हिमाचल में बढ़ेगा एचआरटीसी चालकों का वेतन, पेंशनधारकों को मिलेगी अंतरिम राहत

शिमला (पी.सी. लोहमी) : परिवहन मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में आज यहां हिमाचल पथ परिवहन निगम के निदेशक मंडल की बैठक आयोजित की गई जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में निगम में कार्यरत चालकों के वेतन 7,700 रुपये से 8310 रुपये तक वृद्धि का निर्णय लिया गया, जिससे चालकों को अब 11 हजार 310 रुपये मासिक वेतन मिलेगा। निगम ने अनुबंध कर्मियों के ग्रेड-पे में 100 से 125 प्रतिशत की वृद्धि का भी निर्णय लिया। किथ एंड किन एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी के अंतर्गत आरक्षण को पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है, जिसे आगामी मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जाएगा। यह भी निर्णय हुआ कि ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों की मृत्यु के आश्रितों को रोजगार देने के लिए वरीयता प्रदान की जाएगी। हिमाचल पथ परिवहन निगम कार्यरत अल्पावधि एवं दैनिक भोगी कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों के समकक्ष वेतन प्रदान करने की अनुमति प्रदान की गई है। निगम के चालकों एवं परिचालकों के दुर्घटना बीमा पर भी चर्चा की गई तथा इस बारे में विभिन्न सेवा प्रदाताओं से दो सप्ताह में प्रस्ताव लिए जाएंगे। नई पेंशन योजना के अंतर्गत कर्मचारियों को निगम की ओर से सरकारी कर्मचारियों के बराबर 14 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। पीसमील वर्कर्स को अनुबन्ध आधार पर नियुक्त करने का मामला भी मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में वन टाईम रिलेक्सेशन के अंतर्गत लाने को स्वीकृति प्रदान की गई।

बैठक में परिवहन निगम द्वारा डब्ल्यूएम/टीएम के पदों की रद्द भर्ती प्रक्रिया में जिन आवेदकों ने आवेदन किया था उनके परीक्षा शुल्क को निगम द्वारा वापिस किया जाएगा। इस बैठक में निगम की वित्तीय स्थिति पर चर्चा की गई, जिसमें आगामी वर्षों में निगम की वित्तीय स्थिति को स्थिरता देने के बारे मेंयोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।


बैठक में निर्णय लिया गया कि इस वर्ष निगम 100 इलैक्ट्रिक तथा 267 अन्य बसें खरीदेगा। इलैक्ट्रिक बसों के लिए भारत सरकार तथा 267 अन्य बसें खरीदने के लिए हिमाचल सरकार से वित्तीय मदद ली जाएगी। पेंशनरों को लंबित लीव इन्कैशमेंट अदा की जाएगी, जिसके लिए सात करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बैठक में निगम के उपाध्यक्ष विजय अग्निहोत्री, प्रधान सचिव जे.सी शर्मा, प्रबंध निदेशक संदीप भटनागर, उप सचिव राजेंद्र शर्मा, शिमला के आरटीओ भूपेंद्र अत्री और गैर-सरकारी सदस्य भी उपस्थित थे।