गंगा की निर्मलता के लिए हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण आदेश

नैनीताल (उत्तम हिन्दू न्यूज) : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने तीर्थ नगरी हरिद्वार के साथ ही गंगा की निर्मलता और स्वच्छता को बनाये रखने के लिये स्थानीय प्रशासन को मंगलवार को कई महत्वपूर्ण आदेश दिये। न्यायालय ने स्थानीय प्रशासन को कहा कि वह यह सुनिश्चित करे कि गंगा में बिना उपचार के सीवर न बहे। यही नहीं कोर्ट ने एक माह के अंदर घाटों पर 25 चेजिंग रूम बनाने को भी कहा है।
 
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की युगल पीठ ने बागपत निवासी नरेन्द्र की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ये आदेश दिये हैं। युगल पीठ ने नगर निगम को गंगा घाटों की सफाई हर तीन घंटे में करने का आदेश दिया है। पीठ ने घाटों पर सफाई सुनिश्चित करने के लिये हरिद्वार के जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया है। न्यायालय ने गंगा घाटों पर निर्मित्त होने वाले शौचालयों का निर्माण एक माह के अंदर करने और उन्हें मुख्य सीवर लाइन से जोड़ना सुनिश्चित करने तथा एक माह के अंदर गंगा घाटों पर चेजिंग रूम बनाने का भी आदेश दिया है। न्यायालय ने तीर्थ होटल और नयी सोता के बीच सीवर के नालों में बहने को गंभीरता से लेते हुए इन्हें 72 घंटे के अंदर सील करने को कहा है। न्यायालय ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के चालान करने को भी कहा है।

न्यायालय ने चोटीवाला होटल के सामने बहने वाले नाले की नियमित सफाई करने तथा नाले को पूरी तरह से कवर करने का भी आदेश दिया है। युगल पीठ ने कुश घाट पर आवरा पशुओं के घूमने पर भी निगम को रोक लगाने को कहा है। साथ ही पीठ ने सिंचाई विभाग को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि रोडीवेलवाला में फैले कचरे को 48 घंटे के अंदर हटाया जाये। याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में घाटों पर फैली गंदगी और कचरे को लेकर चिंता व्यक्त की गयी थी। मामले की सुनवाई के बाद पीठ ने दो कोर्ट कमिश्नरों की नियुक्ति की थी। कोर्ट कमिश्नराें की ओर गत शनिवार को तीर्थनगर का दौरा किया गया और सोमवार को न्यायालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। 

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