीत सिंह ने बताया कि किसी भी समय जि़ला पुलिस कार्यालय में सूखे राशन के 500 फूड पैकेट आसानी से उपलब्ध हैं। एक पैकेट 14 भोजन तैयार करने के लिए काफ़ी है। भोजन के बारे जब भी 112 पर कोई कॉल आती है तो पुलिस की समर्पित टीमें ज़रूरतमंदों को खाने के पैकेट मुहैया करवाती हैं।

गाँव अकबरपुर के समाज सेवी गुरचरन सिंह ने कहा कि राज्य सरकार और पुलिस हमारी सहायता के लिए आ गई है। हर समस्या का हल किया जा रहा है और नागरिक पुलिस के साथ सहयोग कर रहे हैं। कुछ समस्याएँ पैदा होती हैं परन्तु हम उनको मिलकर हल करते हैं। गाँव वालमगढ़ के सरपंच जसवंत सिंह ने बताया कि राशन, सब्जियों और दवाओं वाला एक वाहन दिन में दो बार मेरे गाँव की एंट्री वाली जगह पर आता है। एमरजैंसी के मामले में हम 112 डायल करते हैं और पुलिस का प्रतिक्रिया प्रशंसनीय है।