Tuesday, April 23, 2019 05:33 PM

हिन्दू विरुद्ध साजिश

11 सितम्बर 1893 को अमेरिका के शहर शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद द्वारा हिन्दू धर्म को लेकर दिए भाषण की 125वीं वर्षगांठ को लेकर शिकागो में हुई दूसरी विश्व हिन्दू कांग्रेस को संबोधित करते हुए भारत के उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने कहा कि कुछ लोग हिन्दू शब्द को अछूत तथा असहनीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जैसे संतों की दिखाई राह पर चलकर हिन्दू धर्म के सच्चे मूल्यों की रक्षा करने की जरूरत है ताकि अल्प जानकारी के कारण बनी राय को बदला जा सके। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत वैश्विक सहिष्णुता में विश्वास रखता है और सभी धर्मों को स्वीकार करता है। नायडू ने हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि हिन्दू दर्शन के मूल में है सांझा करना और देखभाल करना। उन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण और सम्मान को हिन्दुत्व का एक महत्वपूर्ण पहलू बताया। नायडू ने राधाकृष्णन को उद्धत करते हुए कहा, दुनिया के अन्य धर्मों के विपरीत हिन्दू धर्म में कोई पैगंबर नहीं है, इसमें किसी एक ईश्वर को नहीं पूजा जाता, कोई एक धर्म सिद्धांत नहीं है, इसमें केवल एक ही प्रकार के धार्मिक रीति-रिवाजों या क्रियाओं का पालन नहीं किया जाता, बल्कि ऐसा नहीं लगता कि इसमें किसी धर्म या पंथ की संकीर्ण परंपरागत विशिष्टताओं को संतुष्ट किया जा रहा हो। इसकी व्याख्या कुछ और नहीं तो मोटे तौर पर जीवन जीने के तरीके के रूप में की जा सकती है। उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि वह अपनी मातृभाषा और संस्कृति की रक्षा करें।

उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने हिन्दुओं प्रति फैलाई जा रही भ्रम व भ्रांतियों को लेकर जो चिंता प्रकट की है वह ऐसा कटु सत्य है जिससे इंकार नहीं किया जा सकता। हिन्दुओं विरुद्ध साजिश का खेल तो स्वामी विवेकानंद के समय से ही चल रहा है। इसका जिक्र उन्होंने अपनी अमेरिका यात्रा के अनुभवों को याद करते हुए कहा था 'यह बात सच नहीं है कि मैं किसी धर्म का विरोधी हूं। और मैं भारत के ईसाई पादरियों से शत्रुता रखता हूं, यह भी उतना ही असत्य है। परन्तु अमेरिका में वे जिस तरीके से चंदा से धन एकत्र करते हैं, उसका मैं अवश्य ही प्रतिवाद करता हूं। बच्चों की पाठ्य पुस्तकों में ऐसे चित्रों के छापने का क्या मतलब है, जिनमें हिन्दू माता अपने बच्चे को गंगा नदी में मगर के मुंह में झोंक रही है? चित्र में माता तो काले रंग की है, परन्तु बच्चे का रंग गोरा रखा गया है, जिससे कि बच्चे के प्रति सहानुभूति अधिक बढ़े और धन अधिक प्राप्त हो। उन चित्रों का भी क्या अर्थ है, जिनमें एक मनुष्य अपनी पत्नी को अपने हाथों से एक स्तम्भ से बांधकर इसलिए जीवित जला रहा है कि वह मरकर भूत हो जाय और उसके (अपने पति के) शत्रुओं को सताये! मनुष्यों के समूह को कुचलते हुए बड़े-बड़े रथों के चित्र छापने का क्या मतलब है? उस दिन देश में (अमेरिका में) बच्चों के लिए एक पुस्तक प्रकाशित हुई। उसमें एक सज्जन अपनी कलकत्ता यात्रा का वर्णन कर रहे हैं। वे कहते हैं कि कलकत्ता की सड़कों पर कई धर्मोन्मत्त मनुष्यों पर से उनको कुचलते हुए एक बड़ा रथ चलाया जा रहा है, ऐसा मैंने देखा। मेम्फिस शहर में मैंने एक पादरी को यह प्रचार करते सुना कि भारत के प्रत्येक ग्राम में एक ऐसा तालाब रहता है, जो छोटे छोटे बच्चों की हड्डियों से भरा रहता है। हिन्दुओं ने ईसा मसीह के उन शिष्यों को, जो प्रत्येक ईसाई बालक को यह सिखाते हैं कि हिन्दू दुष्ट हैं, अभागे हैं और पृथ्वी में अत्यन्त भयानक शैतान हैं, क्या किया है? यहां के बालकों की रविवार की पाठशालाओं की शिक्षा का एक अंश यही कहता है कि जो ईसाई नहीं है, उन लोगों से और विशेषकर हिन्दुओं से घृणा करो, ताकि बचपन से ही वे पादरी मिशन को अपने पैसे चंदे के रूप में देने लगें। यदि सत्य के लिए नहीं, तो कम से कम अपने ही बच्चों के सदाचार की रक्षा के निमित्त ईसाई पादरियों को चाहिए कि वे ऐसी बातें न होने दें। ऐसे बच्चे आगे बड़े होकर निर्दयी पुरुष और स्त्री बनते हैं, तो इसमें आश्चर्य ही क्या है?... मेरे देशबंधुओ! मैं इस देश में एक वर्ष से अधिक रह चुका हूं। मैंने इनके समाज का प्राय: कोना-कोना छान डाला है, और दोनों का मिलान करके मैं तुम लोगों को बता रहा हूं कि जैसा पादरी लोग संसार को बताया करते हैं, उस प्रकार न तो हम लोग शैतान हैं और न वे लोग देवदूत ही, जैसा कि उनका दावा है। पादरी लोग नैतिक पतन, शिशु-हत्या और हिन्दू विवाह-पद्धति के दोषों के संबंध में जितना ही कम बोलें, उतना ही उनके लिए बेहतर होगा।'

देश और विदेश दोनों में हिन्दुओं विरुद्ध साजिश रचकर हिन्दुओं की छवि खराब करने का प्रयास शताब्दियों से चला आ रहा है। समय की मांग है कि हिन्दू समाज परमार्थ की राह पर चलता हुआ अपने कर्म से अपने विरोधियों को उत्तर दे। 'तुम शुद्धस्वरूप हो, उठो, जाग्रत हो जाओ। हे महान्, यह नींद तुम्हें शोभा नहीं देती। उठो, यह मोह तुम्हें भाता नहीं। तुम अपने को दुर्बल और दु:खी समझते हो? हे सर्वशक्तिमान, उठो, जाग्रत होओ, अपना स्वरूप प्रकाशित करो।'

स्वामी विवेकानंद के उपरोक्त संदेश को समझ कर जीवन जीने से हिन्दुओं विरुद्ध साजिश करने वाले अतीत कीति एक बार फिर असफल हो जाएंगे।

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

देश की सबसे बड़ी और तेज WhatsApp News Service से जुड़ने के लिए हमारे नंब 7400023000 पर Missed Call दें। इस नंबर को Save करना मत भूलें।