सरकारी डिनरों में मस्त नेता और रोटी के लिए तड़पती जनता: लक्ष्मीकांता चावला

अमृतसर/दीपक मेहरा: पूर्व केबिनेट मंत्री लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि पंजाब सरकार और पंजाब में राजनीतिक आंदोलन करने वाले जितने भी दल हैं क्या उन्होंने कभी सोचा है कि पंजाब में और देश में कितने लोग भूखे हैं और पंजाब में भी कितने लोग आत्महत्याएं, भूख, बेकारी और बीमारी से पीड़ित होकर कर रहे हैं। सरकार, विपक्षी दल और सारा प्रशासन ने एक शब्द भी उन बेचारों के लिए नहीं कहा जहां फरीदकोट में 16 अक्टूबर को पति-पत्नी ने दो बच्चों के साथ आत्मदाह किया। मरने वाले ने एक कारण गरीबी भी लिखा है, पर उसकी गरीबी का किसी नेता पर असर नहीं। बड़े आराम से चंडीगढ़ के भवनों में बैठे सरकारी लंच-डिनर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पक्की बात यह है कि उस परिवार के लिए आंसू बहाने भी कोई नेता नहीं गया होगा, फरीदकोट से लेकर चंडीगढ़ का। पंजाब सरकार यह आंकड़े जारी करे कि लाकडाउन के कारण बेकारी से कितने लोग मौत के मुंह में जाने को मजबूर हुए। सरकार यह भी बताए कि सरकारी संस्थानों से कितने कर्मचारी निकाले गए, जो आज रोटी के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। जनता जानती है कि जो आंदोलन है वह अपनी राजनीतिक दुकानें चमकाने के लिए है, रोटी और रोजगार के लिए तड़प रही जनता के लिए नहीं है।