हरियाणा भाजपा अध्यक्ष धनखड़

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने हरियाणा प्रदेश की राजनीति को देखते हुए तथा प्रदेश में पंजाबी व जाट का संतुलन बनाये रखने के लिए हरियाणा के पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी है। इस पद के लिए पूर्व वित्त मंत्री कै. अभिमन्यु, केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और पं. रामबिलास शर्मा के नामों सहित एक दो नाम और भी थे लेकिन नड्डा ने धनखड़ को महत्व दिया। नवनियुक्त हरियाणा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे ओपी धनखड़ को संगठन की राजनीति का लंबा अनुभव है। धनखड़ सबसे पहले वर्ष 1978 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े और रोहतक स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में पढ़ते हुए उन्होंने अभाविप के रास्ते सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भिवानी कालेज में करीब 11 साल तक भूगोल के लेक्चरर के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद वह नौकरी छोडक़र पूरी तरह भाजपा में आ गए। भाजपा की राजनीति में धनखड़ पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने वर्ष 2011 से लेकर 2013 और 2013 से लेकर 2015 तक भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए पूरे देश में किसानों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई।

धनखड़ साल 1996 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और उन्हें राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली जो अटल-अडवानी युग था। इसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश का प्रदेश प्रभारी बनाया गया। साल 2014 में रोहतक संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन यहां पर हरियाणा के पूर्व सीएम बीएस हुड्डा के बेटे दीपेन्द्र हुड्डा के सामने हार का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब अपने पहले कार्यकाल के दौरान गुजरात में अपने ड्रीम प्रोजैक्ट ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की स्थापना की तो ओपी धनखड़ को इस प्रोजैक्ट का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया था। धनखड़ ने देशभर में कार्यक्रमों का आयोजन कर सरदार पटेल की प्रतिमा के लिए लोहा जमा करने का अभियान चलाया। 2014 में ही बादली विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर धनखड़ हरियाणा विधानसभा पहुंचे और कैबिनेट में मंत्री पद से नवाजे गए। वर्ष 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में बादली सीट से ओम प्रकाश धनखड़ को हार का सामना करना पड़ा था लेकिन फिर भी भाजपा आलाकमान ने हरियाणा में उनके ही ऊपर विश्वास जताया।

धनखड़ से पहले प्रदेश अध्यक्ष रहे सुभाष बराला की छवि एक नर्म नेता के रूप में थी। इसी कारण प्रदेश की राजनीति विशेषतया संगठन में भी वह अपनी छाप नहीं छोड़ सके। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बराला भी करीबी थे और धनखड़ भी। धनखड़ का तो कहना यह है कि खट्टर ही उन्हें भाजपा में लेकर आए हैं। इस तथ्य को देखते हुए कहा जा सकता है कि खट्टर की सहमति से ही धनखड़ प्रदेश अध्यक्ष बने होंगे। चंडीगढ़ में पत्रकारों से हरियाणा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के नाते पहली बातचीत के दौरान ही धनखड़ ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में सरकार भले ही गठबंधन के साथ चल रही है लेकिन संगठन दोनों दलों के अपने-अपने हैं। गठबंधन के नाते दोनों दलों को सम्मान देना एक-दूसरे दल का फर्ज है लेकिन दोनों राजनीतिक दलों के संगठन अपने स्तर पर अपना एजेंडा लेकर ही जनता में जाएंगे। भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता जजपा के कार्यकर्ताओं को उचित मान-सम्मान देगा। भाजपा कार्यकर्ताओं को जल्द ही रोड मैप दे दिया जाएगा, जिसके आधार पर वह अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे। ओपी धनखड़ ने कहा प्रदेश में गठबंधन की सरकार है लेकिन इसका भाजपा के संगठन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह हर समय अपने कार्यकर्ताओं के लिए उपलब्ध रहेंगे। पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता पार्टी के हित में उन्हें सुझाव दे सकता है और अगर वह पार्टी के हित में हुआ तो उसे लागू करने में कोई आपत्ति नहीं होगी।

एक सवाल के जवाब में धनखड़ ने कहा कि भाजपा में कोई लॉबिंग नहीं चलती और न ही मैंने अध्यक्ष बनने के लिए कोई लॉबिंग की है। पूर्व समय के दौरान भी पार्टी ने उन्हें जब जिम्मेदारियां दी थीं तब उन्हें उनके बारे में अधिक ज्ञान भी नहीं था। इसके बावजूद उन्हें न केवल संगठन का सहयोग मिला बल्कि आम लोगों ने भी समर्थन दिया। अब प्रदेशाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी को भी पूर्ण रूप से निभाने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी संगठन को चलाने के लिए ‘अपना सर्वश्रेष्ठ दो, साथियों का सर्वश्रेष्ठ लो’ का फार्मूला लागू करने का दावा करते हुए धनखड़ ने कहा कि सरकार व संगठन में तालमेल बढ़ाना उनकी प्राथमिकता रहेगी। सरकार की नीतियों को संगठन के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाने के लिए रोड मैप तैयार किया जाएगा। ओपी धनखड़ ने बताया कि बरौदा उपचुनाव में भाजपा विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले उन्होंने बरौदा का दौरा किया था। वहां के लोग सरकार के साथ चलने का मन बना चुके हैं। प्रदेश में विपक्ष के पास आज कोई मुद्दा नहीं है। बहुत जल्द संगठनात्मक स्तर पर बैठक का आयोजन करके बरौदा उपचुनाव की रणनीति तैयार की जाएगी। कहा, चुनाव से पहले जीत के दावे करना सभी राजनीतिक दलों का अधिकार है। असल फैसला वहां की जनता करेगी।

ओ.पी. धनखड़ के सम्मुख पहली चुनौती बरौदा का उपचुनाव जीतना ही है, दूसरा लक्ष्य हरियाणा के जाट वर्ग में भाजपा के आधार को मजबूत करना। गत विधानसभा चुनावों में जजपा ने भाजपा के जाट आधार को झटका दिया था। जजपा के युवा नेता दुष्यंत चौटाला जाट मतदाता में एक नए लेकिन एक परिपक्व चेहरे के रूप में सामने आए थे। जजपा को विधानसभा में मिली जीत का श्रेय भी दुष्यंत चौटाला को ही जाता है। अब जाट मतदाता के बीच भाजपा के आधार को बढ़ाने का अर्थ जजपा से टकराव भी हो सकता है, जिसका संकेत धनखड़ ने यह कह कर दे दिया है कि सरकार बेशक गठबंधन की है लेकिन संगठन तो अपने-अपने हैं। हरियाणा में भाजपा का पंजाबी मतदाताओं में मजबूत आधार है लेकिन गत विधानसभा चुनावों में जाट मतदाता ने भाजपा से दूरी बनाए रखी। ओ.पी. धनखड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का मुख्य लक्ष्य जाट मतदाता से दूरी दूर करना ही है। क्या धनखड़ ऐसा कर पायेंगे, यही मुख्य प्रश्न है।

- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।