Tuesday, September 18, 2018 11:11 PM

अवैध निर्माण

नोएडा के शाहबेरी गांव में दो इमारतों के गिरने से अभी तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। इन अभागों में एक युवा परिवार वो भी था, जिसने चंद रोज पहले यहां गृह प्रवेश किया था। इमारतों के गिरने के बाद जो तथ्य सामने आ रहे हैं उन अनुसार उपरोक्त दोनों इमारतें सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी थी और नक्शा तक पारित नहीं था। इमारत निर्माण करने वाले तीन लोगों को सरकार ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोग ही कह रहे हैं कि यहां अधिकतर इमारतें बिना नक्शे व स्वीकृति के ही बनती हैं। हादसे में मारे गए लोगों तथा उनके परिवार के साथ हमारी सहानुभूति है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मृत परिवारों की सहायता स्वरूप दो-दो लाख रुपए देने की घोषणा की है।

देशभर में सरकारी जमीनों पर कब्जा करना और वहां अवैध निर्माण का धंधा करना एक आम बात हो गई है, क्योंकि पिछले 7 दशकों में प्रदेश व देश की सरकारों ने उपरोक्त मामलों को ले उदासीनता अपनाई रखी। परिणामस्वरूप देश के प्रत्येक राज्य व उनके शहरों में अवैध निर्माण का सिलसिला बिना रोकटोक के फलता-फूलता रहा। देश की राजधानी दिल्ली में भी अवैध निर्माण को लेकर काफी हलचल हो रही है। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर यह निर्देश भी दिया है कि अधिकारियों को जहां कहीं भी अनाधिकृत निर्माण नजर आए, वे तत्काल रुकवाएं। सुप्रीम कोर्ट ने अनाधिकृत निर्माणों के खिलाफ सीलिंग अभियान में जुटे अधिकारियों को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिये। इसके अलावा, पीठ ने केंद्र से कहा कि वह अनाधिकृत निर्माणों के लिए जिम्मेदार बिल्डरों, ठेकेदारों और वास्तुकारों को ब्लैक लिस्ट करे। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने 9 जुलाई को एक मोबाइल एप शुरू किया था जिसके जरिए नागरिक दिल्ली में अवैध निर्माणों एवं अतिक्रमणों के बारे में शिकायत कर सकते हैं। मोबाइल एप पर अब तक 431 शिकायतें प्राप्त हुई हैं और 138 पर कार्रवाई की गई है। पीठ ने एप के प्रचार करने का निर्देश दिया ताकि लोगों को इसके बारे में पता चल सके।

अवैध निर्माण के विरुद्ध पंजाब में मंत्री नवजोत सिद्धू ने एक अभियान चलाया है जिसका विरोध अवैध निर्माण करता तो कर ही रहे हैं, स्वयं कांग्रेस के विधायक भी सिद्धू विरुद्ध अपना गुस्सा सार्वजनिक कर रहे हैं। मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने भी सिद्धू द्वारा दिए निर्देशों पर रोक लगाते हुए पंजाब के अवैध निर्माणों को नियमित करने के लिए मंत्रिमंडल सोच विचार कर रहा है। पंजाब में ही 700 अवैध कालोनियां हैं, कुछ के पास तो अपनी जमीन है लेकिन कुछ तो बस अवैध जमीन पर अवैध निर्माण कर जेबे भरते चले जा रहे हैं।

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अवैध कालोनियों व अवैध निर्माण को गिराने के लिए स्पष्ट आदेश देते हुए संबंधित कर्मचारियों को अवैध निर्माण को गिराने के आदेश दिए हैं। लेकिन प्रश्न फिर यही उठता है कि नगर निगम व अन्य संबंधित विभागों के तत्कालीन अधिकारियों विरुद्ध सरकार व न्यायालय सजा के मामले में क्यों चुप्पी साधे बैठे हैं। अगर नवजोत सिद्धू जैसा कोई नेता बोलता भी है तो उसको पार्टी के भीतर व बाहर विरोध झेलना पड़ता है।

एक बात तो स्पष्ट है कि शहर बड़ा हो या छोटा, उसमें अवैध रूप से जगह पर कब्जे करने वाले व बिना नक्शा पारित करवाए निर्माण बिना स्थानीय प्रशासन के संबंधित अधिकारियों के सहयोग के तो बन नहीं सकता। अवैध निर्माण या अवैध कालोनियों का राजनीतिक व प्रशासनिक संरक्षण के बिना निर्माण ही नहीं हो सकता। संबंधित विभाग के अधिकारियों की जब जेबें धन से भर दी जाती हैं तो उनके कान सुनना व आंखें देखना बंद कर देती हैं और अवैध निर्माण जारी रहता है। जब तक अवैध निर्माण को आंख-कान बंद कर चलने वाले अधिकारियों पर शिकंजा नहीं कसता तब तक अवैध निर्माण जारी ही रहेगा और जन साधारण लूटता और मरता ही रहेगा।

न्यायालय ने राह दिखाई है, अब अन्य को उस राह पर चलकर अवैध निर्माण को रोकना होगा, यह तभी संभव होगा अगर इच्छाशक्ति होगी।

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-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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