पीयू सीनेट में बहाल हो हरियाणा की हिस्सेदारी : दिग्विजय

चंडीगढ़/खुशबू नैब: छात्र संगठन इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने पंजाब यूनिवर्सिटी में हरियाणा की हिस्सेदारी का मुद्दा उठाते हुए हरियाणा का हक मांगा है। उन्होंने पीयू सीनेट में हरियाणा की हिस्सेदारी बहाल करने की पुरजोर मांग करते हुए पीयू में प्रशासनिक सुधारों को लेकर उपराष्ट्रपति द्वारा गठित विशेषज्ञों की समिति और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखे हैं।
इनसो अध्यक्ष ने उपराष्ट्रपति द्वारा गठित विशेषज्ञ कमेटी को पत्र लिखते हुए कहा कि हरियाणा के हजारों छात्रों एवं पूर्व छात्रों, सैकड़ों शिक्षक व गैरशिक्षक कर्मचारियों को उनका हक देने के लिए पीयू में प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से सबसे बड़ी फैसले लेने वाली सीनेट में हरियाणा का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़-हरियाणा और पंजाब की साझी राजधानी है और पीयू चंडीगढ़ का सबसे बड़ा शैक्षणिक संस्थान है जिसमें पहले हरियाणा की हिस्सेदारी थी लेकिन 90 के दशक में दुर्भाग्यपूर्ण कारणों से पीयू सीनेट में हरियाणा की हिस्सेदारी को बिल्कुल खत्म कर दिया गया। दिग्विजय ने कहा कि पीयू में पढऩे और नौकरी करने वाले हरियाणा पृष्ठभूमि के लोगों के हितों की रक्षा करना बहुत जरूरी है इसलिए पीयू सीनेट में प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से हरियाणवियों को उनका हक दिया जाए। वहीं दिग्विजय सिंह चौटाला ने इस विषय में एक अन्य पत्र मुख्यमंत्री मनोहर लाल को लिखते हुए कहा कि पीयू में हरियाणा का हक वापस लेने की दिशा में तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार को भी आवश्यक कदम उठाने होंगे। उन्होंने इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर से पीयू के लिए वित्तीय अनुदान सुनिश्चित करने, पंचकुला, अंबाला व यमुनानगर के कॉलेजों को पीयू से जोडऩे के लिए उपराष्ट्रपति सचिवालय, विशेषज्ञ समिति व पीयू प्रशासन से जरूरी संवाद स्थापित करने की मांग सीएम से की। इनसो अध्यक्ष ने कहा कि यह विषय पीयू से जुड़े हरियाणवी पृष्ठभूमि के लोगों के हितों को सुनिश्चित करने के लिए ही नहीं बल्कि साझी राजधानी के सार्वजनिक संस्थानों में हरियाणा का हक सुनिश्चित करने के लिए भी बेहद आवश्यक है। इसके अलावा उन्होंने विशेषज्ञ समिति को अपने पत्र के माध्यम से पीयू सीनेट के वोटर लिस्ट बनाने की प्रक्रिया को प्रभावी और पारदर्शी बनाने की मांग की। दिग्विजय ने अपने पत्र की प्रतिलिपियां देश के उपराष्ट्रपति व पीयू के वाइस चांसलर को भी भेजी हैं।