Monday, September 24, 2018 05:15 AM

बेअदबी की घटनाएं और बादल

पंजाब में बीते समय में हुई बेअदबी की घटनाओं को लेकर आई जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट को लेकर पंजाब विधानसभा में हुई बहस के दौरान विपक्षी अकाली दल बादल ने तो बहिष्कार किया लेकिन कांग्रेस सहित सभी अन्य दलों ने अकाली दल बादल और उसके अध्यक्ष सुखबीर बादल और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रमजीत मजीठिया को ही अपने निशाने में रखा। 8 घण्टे के करीब चली बहस में बरगाड़ी, बहिबल और कोटकपूरा में बादल सरकार के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और उसके बाद सिख संगतों विरुद्ध हुई पुलिस कार्रवाई जिसमें दो सिख नौजवानों की मौत हो गई थी, से संबंधित मुकद्दमे को सीबीआई से वापिस लेकर राज्य सरकार द्वारा बनाई जाने वाली एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को देने का फैसला सर्वसम्मति से हुआ। मुख्यमंत्री ने इस बहस का जवाब देते हुए सदस्यों को कहा कि वह सदन के सदस्यों को भरोसा दिलाते हैं कि वह इस जांच के कार्य को समयबद्ध कराएंगे और बेअदबी मामले के दोषियों को मिसाली सज़ाएं दी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने सदन में बोलते हुए इस बात पर हैरानी प्रकट की कि जिस अवसर पर राज्य में बरगाड़ी व कोटकपूरा में गोलियां चलाई गईं उस समय राज्य में कई अन्य स्थानों पर भी ऐसे धरने चल रहे थे। लेकिन शांतिपूर्वक तरीके से गुरबाणी का जाप करने वाले सिखों पर ही क्यों गोली चलाई गई। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की यह पुरानी आदत है कि कोई कार्य करने के बाद जिम्मेवारी निचले अधिकारियों पर डाल दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा मैंने चुनावों से पहले राज्य के लोगों को यह वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद धार्मिक पुस्तकों की बेअदबी के इन मामलों में निष्पक्ष और अच्छी तरह से जांच करवाएंगे। कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने स. बादल को एक बुजदिल और झूठा इंसान बताया और कहा कि जितना स. बादल द्वारा राज्य का नुक्सान किया गया है इतना शायद किसी अन्य राजनीतिज्ञ द्वारा नहीं किया गया। उन्होंने स. बादल को आप्रेशन ब्लू स्टार के लिए भी जिम्मेवार ठहराया और कहा कि जब केन्द्र से कोई समझौता पूरा होने वाला था तो स. बादल ने हमेशा उसको साबोताज किया। उन्होंने यह भी कहा कि स. विक्रमजीत मजीठिया में मजीठिया परिवार वाला कोई गुण या किरदार दिखाई ही नहीं देता। कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि स. बादल और स. सुखबीर सिंह बादल में से कोई भी बरगाड़ी या बहबल कलां के वास्तव हालात का पता लगाने के लिए नहीं गये। मुख्यमंत्री ने कहा कि जस्टिस रणजीत सिंह द्वारा किए गए कार्य की प्रशंसा की जानी चाहिए जिन्होंने बहुत थोड़े समय में काफी मेहनत करके रिपोर्ट को तैयार किया व ज्यादा से ज्यादा पक्षों को जांच के घेरे में लाया।

विधानसभा परिसर में शिअद-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायकों के समानांतर सत्र में पत्रकारों से बातचीत में सुखबीर बादल ने कहा कि कैप्टन अमरेन्द्र सिंह सरकार एक भी ऐसा मुद्दा या मामले की शिनाख्त नहीं कर पाई जिससे पिछली शिअद-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर उंगली उठाई जा सके। बादल ने कहा कि रिपोर्ट में केवल परोक्ष आक्षेप, अनुमान गढ़ी बातें हैं। यह पूरी तरह से गैर-न्यायिक रिपोर्ट है। बादल ने कहा कि इसी रिपोर्ट में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आरएस खटड़ा समेत सरकारी मशीनरी की बेअदबी मामले में सच बाहर लाने के ईमानदार और मेहनती प्रयासों के लिए तारीफ की गई है। शिअद नेता ने दावा किया कि रिपोर्ट में बेअदबी के मामलों में पुलिस और पिछली सरकार की तरफ से नियुक्त स्पैशल टास्क फोर्स के कार्य की तारीफ ही की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोशिश पूरी की गई थी कि बेअदबी के मामलों का लिंक पिछली सरकार से जोड़ा जाए और यह कांग्रेस पार्टी, उसकी सरकार व आयोग के साथ मिलकर शिअद को सिखों में बदनाम करने की साजिश थी। असल लक्ष्य सिख समुदाय को नेता विहीन बनाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटिया ड्रामे के लेखक, निर्माता, निर्देशक आदि कैप्टन अमरेन्द्र सिंह, सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त बावजा, बलजीत सिंह दादूवाल तथा सेवानिवृत न्यायाधीश रंजीत सिंह थे। पंजाब विधानसभा में हुई उपरोक्त बहस को जिस किसी ने टीवी पर देखा होगा उसको स्पष्ट हो गया होगा कि यह सारी बहस स. प्रकाश सिंह बादल स. सुखबीर सिंह बादल और बिक्रमजीत मजीठिया की घेराबंदी कर उनके राजनीतिक अस्तित्व को समाप्त करने हेतु ही है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रति सभी सम्मान रखते हैं, चाहे कोई पक्ष में बैठा है या विपक्ष में। गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले को आधार बनाकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल व जिस तरह के भाव बादल परिवार के प्रति प्रकट किए गए है उससे स्पष्ट है कि पंजाब में नफरत पर आधारित राजनीति की जड़ें काफी फैल चुकी हैं। लोकतंत्र में राजनीतिक विचारों को ले मतभेद होना स्वाभाविक भी है और लोकतंत्र की सफलता व जनहित में भी है। लेकिन जब मतभेद की जगह मनभेद हो जाए तब जनहित पीछे रह जाता है और मात्र शतरंज की बाजी की तरह एक-दूसरे को मात देना ही मुख्य लक्ष्य रह जाता है। कै. अमरेन्द्र सिंह अपने उपरोक्त लक्ष्य में क्षणिक तौर पर सफल दिखाई दे रहे हैं। उनके सहयोगियों व अन्य दलों के विधायकों ने बादलों प्रति तत्काल फैसला ले घोषणा करने को कहा भी लेकिन एक परिपक्व राजनीतिज्ञ का परिचय देते हुए कै. अमरेन्द्र सिंह ने सुनी सबकी लेकिन अपने मन की बात को सार्वजनिक न करते हुए मात्र करने का भरोसा ही दिया।

बेअदबी के मामले दुर्भाग्यपूर्ण हैं लेकिन जन साधारण यह मानने को अभी भी तैयार नहीं कि बादल परिवार व बादल सरकार इन मामलों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित है। सत्ता में बैठे लोग तो आग बुझाने का काम करते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का एहसास होता है कि अगर नफरत की आग फैली तो उसमें सत्ताधारी भी झुलस जाएंगे। यह बात आज के सत्ताधारियों को भी समझनी चाहिए। पंजाब विधानसभा में जिस तरह धर्म के नाम पर भावनाएं भड़काने का कार्य किया गया है वह पंजाब के लिए हितकर नहीं। कांग्रेस अगर यह सोचकर कि धर्म के नाम पर अकालियों को पछाड़कर पंजाब में स्थाई तौर पर वापसी कर सकती है तो गलत सोच रही है। अकाली दल और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का एक अपना इतिहास है और वर्तमान में पंजाब की राजनीति का दोनों एक अटूट अंग हैं। इन दोनों को नजरअंदाज करने की बजाय कांग्रेस को अपनी विचारधारा को मजबूत करने की आवश्यकता है। कांग्रेस अपने को एक धर्म निरपेक्ष दल मानती है तो कांग्रेस को उसी विचार को ले पंजाब में राजनीति करनी चाहिए। परिवारवाद या वंशवाद से तो कांग्रेस भी राष्ट्रीय स्तर पर ग्रस्त है। गांधी परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी राज कर रहा है। आज राहुल गांधी के नेतृत्व में ही कांग्रेस मोदी सरकार को चुनौती देने का प्रयास कर रही है।

पुत्र मोह का आरोप स. प्रकाश सिंह बादल पर लगाने से पहले कांग्रेस सोनिया व राहुल के बारे भी तो अपनी स्थिति स्पष्ट करें।  धर्म जोडऩे का काम करता है और नानक नाम लेवा तो सरबत के भले का संदेश देते हैं। लेकिन पंजाब विधानसभा में जो कुछ कहा गया उससे शायद ही किसी का भला हो। इसलिए गुरु नानक नाम लेवों को चिंता व चिंतन करने की आवश्यकता है।     

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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