हिटलर के 'पालतू मगरमच्छ' की हुई मौत, विश्व युद्ध के दौरान भी नहीं मरा था सैटर्न 

मॉस्को (उत्तम हिन्दू न्यूज):एडोल्फ हिटलर को किसी परिचय की जरूरत नहीं है उनका नाम आज भी पूरी दुनिया में चर्चित है। मॉस्को से एक ऐसी जानकारी सामने आई है जिसे पढ़ने के बाद आप भी एक पल के लिए हैरान हो जाएंगे। खबर के मुताबिक मॉस्को के चिड़ियाघर में एक मगरमच्छ की मौत हो गई है और वह 84 साल का था, लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि वह एडोल्फ हिटलर का पालतू मगरमच्छ था। 

हिटलर के 'पालतू मगरमच्छ' की मॉस्को के चिड़ियाघर में मौत!

हिटलर के इस मगरमच्छ की मौत की खबर दुनिया में फैलते ही इससे जुड़ी कई दिलचस्प कहानी और किस्से सामने आने शुरू हो गए हैं। मॉस्को चिड़ियाघर के मुताबिक इस मगरमच्छ का नाम सैटर्न है। इसका जन्म अमेरिका में हुआ था, लेकिन बाद में इसे बर्लिन के चिड़ियाघर में भेजा गया। लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस चिड़ियाघर पर बम गिराया गया था, उसके बाद इसे कुछ दिन तक छिपा कर रखा गया। लेकिन बाद में ब्रिटिश सैनिकों द्वारा इसे ढूंढ कर निकाला गया और इस सोवियत संघ को दे दिया गया और तब से यह मगरमच्छ रूस की राजधानी मॉस्को के चिड़ियाघर में ही रह रहा था। 

हिटलर के 'पालतू मगरमच्छ' की मॉस्को के चिड़ियाघर में मौत!

हिटलर के इस मगरमच्छ की मौत के बाद कई सारी कहानियां सामने आई हैं। ऐसा कहा जाता है कि जैसे ही बर्लिन चिड़ियाघर में सैटर्न मगरमच्छ को लाया गया एक अफवाह फैल गई कि यह हिटलर का पसंदीदा पालतू जानवर था. मॉस्को चिड़ियाघर के पूर्व कर्मचारी डिमित्री वासीलेव ने कहा कि हिटलर को यह पसंद था। 

एक अन्य कहानी के मुताबिक जब चिड़ियाघर पर बमबारी हो रही थी तब सैटर्न मगरमच्छ सीवेज ड्रेनेज से होते हुए बेसमेंट में जाकर छिप गया था। 1990 में एक कहानी आई कि जब सोवियत संघ टूटा और रूसी संसद पर बम दागे गए तब सैटर्न रो रहा था। क्योंकि, उसे बर्लिन बमबारी की याद आ रही थी। इसके बाद इसे मॉस्को जू में शिफ्ट किया गया था।