राज्य के हर लक्ष्य की प्राप्ति में वित्त विभाग का अहम योगदान: मनप्रीत सिंह बादल

-वित्त मंत्री ने प्रैस कॉन्फ्ऱेंस के दौरान बताया; मौजूदा वित्त वर्ष में पंजाब ने एक बार भी ओवरड्राफ्ट नही किया
-वित्त विभाग ने नवीनतम प्रोग्राम, प्रोजैक्ट और कई सुधार किये लागू

चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज): वित्त मंत्री पंजाब स. मनप्रीत सिंह बादल ने आज यहाँ पंजाब भवन में प्रैस कॉन्फ्ऱेंस के दौरान कहा कि सरकार के प्रत्येक लक्ष्य की प्राप्ति में वित्त विभाग का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर अहम योगदान होता है। इस तरह हर प्राप्ति वित्त विभाग के साथ जुड़ी होती है। चाहे वैश्विक आर्थिकता को कोविड की महामारी ने प्रभावित किया है परन्तु वित्तीय तंगीयों के बावजूद पंजाब सरकार ने अपने मुलाजिमों की तनख़्वाह में कोई कटौती नहीं की बल्कि पैंशनों और मुलाजिमों को वेतन का समय पर भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस महामारी ने विश्व स्तर पर आर्थिकता में रुकावट पैदा की है और समाज का हर वर्ग प्रभावित हुआ है परन्तु पंजाब ने इस वित्त वर्ष के दौरान एक बार भी ओवरड्राफ्ट की सुविधा नहीं ली बल्कि विकास कार्यों के लिए फंड की कोई कमी नहीं आने दी गई।

वित्त विभाग की तरफ से चार सालों के दौरान किये गए विभिन्न सुधारों पर प्रकाश डालते हुए स. बादल ने कहा कि मौजूदा सरकार की तरफ से और अतिरिक्त राजस्व स्रोत जुटाने के लिए विभिन्न प्रयास किये गए हैं, जिनमें 200 रुपए प्रति महीना विकास टैक्स लागू करना शामिल है, जिससे साल 2018-19 में 94.24 करोड़ रुपए और 2019-20 में 138.07 करोड़ रुपए राजस्व एकत्रित हुआ है। इसके अलावा वाहनों पर सोशल सुरक्षा सरचार्ज लगाया गया, जिससे साल 2018-19 में 56 करोड़ और 2019-20 में 153.39 करोड़ रुपए एकत्रित हुए, जिसका प्रयोग सामाजिक सेवाओं सम्बन्धी लाभ प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली ड्यूटी 13 फ़ीसदी से 15 फीसदी की गई; शहरी सम्पत्ति की रजिस्ट्रेशन पर स्टैंप ड्यूटी को 9 फीसदी से 6 फीसदी करके तर्कसंगत बनाया गया, जिससे राजस्व में 4.48 फीसदी (2017-18) और 7.61 फीसदी (2018-19) का विस्तार हुा है। इसी तरह ग़ैर-कर राजस्व सम्बन्धी ओर भी कई प्रयास किये गए।

वित्त मंत्री ने कहा कि खर्चों को तर्कसंगत बनाने के लिए राज्य सरकार की तरफ से किये प्रयासों के अंतर्गत 470 सरकारी कार्यालयों को निजी इमारतों से सरकारी/अर्ध सरकारी इमारतों में तबदील किया गया। इसके इलावा अनुसूचित जातियों, गैर एससी-बीपीएल और बीसी उपभोक्ताओं की खास श्रेणियों के लिए घरेलू बिजली सब्सिडी को तर्कसंगत बनाया और सेवामुक्ती की आयु के बाद सेवाकाल में वृद्धि को रद्द किया जिससे नौजवानों को रोजगार मिल सके। इसके साथ ही पंजाब सरकार में या इसके अदारों में नयी भर्ती/नियुक्ति के लिए नया वेतनमान पेश किया गया।

वित्तीय सुधारों की बात करते हुये वित्त मंत्री ने कहा कि समर्पित कर्ज प्रबंधन यूनिट के द्वारा मजबूत कर्ज प्रबंधन और नकदी प्रबंधन के इलावा कंसौलीडेटड सिंकिंग फंड में 972 करोड़ रुपए के निवेश से राज्य को साल 2017-18 में 10.75 करोड़ रुपए, साल 2018 -19 में 21.70 करोड़ रुपए और साल 2019-20 में तकरीबन 5 करोड़ रुपए की बचत हुई, जिसके निष्कर्ष के तौर पर राज्य मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान एक दिन भी ओवरड्राफ्ट पर नहीं गया।

स. मनप्रीत सिंह बादल ने बताया कि योग्य प्रशासन और डिजिटल सुधारों की वजह से सरकार की कार्यकुशलता में और सुधार और पारदर्शिता आने के अलावा खजाने पर पड़ रहा वित्तीय बोझ घटा है। इसके अंतर्गत 01/04/2020 से एनआईसी की तरफ से तैयार किये सॉफ्टवेयर आई.एफ.एम.एस. को लागू किया गया और ई-कुबेर के साथ जोडऩे के कारण राज्य के खजाने में उपलब्ध रकम की स्थिति पता लगता रहता है और इस कार्य में बैंकों की भूमिका खत्म हुई। इसी तरह ई-रिसीट पोर्टल के साथ राज्य के निवासियों और सरकार के बीच घरेलू ऑनलाइन लेन-देन की सेवा मुहैया करवाई गई। एच.आर.एम.एस. पोर्टल के द्वारा मुलाजिमों के वेतनों के बिल और ई-सर्विस बुक तैयार की जाती हैं, जिसको आई-एच.आर.एम.एस. ऐंड्रायड एप के द्वारा कर्मचारी भी देख सकते हैं। इसके अलावा राज्य सरकार की तरफ से व्हीकल मैनेजमेंट सिस्टम भी तैयार किया गया है, जिस पर पंजाब के सभी विभागों और अदारों की सरकारी गाडिय़ों के विवरण दर्ज हैं।