अब 5G इंटरनेट की दुनिया में परचम लहराएगा भारत, ISRO ने सबसे ताकतवर संचार उपग्रह GSAT-30 किया लॉन्च

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक संचार उपग्रह जीसैट-30 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। यह सैटेलाइट दक्षिण अमेरिका के उत्तरपूर्वी तट पर कौरो के एरियर प्रक्षेपण तट से छोड़ा गया। इसरो का यह साल 2020 का पहला मिशन था। ऐसा कहा जा रहा है कि इस सैटेलाइट से भारत में संचार क्रांति आएगी।

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यह इनसैट सैटेलाइट की जगह काम करेगा। इससे सरकारी और प्राइवेट कंपनियों को संचार लिंक प्रदान करने की क्षमता बढ़ेगी।

इसरो ने बताया है कि GSAT-30 के कम्यूनिकेशन पेलोड को अधिकतम ट्रांसपोंडर लगाने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। सैटेलाइट का इस्तेमाल व्यापक रूप से वीसैट नेटवर्क, टेलीविजन अपलिंकिंग, टेलीपोर्ट सेवाएं, डिजिटल सैटलाइट खबर संग्रहण (डीएसएनजी), डीटीएच टेलीविजन सेवाओं के साथ जलवायु परिवर्तन को समझने और मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए किया जाएगा।

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इसका वजन करीब 3100 किलोग्राम है। यह 15 सालों तक काम करता रहेगा। इसे जियो-इलिप्टिकल ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। इसमें दो सोलर पैनल होंगे और बैटरी होगी जिससे इसे ऊर्जा मिलेगी। यह 107वां एरियन 5वां मिशन है। कंपनी के 40 साल पूरे हो गए हैं।

इसरो ने इस सैटेलाइट को 1-3केबस मॉडल में तैयार किया है जो जियोस्टेशनरी ऑर्बिट के सी और कु-बैंड से संचार सेवाओं में मदद करेगा। इसरो के अनुसार इस सैटेलाइट की मदद से टेलीपोर्ट सेवा, डिजिटल सैटेलाइट न्यूज गैदरिंग, डीटीएच टेलिविजन सेवा, मोबाइल सेवा कनेक्टिविटी जैसे कई सुविधाओं को बेहतर करने में मदद मिलेगी। कु-बैंड सिग्नल से पृथ्वी पर चल रही गतिविधियों को पकड़ा जा सकता है।

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एरियन स्पेस ने बयान जारी कर कहा है कि भारत के जी-सैट30 सैटेलाइट को गुआना स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। इससे पहले 1981 में प्रयोगात्मक उपग्रह एपल को लॉन्च किया था। एरियन स्पेस से 23 उपग्रहों की परिक्रमा चल रही है और भारत ने 24 उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए करार किया है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि महज एक उपग्रह की लॉन्चिंग के लिए पूरी जीएसएलवी-एमके-3 तकनीक को अपनाने में समय लगता है। इस कारण उन देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों से संपर्क किया जाता है जो इस तरह की तकनीक से उपग्रह को लॉन्च कर रही हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी दूसरे देशों के मिशन को अपने स्पेस सेंटर से अंजाम देती हैं।