12 घंटे चली बैठक में भारत की दो टूक, फिंगर 4 से फिंगर 8 तक के इलाके से पीछे हटे चीन

09:51 AM Jul 01, 2020 |

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): लद्दाख में हिंसक झड़प के बाद भारत और चीनी सेना के बीच बातचीत का दौर जारी है। लेकिन चीन ने अभी तक अपनी पैंतरेबाजी नहीं छोड़ी है। वह मीटिंग में तो बातें मानता है लेकिन जमीनी स्तर पर वैसा कुछ नहीं करता। दूसरी तरफ भारत ने चीन को दो टूक कह दिया है कि उसे 22 जून को तय हुए प्लान के हिसाब से अपने सैनिकों को पीछे लेकर जाना ही होगा। सूत्रों के हवाले से ये जानकारी मिली है। बैठक में भारत ने फिंगर 4 से फिंगर 8 तक के क्षेत्र से चीन को तत्काल पीछे हटने को कहा है।

भारत-चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच मंगलवार को तीसरे दौर की लंबी बातचीत हुई। सूत्रों का कहना है कि भारत की तरफ से गलवान घाटी तथा अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ पैंगोंग में फिंगर 4 से फिंगर आठ तक के इलाके से चीनी सेना को तत्काल पीछे हटने को कहा गया है। इस बीच भारत सरकार ने 59 चीनी ऐप बैन करके उसपर प्रेशर बनाना शुरू कर भी दिया है।

भारत और चीन के बीच मंगलवार को भी बातचीत हुई। यह बातचीत का तीसरा दौर था जिसमें 14 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट-जनरल हरिंदर सिंह और चीन की तरफ से मेजर जनरल लुई लिन शामिल थे। दोनों के बीच ऐसी बातचीत 6 और फिर 22 जून को हुई थी। मंगलवार की मीटिंग चुशूल-माल्डो बॉर्डर पर भारत की तरफ हुई थी। बैठक सुबह 11 बजे शुरू होकर देर रात तक चली।

मिली जानकारी के मुताबिक बातचीत में सैनिकों को पीछे हटाने की बात हुई है, बावजूद इसके चीन ने 3,488 किलोमीटर में फैली LAC के अलग-अलग हिस्सों पर सैनिक बढ़ाए हैं। ऐसा लद्दाख के अलावा सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी किया गया है। इसे देखते हुए भारत ने भी अपनी तरफ से तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

भारत की तरफ से कहा गया है कि 22 जून की मीटिंग में जो कुछ तय हुआ था उस हिसाब से चीन को पीछे जाना चाहिए। इसमें दोनों तरफ से सैनिकों में कम से कम 3 किलोमीटर की दूरी पर बात हुई थी। मंगलवार की मीटिंग में भारत ने कहा कि पीएलए पैंगोंग झील और गलवान घाटी से अपने जवानों को पीछे करे जिससे फिर 15 जून जैसा कुछ न हो। सूत्र का कहना है कि अभी चीन की तरफ से ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा। पीछे हटने की जगह चीन सैनिक बढ़ा रहा है। ऐसे में स्थिति सामान्य होने में कुछ महीने लग सकते हैं।