कब तक आयेगी वैक्सीन?

नये कोरोना वायरस की वैक्सीन को शीघ्रातिशीघ्र निर्मित करने की जबर्दस्त होड़ बहुराष्ट्रीय कंपनियों में चल रही है मगर महामारी से डर के बजाय वैक्सीन के पूर्णत: निरापद और कारगर होने की आशंका अधिक है। इसलिये तमाम वैक्सीन की निर्माण प्रक्रि या में फूंक फूंक कर कदम रखा जा रहा है। मौजूदा महामारी ही जहां भयावह बनी हुई है, इस नये कोरोना वायरस की एक और लहर की संभावना से विश्व भर के प्रशासकों, नीति नियोजकों के चेहरे पर चिन्ता की लकीरें गहराने लगी हैं। मौजूदा समय में 135 तरह के वैक्सीन निर्माण अपने विभिन्न चरणों में हैं मगर केवल फार्मास्यूटिकल फर्म अस्ट्राजेनेका अब तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण की तैयारी में है। सार्स - सीओवी - 2 के जीनोम के अनावरण और जीन अनुक्र मणों के ठीक बाद से ही जनवरी 2० में वैक्सीन निर्माण की गतिविधियां वैश्विक स्तर पर शुरु हो गयी थीं। मार्च माह में मनुष्य पर वैक्सीन के पहले सुरक्षा ट्रायल शुरु हो चुके थे मगर अधिकांश वैक्सीन निर्माताओं के लिये चुनौतियाँ अभी बनी हुई हैं। यहां कुछ उन वैक्सीन की मौजूदा स्थिति का ब्यौरा दिया जा रहा है जो मनुष्य पर ट्रायल के लिए तैयार हैं।

वैक्सीन निर्माण की प्रक्रि या निम्न चरणों की होती है -

प्रीक्लीनिकल जांच
इसमें वैज्ञानिक निर्माणाधीन वैक्सीन की जांच कुछ प्राणियों जैसे चूहों या बन्दरों पर करके यह देखते हैं कि क्या परीक्षण से जानवरों में प्रतिरक्षा तंत्र सक्रि य हुआ अथवा नहीं।

फेज 1 सेफ्टी ट्रायल
वैज्ञानिक थोड़े लोगों को वैक्सीन देकर यह देखते हैं कि यह कितना सेफ है और उस डोज का भी निर्धारण करते हैं जो प्रतिरोधक क्षमता को उद्वेलित करता हो।

फेज 2 व्यापक 
इसमें बच्चों और उम्रदराज लोगों की विभिन्न टुकडिय़ों में वैक्सीन देकर अलग अलग परिणामों का आकलन किया जाता है। साथ ही पुन: यह देखा जाता है कि यह कितना सुरक्षित है और कितना डोज प्रतिरोधी क्षमता को सक्रि य बना देता है।

फेज 3 प्रभावोत्पादकता
यह सबसे महत्त्वपूर्ण चरण है जिसमें वैक्सीन का परीक्षण दो समूहों में, एक सामान्य और दूसरे कंट्रोल ग्रुप पर किया जाता है। सामान्य ग्रुप में असली वैक्सीन और कंट्रोल ग्रुप मे नकली - प्लेसेबो का इस्तेमाल होता है। एक तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है कि दोनों समूहों में संबंधित महामारी के संक्र मण की स्थिति क्या है। इससे यह निश्चय हो जाता है कि वैक्सीन कोरोना वायरस से रक्षा कर सकती है या नहीं।

अनुमोदन
प्रत्येक देश में नियामक संस्थाओं द्वारा ट्रायल परिणामों की कठोर समीक्षा की जाती है और वैक्सीन को व्यापक इस्तेमाल की इजाजत दी जाती है या रोकी जाती है मगर महामारियों के दौरान बिना औपचारिक अनुमोदन के भी वैक्सीन के आपात प्रयोग का निर्णय लिया जा सकता है।

वैक्सीन के प्रकार:

1-जेनेटिक वैक्सीन
ऐसी वैक्सीन हैं जो एक या अधिक कोरोना वायरस के जीन के जरिये रोग प्रतिरोधी क्षमता (इम्युनिटी) को उभारने में सफल होती हैं। मोडेर्ना कंपनी की मेसेंजर आरएनए वैक्सीन अभी फेज दो में है और जर्मनी की बायोटेक फाईजर और चीन की फोसन फर्मा की वैक्सीनें ट्रायल के दो चरणों फेज एक और दो में हैं। अमेरिकन कंपनी इनोवियो की वैक्सीन फेज एक में है। इम्पीरियल कालेज लंदन के शोधकर्ताओं की आरएनए वैक्सीन जो एक वाईरल प्रोटीन के जरिये इम्यून सिस्टम को उत्प्रेरित करती है, अभी प्रीक्लीनिकल स्टेज पर ही है। ट्रंप प्रशासन ने जर्मनी स्थित यूरेवैक कम्पनी को अमेरिका से उत्पादन के लिए आमंत्रित किया है। यह रैबीज वैक्सीन पर काम कर रही है।

2-विषाणु वाहक वैक्सीन
ऐसी वैक्सीन जो किसी अन्य वायरस के जरिये कोरोनावायरस जीन मनुष्य की प्रतिरक्षा प्रणाली को उद्वेलित करने में सक्षम है। ब्रितानी स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनेका और आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की वैक्सीन क्र मश: फेज दो और तीन में हैं जो चिम्पान्जी के एडिनोवायरस को वाहक (वेक्टर) के रुप में इस्तेमाल कर रही हैं। कैनसिनोबायो चीन की कंपनी की भी वैक्सीन इसी सिद्धांत पर फेज दो में है। जानसन ऐंड जानसन की वैक्सीन प्रीक्लीनिकल स्टेज पर है। नोवार्टिस स्विस कंपनी भी प्रीक्लीनिकल स्टेज पर है।अमेरिकी कंपनी मर्क इबोला के अपने अनुभव के आधार पर वैक्सीन निर्माण के प्रीक्लीनिकल स्टेज पर है।

3-प्रोटीन आधारित वैक्सीन
ऐसी वैक्सीन जो कोरोनावायरस के प्रोटीन के जरिये इम्यून रिस्पांस सक्रि य करती है, इस श्रेणी में हैं। नोवावैक्स (मेरीलैंड) प्रोटीन वैक्सीन के चरण दो तक पहुंच चुकी है। क्लोवर बायोफार्मेस्युटिकल्स और जीएसके कंपनी फेज एक में हैं।
बायर कालेज आफ मेडिसिन प्रीक्लीनिकल स्टेज पर है। पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय भी प्रीक्लीनिकल स्टेज पर है। यही स्थिति क्वींसलैंड विश्वविद्यालय आस्ट्रेलिया से संबद्ध सीएसएल और जीएसके कंपनियों के हैं। 
फ्रेंच कंपनी सनोफी की वैक्सीन भी प्रीक्लीनिकल स्टेज पर है। वैक्सार्ट की वैक्सीन एक टैबलेट के रुप में है जिसमें विभिन्न वायरस प्रोटीन हैं। इसे सीधे मुंह से लिया जायेगा मगर अभी तो यह प्रीक्लीनिकल स्टेज पर ही है।

4-समग्र वायरस वैक्सीन
इसमें एक कमजोर या निष्क्रि य किये जा चुके वायरस से इम्यून रिस्पांस सक्रि य किया जाता है।
ऐसी वैक्सीन चीन की सिनोवैक कंपनी कोरोनावैक के नाम से तैयार कर रही है जो फेज दो पर है। दूसरी भी चीन की ही कंपनी सिनोफार्म है जो बीस करोड़ समग्र वायरस वैक्सीन बनाने का दावा कर रही है किन्तु दूसरे चरण पर है।
चीन के ही इन्स्टीच्यूट आफ मेडिकल बायोलोजी की वैक्सीन फेज एक पर है।

5- अन्य रोगों की वैक्सीन
किसी दूसरी बीमारियों के लिये बनायी वैक्सीन जो संभवत: कोविड 19 पर भी कारगर हों। आस्ट्रिया की मर्डोक चिल्ड्रेन रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीबी वैक्सीन फेज तीन में है। यह कोविड 19 से आंशिक बचाव कर सकेगी। जाहिर है कि वैक्सीन निर्माण के लिए दिन रात कवायदें जारी हैं। इस वर्ष के अंत तक एकाधिक वैक्सीन के तैयार होने और व्यापक टीकाकरण की संभावना दिख रही है। भारत भी कुछ कंपनियों के साथ व्यावसायिक सौदे के लिए तत्पर है। मगर अभी से भारत में वैक्सीन के बहिष्कार का वातावरण न्यस्तस्वार्थी और मजहबी तत्व शुरु कर चुके हैं जबकि हर्ड इम्युनिटी या वैक्सीन के अलावा नये कोरोना वायरस का समूल निर्मूलन संभव नहीं है।  वरिष्ठ नागरिक और गंभीर बीमार लोगों के लिये हर्ड इम्युनिटी जहां खतरे की घंटी है, वहीं वैक्सीन के यथाशीघ्र आने से उन्हें राहत मिल जायेगी और वे भी एक मुक्त और निर्द्वंद्व जीवन जी सकेंगे।              -डा. अरविंद मिश्र