महाराजा फरीदकोट की बेटियां ही 20 हजार करोड़ की संपत्ति की असली वारिस: हाईकोर्ट

08:30 PM Jun 01, 2020 |

फरीदकोट/चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज): आज माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से फरीदकोट रियासत से संबंधित 20 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के संबंध में ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया। अपने ऐतिहासिक फैसले में कोर्ट ने कहा कि फरीदकोट रियासत के अंतिम महाराजा हरिंदर सिंह बराड़ बंस बहादर की 20 हजार करोड़ की संपत्ति की वास्तविक वारिस उनकी बेटियां हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने महाराजा फरीदकोट की तरफ से की गई वसीयत को भी रद्द कर दिया है। आज अदालत ने अपने फैसले में निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा है। दूसरी तरफ इस फैसले के विरुद्ध महारावल खेवा जी ट्रस्ट की तरफ से सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया गया है। 

निचली अदालत ने 25 जुलाई 2013 को फैसला सुनाते हुए शाही जायदाद को दोनों बेटियों (अमृत कौर और दीपइंदर कौर मेहताब) को सौंपने के आदेश दिए थे। इस फैसले के खिलाफ महारावल खेवाजी ट्रस्ट ने चंडीगढ़ के सेशन कोर्ट में अपील की थी। जिला अदालत ने 5 फरवरी 2018 को अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले पर ही मुहर लगाई थी। उसके बाद मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित था। 



दरअसल फरीदकोट रियासत के अंतिम शासक रहे महाराजा हरिंदर सिंह बराड़ की बेटी दीपइंदर कौर मेहताब के निधन के बाद शाही परिवार की हजारों करोड़ों की जायदाद के वारिस का मामला उलझ गया था। इस वसीयत को महाराजा की सबसे बड़ी बेटी अमृत कौर ने अदालत को चुनौती दी हुई थी, जिन्हें महाराजा ने वसीयत में बेदखल कर दिया था।



बताया जाता है कि अक्टूबर 1981 में राजा हरिंदर सिंह ने इकलौते बेटे हरमहिंदर सिंह की मौत के बाद शाही जायदाद के बारे में वसीयत लिखी गई थी। वसीयत में बड़ी बेटी अमृत कौर को बेदखल कर दिया था और पूरी जायदाद की निगरानी के लिए महारावल खेवाजी ट्रस्ट की स्थापना कर दी थी। ट्रस्ट की चेयरपर्सन बेटी दीपइंदर कौर को बनाया और छोटी बेटी महीपइंदर कौर को वाइस चेयरपर्सन बनाया था। 1989 में राजा हरिंदर सिंह बराड़ की मौत हो गई। ट्रस्ट ने शाही परिवार के शीशमहल और राजमहल समेत कुछ इमारतों को स्थायी तौर पर बंद कर दिया था।  यह राजमहल दुनिया की चुनिंदा इमारतों में से एक है, जिसे फरीदकोट के लोग कभी देख नहीं पाए हैं। उधर, शाही जायदाद से बेदखल अमृत कौर ने पिता की वसीयत को चंडीगढ़ की अदालत में चुनौती दी थी।