कोरोना का कहर

आज से नवरात्रे शुरू हैं और 2 अप्रैल रामनवमी तक चलेंगे। आप सब धर्मप्रेमियों से यही प्रार्थना है कि घर बैठकर जहां महामाई का पूजन करें वहीं महामाई से विश्व को कोरोना के कहर से बचाने की प्रार्थना भी करें। बेटे तो अपने किए की सजा ही भुगत रहे हैं, जितना प्रकृति से मानव जाति ने खिलवाड़ किया है उतना किसी और ने नहीं किया। आज उसी का परिणाम है कि जल, थल और आकाश सभी प्रकृति के प्रकोप से प्रभावित हैं। विश्व में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या लाखों तक पहुंच चुकी है। विश्व के 186 देश कोरोना प्रभावित हैं और 15,000 से ऊपर लोगों की मौत हो चुकी है। यह सिलसिला अभी थमने का नाम नहीं ले रहा। कोरोना के कहर को देखते हुए अरबों लोग घरों में कैद हो गए हैं। कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए विश्व के सभी विकसित और विकासशील देश अपने-अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं लेकिन अभी सफलता नहीं मिली है। इसलिए सभी को सतर्क रहकर और एहतियात लेने की आवश्यकता है। ‘डब्ल्यूएचओ के मुताबिक कोरोना विषाणु किसी को भी संक्रमित कर सकता है, लेकिन उन लोगों को इससे ज्यादा खतरा है, जिन्हें पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है या जो उम्रदराज हैं।

विज्ञान पत्रिका ‘द लांसेट जर्नल’ के एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग उम्रदराज हैं या जिन्हें उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियां हैं, उन्हें खतरा है। यह अध्ययन चीन में वुहान के दो अस्पतालों के 191 मरीजों पर किया गया। मर चुके और स्वस्थ हो गए- दोनों तरह के लोगों की बीमारी के बारे में अध्ययन किया गया। पत्रिका के मुताबिक, जो नमूने लिए गए उनमें से 58 को उच्च रक्तचाप, 36 को मधुमेह और 15 को दिल संबंधी बीमारियां थीं। इन 191 मरीजों की उम्र 18 से 87 साल तक थी। ज्यादातर मरीज पुरुष थे। देखा गया कि जिन मरीजों की मौत हुई, उनमें से उम्रदराज मरीजों में से अधिकतर में अस्पताल में भर्ती होते समय सेप्सिस के लक्षण थे। उन्हें उच्च रक्तचाप और मधुमेह था। जहां तक भारत का सवाल है, यहां मधुमेह के मरीजों की संख्या ज्यादा है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक, भारत में 2019 तक मधुमेह के मरीजों की संख्या 7.7 करोड़ थी। दूसरी ओर, ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2018 के मुताबिक भारत में 1.31 अरब लोगों को अस्थमा है जिनमें छह फीसद बच्चे और दो फीसद व्यस्क हैं।

भारत में संक्रमित लोगों में कितनों को मधुमेह या अस्थमा था, इसके आंकड़े जमा किए जा रहे हैं। पत्रिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी को पहले से कोई बीमारी है तो यह जरूरी नहीं कि उसे कोरोना संक्रमण दूसरों के मुकाबले जल्द हो जाए, लेकिन संक्रमण के बाद हालात अन्य मरीजों से ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ ने ‘द लांसेट जर्नल’ की रिपोर्ट आने के बाद परामर्श जारी किया है, जिसमें अस्थमा के मरीजों के लिए कहा गया है कि वे डॉक्टर द्वारा बताया गया अपना इनहेलर लेते रहें, इससे किसी विषाणु के कारण होने वाले अस्थमा दौरे का खतरा कम हो जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, जिन लोगों को टाइप एक और टाइप दो डायबिटीज है, उनमें कोरोना विषाणु के गंभीर लक्षण हो सकते हैं। कोरोना संक्रमण में सांस संबंधी समस्या हो जाती है। विषाणु गले, श्वसन नली और फेफड़ों पर असर डालता है। ऐसे में पहले से कोई दिक्कत होने पर इलाज करना और चुनौतीपूर्ण बन जाता है। अगर फ्लू के लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। कोरोना विषाणु का इलाज इस बात पर आधारित होता है कि मरीज के शरीर को सांस लेने में मदद की जाए और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि व्यक्ति का शरीर खुद विषाणु से लडऩे में सक्षम हो जाए।’

एक अन्य सर्वे अनुसार यह बात सामने आ रही है कि पहले नगरीय क्षेत्र में एक व्यक्ति जहां 70-75 लीटर पानी व्यय कर पाता था, अब यह व्यय 125 लीटर तक पहुंच गया है। गर्मी का सीजन सामने है, और हालात जल्द ठीक न हुए तो आगे पानी की किल्लत कोरोना से निपटने में आड़े आ सकती है। लिहाजा इसे लेकर भी सजगता आवश्यक है। बुंदेलखंड में सक्रिय जल जन जोड़ो अभियान नामक संस्था द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में डेढ़ गुना से अधिक वृद्धि हुई है। यह अध्ययन जल संस्थान और जल निगम झांसी, कानपुर, बांदा, फतेहपुर, प्रयागराज, आगरा, बरेली, लखनऊ जैसे शहरों में 19 से 22 मार्च के कालखंड में किया गया है। हर शहर के औसत 100 घरों को इसमें शामिल किया गया। जल संस्थान एवं जल निगम से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर आंकलन किया गया। संस्था के प्रमुख डॉ. संजय सिंह अनुसार हमारे देश का 70 प्रतिशत पानी खेती में प्रयोग किया जाता है, 15 प्रतिशत उद्योगों में जबकि 12-15 प्रतिशत घरेलू उपयोग में आ रहा है। फिलहाल चिंता इस बात की है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव में पानी की कमी आड़े न आने पाए। लेकिन थोड़ी गर्मी बढऩे पर यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है। ऐसे में आज सवाल यह है कि पानी को लेकर हम कितने सजग हैं।

कोरोना वायरस के कारण लोग पानी पी भी रहे हैं और हाथ भी अधिक धो रहे हैं। इसलिए पानी की किल्लत भी आ सकती है। हवा और जल बिना जिन्दगी के बारे सोच भी नहीं सकते। लेकिन मानव जाति ने अपने स्वार्थ के लिए जल और हवा दोनों को प्रदूषित कर दिया है। इसी कारण आये दिन मानव को प्रकृति का प्रकोप झेलना पड़ रहा है। कोरोना वायरस विश्व को संदेश भी दे रहा है कि अगर प्रकृति से खिलवाड़ करना बंद न किया तो फिर प्रकृति के कहर के लिए तैयार रहें। महामाई से यही प्रार्थना है कि प्रकृति के कहर से बचाएं और मानव जाति को सद्बुद्धि दें ताकि वह प्रकृति के महत्व को समझ सके।
जय माता दी

- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।