Thursday, November 15, 2018 04:02 PM

अटल के अमर विचार

ठन गई मौत से ठन गई
मौत की उम्र क्या? तीन पल भी
नहीं,
जिन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं
मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं
लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरू
प्यार इतना परायों से
मुझे मिला 
न अपनों से बाकी 
है कोई गिला
अटल बिहारी वाजपेयी के मौत को लेकर उपरोक्त भाव तब पैदा हुए थे जब न्यूयार्क में वह अपने आप्रेशन के लिए गए थे और मौत उनके सिर पर मंडरा रही थी। जीवन और मृत्यु को लेकर अटल जी ने एक अन्य कविता में इस प्रकार कहा था 
जो कल थे,
वे आज नहीं है,
जो आज हैं,
वे कल न होंगे,
होने, न होने का क्रम
इसी तरह चलता रहेगा,
हम हैं, हम रहेंगे,
यह भ्रम भी सदा पलता रहेगा।
पंजाब का आंगन जब 1980 के दशक में आतंकवाद के कारण लहूलुहान हो रहा था। तब कवि हृदय अटल बिहारी वाजपेयी से यह भाव प्रकट हुए कहे
खून क्यों सफेद हो गया?
भेद में अभेद हो गया,
बंट गए शहीद, गीत कट गए,
कलेजे में कटार गड़ गई,
दूध में दरार पड़ गई।
भारतीय राजनीति के शिखर पर पहुंचने वाले अटल जी हृदय से कितने नम्र थे यह उनकी प्रभु से की विनती से पता चलता है।
मेरे प्रभु!
मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना
गैरों को गले न लगा सकूं।
जीवन यात्रा के अंतिम पलों को याद करते अटल जी का कवि हृदय ने इस तरह कहा था 
अंतिम यात्रा के अवसर पर 
विदा की वेला में, 
जब सबका साथ छूटने लगता है, 
शरीर भी साथ नहीं देता, 
तब आत्मग्लानि से मुक्त
यदि कोई हाथ उठाकर यह कह सकता है
कि उसने जीवन में जो कुछ किया, 
सही समझकर किया,
किसी को जानबूझकर चोट पहुंचाने के लिए नहीं,
सहज कर्म समझकर किया
तो उसका अस्तित्व सार्थक है,
उसका जीवन सफल है।
जीवन के उपरोक्त सत्य को समझते हुए अटल जी ने राजनीतिक जीवन में किसी का जान बूझकर दिल नहीं दुखाया है। सत्य कहने से भी नहीं डरते थे। स्वार्थ प्रेरित मनुष्य को लेकर अटल जी ने जो कहा वह आज सारा विश्व कह रहा है।
(मनुष्य) अपनी रक्षा के लिए
औरों के विनाश के सामान जुटाता है
आकाश को अभिशप्त
धरती को निर्वसन
वायु को विषाक्त
जल को दू्षित करने में संकोच नहीं करता।
पर्यावरण को सम्भालने के लिए आज सारा विश्व चिंतित है और प्रदूषण को रोकने के लिए संघर्षरत हैं लेकिन समस्या का समाधान तो स्वार्थ को त्यागने में है। अटल जी ने 1950 के दशक में भारतीय राजनीति में कदम रखा था। अपने कर्म से, अपनी वाणी और कलम से अटल बिहारी वाजपेयी ने जो देश को दिया उसके लिए देश उनका हमेशा ऋणी रहेगा। ... अटल मृत्यु के साथ अटल जी अंतिम सांसों तक लड़ते रहे। अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की राजनीति में जो छाप छोड़ी है उसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। आजादी के बाद की पीढ़ी के लिए वह हमेशा प्रेरणा के स्त्रोत रहेंगे। अपनी मां भूमि को समर्पित और इसके प्रति अथाह प्रेम रखने वाले अटल जी ने हिन्दुत्व में विश्वास रख जो जीवन जिया वह भावी पीढिय़ों का मार्गदर्शन करता रहेगा। अटल जी आज हमारे बीच नहीं रहे लेकिन अपने कर्म से हमेशा के लिए अमर हो गए हैं। अटल जी के जाने से देश को एक बड़ा झटका लगा है। अटल जी की मृत्यु से एक युग का अंत हुआ है। अटल जी की मृत्यु के साथ भारतीय राजनीति में जो कमी हुई है वह जल्द भरने वाली नहीं है। कभी भरने कहने वाली नहीं है।

परमात्मा दिवंगत आत्मा को शांति दे और देशवासियों को दुख सहने की शक्ति दे।

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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