Monday, January 21, 2019 06:54 AM

मिशन ‘गगनयान’ के लिए भारत-फ्रांस ने मिलाए हाथ, 2022 तक भेजने का है लक्ष्य

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : भारत और फ्रांस मानव को अंतरिक्ष में भेजने के मिशन ‘गगनयान’ पर मिलकर काम करेंगे। दोनों देशों ने गुरुवार को इस संबंध में एक समझौते पर दस्तखत किए। बता दें कि भारतीय अनुसंधान संगठन (इसरो) का यह पहला मानवयुक्त यान मिशन होगा। करार पर दस्तखत होने के मौके पर फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस के अध्यक्ष ज्यां येव्स ली गॉल ने कहा, दोनों देशों ने इस परियोजना के लिए एक कार्यकारी समूह गठित किया।

उन्होंने कहा, दोनों देश जिस स्थितियों में एक साथ काम करने जा रहे हैं, उन्हें परिभाषित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। गॉल ने कहा, एमओयू के तहत पहला कदम अंतरिक्ष औषधि पर काम करने को लेकर विशेषज्ञों का आदान-प्रदान करना है। हम इसकी पहचान करने के लिए अपने विशेषज्ञों को भेज रहे हैं कि असल में हम एक साथ क्या काम करने जा रहे हैं। हमारे पास फ्रांस में अंतरिक्ष अस्पताल जैसी सुविधाएं हैं, तो हम इसमें भी सहयोग करेंगे। इसरो की योजना अपने अंतरिक्ष यात्रियों के जरिए बेहद कम गुरुत्वाकर्षण पर प्रयोग करने की है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से 2022 तक अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने की घोषण की थी। इस मिशन के साथ ही भारत, रूस, अमेरिका और चीन के बाद अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा। फ्रांस और भारत के बीच मानव मिशन में सहयोग पर सहमति फ्रांस के राष्ट्रपति एमैन्युअल मैक्रां की मार्च में हुई नई दिल्ली यात्रा के दौरान बनी। इसी दौरान दोनों देशों ने अंतरिक्ष में सहयोग पर संयुक्त दृष्टिपत्र (विजन) जारी किया था। इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि संयुक्त दृष्टिपत्र एक व्यापक समझौता था। जबकि गुरुवार को हुआ समझौता ज्ञापन खासतौर से मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन को लेकर है। दोनों देशों की योजना मंगल ग्रह, शुक्र ग्रह और क्षुद्र ग्रह पर भी काम करने की है। 
 
इसरो ऐसे छोटे प्रक्षेपण यानों के निर्माण पर काम कर रहा है, जो 500 से 700 किलो तक के उपग्रहों को धरती की सतह से 500 किलोमीटर पर स्थापित कर सके। इसरो प्रमुख सिवन ने गुरुवार को बेंगलुरु में आयोजित स्पेस एक्सपो 2018 के उद्घाटन सत्र में कहा कि एजेंसी देश में छह स्थानों पर इनक्यूबेशन सेंटर खोलने की योजना बना रही है। सिवन ने कहा, छोटे उपग्रहों की मांग बढ़ रही है। छोटे उपग्रहों का इस्तेमाल अनेक तरीकों से संचार उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इस बाजार पर पकड़ बनाने के लिए इसरो छोटे उपग्रह के लिए प्रक्षेपण यान विकसित करने की प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि इसरो को प्रतिवर्ष 50 से 60 प्रक्षेपण यानों की आवश्यकता होगी। उन्होंने उद्योग से आगे आने और इसरो के भार को साझा करने का अनुरोध किया।
 

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