चेन्नई में पानी को लेकर हाहाकार, स्कूल हुए बंद तो ग्रामीणों को टोकन देकर बांटा जा रहा पानी

चेन्नई (उत्तम हिन्दू न्यूज): तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में इन दिनों पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। हालत यह हो चुके हैं कि एक ओर जहां आईटी कंपनियां अपने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कह रही हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में टोकन देकर पानी बांटा जा रहा है। पानी की किल्लत से शहर के स्कूल भी जूझ रहे हैं। पानी का खर्च कम करने के लिए कई निजी स्कूलों को बंद तक करना पड़ा है। 

ईस्ट तंबरम के क्राइस्ट किंग हायर सेकंडरी स्कूल में 2600 से ज्यादा स्टूडेंट पढ़ते हैं। स्कूल ने छठी क्लास से लेकर आठवीं तक के बच्चों को दो दिन का ब्रेक दिया है। स्कूल परिसर में स्थित 6 बोरवेल सूख गए हैं। स्कूल की जरूरतों को पूरी करने के लिए रोजाना दो टैंकरों के जरिए 24 हजार लीटर पानी मुहैया कराया जाता है। 

चेन्नै में पानी के चार मुख्य स्रोतों में से एक पुंडी जलाशय लगभग सूख चुका है। इस जलाशय की क्षमता 3,231 मिलियन क्यूबिक फीट है। इसमें अब महज 0.7 फीसदी पानी ही बचा है। आसपास के लोग बच्चों के साथ अब इस जलाशय के कीचड़ में मछलियों की तलाश के लिए जुट रहे हैं। परिजनों के काम-धंधे पर चले जाने के बाद बच्चे तपती दुपहरी में इस सूखे जलाशय में बैठे मिलते हैं।

क्रोमपेट इलाके में स्थित निजी स्कूल आरकेडी फोमरा विवेकानंद विद्यालय की ओर से छात्रों के अभिभावकों को मोबाइल पर मेसेज भेजकर जानकारी दी गई है कि स्कूल में हाफ डे रहेगा। टेक्स्ट मेसेज में लिखा है, 'पानी की किल्लत की वजह से 24 जून से स्कूल की सभी क्लासेज सुबह 8 बजे से दिन में 12.15 बजे तक चलेंगी।' स्कूल प्रिंसिपल इंद्रा शंकर ने इस पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा, 'यह टॉप मैनेजमेंट का फैसला है।' 

चेन्नै में जल संकट की चुनौती का सामना कर रहे कई स्कूलों ने अस्थायी रूप से किंडरगार्टन सेक्शन (छोटे बच्चों से जुड़े) बंद कर दिए हैं। स्कूलों की दलील है कि बच्चे भीषण गर्मी को सहन नहीं कर पाएंगे। वेस्ट माम्बलम के जयगोपाल स्कूल में भी ऐसा ही कदम उठाया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री केए सेंगोट्टयन ने कहा, 'स्टूडेंट्स को पानी मुहैया कराना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है और कुछ स्कूल वॉटर टैंकर का इंतजाम करने के लिए पैसा इकट्ठा कर रहे हैं।' 

पलायन को मजबूर हो रहे लोग
पानी की किल्लत की वजह से चेन्नई के कुछ उपशहरी इलाकों में लोग पलायन को भी मजबूर हैं। लोग किराये पर शहर के उन इलाकों में शिफ्ट हो रहे हैं जहां बोरवेल अभी भी कुछ पानी दे रहे हैं या जहां टैंकर सर्विस बेहतर है। 2 हफ्ते पहले अपार्टमेंट की तलाश शुरू किए के. हरि कहते हैं, 'अगर रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए एक बूंद भी पानी न हो तो कोई क्या कर सकता है? आप बेहतर जगह की तलाश करेंगे।' जिन इलाकों में पानी की स्थिति थोड़ी-बहुत ठीक-ठाक है, वहां के अपार्टमेंटों का किराया भी काफी बढ़ चुका है। 

हाई कोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार 
मद्रास हाई कोर्ट ने इसी हफ्ते पानी के संकट से निपटने के लिए समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाने की वजह से राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु सरकार को सूबे खासकर चेन्नै में जारी जल संकट से निपटने के लिए एहतियाती कदम नहीं उठाने को लेकर फटकार लगाई। मेट्रोवॉटर द्वारा फाइल की गई 8 पेज की रिपोर्ट से असंतुष्ट हाई कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कड़ी टिप्पणी की कि संकट के वक्त राज्य का वॉटर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट कर क्या रहा था।